अन्नपूर्णे सदापूर्णे PDF
अन्नपूर्णे सदापूर्णे की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे । ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥
Annapurne sadapurne shankarapranavallabhe Jnanavairagyasiddhyartham bhiksham dehi cha parvati
हे अन्नपूर्णा, सदा पूर्ण रहने वाली, शंकर की प्राणवल्लभा! ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के लिए हे पार्वती, मुझे भिक्षा दीजिए।