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कॊण्डललो नॆलकॊन्न — Complete Lyrics

कॊण्डललो नॆलकॊन्न

Sanskrit text with English transliteration and translation

Verse 1
कॊण्डललो नॆलकॊन्न कोनेटि रायडु वाडु कॊण्डलन्त वरमुलु गुप्पॆडु वाडु
koṇḍalalō nelakonna kōnēṭi rāyaḍu vāḍu koṇḍalanta varamulu guppeḍu vāḍu ॥
वह कोनेरु — पवित्र पुष्करिणी — का राजा है, जिसने पहाड़ियों के बीच अपना वास बनाया है; और वह मुट्ठियाँ भर-भरकर पहाड़ों-जितने वरदान लुटाता है।
Verse 2
कुम्मर दासुडैन कुरुवरति नम्बि इम्मन्न वरमुलॆल्ल इच्चिनवाडु दॊम्मुलु सेसिन यट्टि तॊण्डमान् चक्कुरवर्ति रम्मन्न चोटिकि वच्चि नम्मिन वाडु कॊण्डललो नॆलकॊन्न कोनेटि रायडु वाडु कॊण्डलन्त वरमुलु गुप्पॆडु वाडु
kummara dāsuḍaina kuruvarati nambi immanna varamulella iccinavāḍu । dommulu sēsina yaṭṭi toṇḍamān cakkuravarti rammanna cōṭiki vacci nammina vāḍu ॥ koṇḍalalō nelakonna kōnēṭi rāyaḍu vāḍu koṇḍalanta varamulu guppeḍu vāḍu ॥
अपने भक्त कुम्हार कुरुवरति नम्बि को उसने माँगे हुए सारे वरदान दे दिए। और अपने लिए युद्ध लड़नेवाले सम्राट तोंडमान के पुकारने पर वह ठीक उसी स्थान पर आ खड़ा हुआ और उसका विश्वास बना रहा। वही है पहाड़ियों में बसा कोनेरु का स्वामी, जो मुट्ठियों से पर्वतों-जैसे वरदान बाँटता है।
Verse 3
अच्चपु वेडुकतोड ननन्ताल्वारुकि मुच्चिलि वॆट्टिकि मन्नि मोसिनवाडु मच्चिक दॊलक तिरुनम्बि तोडुत निच्च निच्च माटलाडि नॊच्चिनवाडु
accapu vēḍukatōḍa nanantālvāruki muccili veṭṭiki manni mōsinavāḍu । maccika dolaka tirunambi tōḍuta nicca nicca māṭalāḍi noccinavāḍu ॥
केवल आनंद के लिए उसने अपने भक्त अनंताल्वार के लिए मज़दूर की तरह मिट्टी ढोई। और स्नेह में पिघलकर वह तिरुमल नम्बि से नित्य-प्रतिदिन बातें करता रहा — घर के अपने जन की तरह।
Verse 4
कञ्चिलोन नुण्ड दिरुकच्चिनम्बि मीद करुणिञ्चि तन यॆडकु रप्पिञ्चिन वाडु यॆञ्चि ऎक्कुडैन वेङ्कटेशुडु मनलकु मञ्चिवाडै करुण बालिञ्चिन वाडु कॊण्डललो नॆलकॊन्न कोनेटि रायडु वाडु कॊण्डलन्त वरमुलु गुप्पॆडु वाडु
kañcilōna nuṇḍa dirukaccinambi mīda karuṇiñci tana yeḍaku rappiñcina vāḍu । yeñci ekkuḍaina vēṅkaṭēśuḍu manalaku mañcivāḍai karuṇa bāliñcina vāḍu ॥ koṇḍalalō nelakonna kōnēṭi rāyaḍu vāḍu koṇḍalanta varamulu guppeḍu vāḍu ॥
दूर कांची में रहनेवाले तिरुकच्चि नम्बि पर करुणा करके उसने उन्हें अपने पास बुला लिया। विचार करके देखो — सबसे बड़ा वह वेंकटेश हमारे लिए कितना भला निकला — करुणा बरसाता, कृपा से हमें सँभालता। वही है पहाड़ियों में बसा कोनेरु का स्वामी, जो मुट्ठियों से पहाड़ों-जैसे वरदान देता है।

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