ਅਰਦਾਸ — Word-by-Word Meaning
ਅਰਦਾਸ
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Sikh tradition; opening by Guru Gobind Singh Ji (Var Sri Bhagauti Ji)
Author: Guru Gobind Singh Ji and Sikh tradition
Period: 18th century onward
अरदास सिख समुदाय की साझा स्मरण और विनती की प्रार्थना के रूप में विकसित हुई। इसकी आरंभिक स्तुति गुरु गोबिंद सिंह जी की रचना है; इसका मुख्य भाग गुरुओं और सिखों के बलिदानों को स्मरण करता है, और इसका समापन समस्त मानवता को वाहेगुरु के आशीर्वाद के सुपुर्द करता है।
Frequently Asked Questions
अरदास क्या है?▼
अरदास सिख धर्म की औपचारिक प्रार्थना है जो प्रार्थनाओं और समारोहों के अंत में खड़े होकर बोली जाती है, जिसमें गुरुओं को स्मरण किया जाता है और अपनी विनती वाहेगुरु के समक्ष रखी जाती है।
अरदास का आरंभ और अंत कैसे होता है?▼
इसका आरंभ गुरु गोबिंद सिंह जी रचित 'प्रितम भगौती' से होता है और अंत सबके कल्याण की प्रार्थना से होता है — 'नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला।'
अरदास कब की जाती है?▼
लगभग हर सिख प्रार्थना, कीर्तन और समारोह के समापन पर, तथा किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को आरंभ करने से पहले।
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