कॊण्डललो नॆलकॊन्न PDF
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कॊण्डललो नॆलकॊन्न कोनेटि रायडु वाडु कॊण्डलन्त वरमुलु गुप्पॆडु वाडु ॥
koṇḍalalō nelakonna kōnēṭi rāyaḍu vāḍu koṇḍalanta varamulu guppeḍu vāḍu ॥
वह कोनेरु — पवित्र पुष्करिणी — का राजा है, जिसने पहाड़ियों के बीच अपना वास बनाया है; और वह मुट्ठियाँ भर-भरकर पहाड़ों-जितने वरदान लुटाता है।
कुम्मर दासुडैन कुरुवरति नम्बि इम्मन्न वरमुलॆल्ल इच्चिनवाडु । दॊम्मुलु सेसिन यट्टि तॊण्डमान् चक्कुरवर्ति रम्मन्न चोटिकि वच्चि नम्मिन वाडु ॥ कॊण्डललो नॆलकॊन्न कोनेटि रायडु वाडु कॊण्डलन्त वरमुलु गुप्पॆडु वाडु ॥
kummara dāsuḍaina kuruvarati nambi immanna varamulella iccinavāḍu । dommulu sēsina yaṭṭi toṇḍamān cakkuravarti rammanna cōṭiki vacci nammina vāḍu ॥ koṇḍalalō nelakonna kōnēṭi rāyaḍu vāḍu koṇḍalanta varamulu guppeḍu vāḍu ॥
अपने भक्त कुम्हार कुरुवरति नम्बि को उसने माँगे हुए सारे वरदान दे दिए। और अपने लिए युद्ध लड़नेवाले सम्राट तोंडमान के पुकारने पर वह ठीक उसी स्थान पर आ खड़ा हुआ और उसका विश्वास बना रहा। वही है पहाड़ियों में बसा कोनेरु का स्वामी, जो मुट्ठियों से पर्वतों-जैसे वरदान बाँटता है।
अच्चपु वेडुकतोड ननन्ताल्वारुकि मुच्चिलि वॆट्टिकि मन्नि मोसिनवाडु । मच्चिक दॊलक तिरुनम्बि तोडुत निच्च निच्च माटलाडि नॊच्चिनवाडु ॥
accapu vēḍukatōḍa nanantālvāruki muccili veṭṭiki manni mōsinavāḍu । maccika dolaka tirunambi tōḍuta nicca nicca māṭalāḍi noccinavāḍu ॥
केवल आनंद के लिए उसने अपने भक्त अनंताल्वार के लिए मज़दूर की तरह मिट्टी ढोई। और स्नेह में पिघलकर वह तिरुमल नम्बि से नित्य-प्रतिदिन बातें करता रहा — घर के अपने जन की तरह।
कञ्चिलोन नुण्ड दिरुकच्चिनम्बि मीद करुणिञ्चि तन यॆडकु रप्पिञ्चिन वाडु । यॆञ्चि ऎक्कुडैन वेङ्कटेशुडु मनलकु मञ्चिवाडै करुण बालिञ्चिन वाडु ॥ कॊण्डललो नॆलकॊन्न कोनेटि रायडु वाडु कॊण्डलन्त वरमुलु गुप्पॆडु वाडु ॥
kañcilōna nuṇḍa dirukaccinambi mīda karuṇiñci tana yeḍaku rappiñcina vāḍu । yeñci ekkuḍaina vēṅkaṭēśuḍu manalaku mañcivāḍai karuṇa bāliñcina vāḍu ॥ koṇḍalalō nelakonna kōnēṭi rāyaḍu vāḍu koṇḍalanta varamulu guppeḍu vāḍu ॥
दूर कांची में रहनेवाले तिरुकच्चि नम्बि पर करुणा करके उसने उन्हें अपने पास बुला लिया। विचार करके देखो — सबसे बड़ा वह वेंकटेश हमारे लिए कितना भला निकला — करुणा बरसाता, कृपा से हमें सँभालता। वही है पहाड़ियों में बसा कोनेरु का स्वामी, जो मुट्ठियों से पहाड़ों-जैसे वरदान देता है।