भगवद्गीता किञ्चिदधीता — Word-by-Word Meaning
भगवद्गीता किञ्चिदधीता
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
भगवद्गीता
Bhagavad-gita
भगवद्गीता
किञ्चित् अधीता
Kinchit adhita
थोड़ा-सा भी अध्ययन किया
गङ्गाजल
Ganga-jala
गंगा का जल
लवकणिका
Lava-kanika
एक नन्हीं बूँद / कणिका
पीता
Pita
पी गई, चखी गई
सकृत् अपि
Sakrit api
एक बार भी
येन
Yena
जिसके द्वारा
मुरारि-समर्चा
Murari-samarcha
मुरारि (विष्णु) की अर्चना
क्रियते
Kriyate
की जाती है
तस्य
Tasya
उसके साथ / उसके लिए
यमेन
Yamena
यम (मृत्यु के स्वामी) के द्वारा
न चर्चा
Na charcha
कोई विवाद / वाद-विवाद नहीं
Complete Translation
जिसने भगवद्गीता का थोड़ा-सा भी अध्ययन किया, गंगाजल की एक बूँद भी पी, और एक बार भी मुरारि (विष्णु) की अर्चना की — उसके साथ यमराज कोई विवाद नहीं करते।
Origin & History
Source: Bhaja Govindam (Moha Mudgara), composed by Adi Shankaracharya
Author: Adi Shankaracharya
Period: 8th century CE (circa 788-820)
परम्परा कहती है कि शंकराचार्य ने काशी में भज गोविन्दम् की रचना तब की जब उन्होंने एक वृद्ध विद्वान को भगवान को खोजने के बजाय संस्कृत व्याकरण रटते देखा। यह स्तोत्र मन को मृत्यु से पूर्व गोविन्द की ओर मुड़ने की प्रेरणा देता है। यह श्लोक अपना कोमल आश्वासन देता है — कि गीता, गंगा और भगवान मुरारि के प्रति थोड़ी-सी भी भक्ति यम की पहुँच से परे ले जाने को पर्याप्त है।
Frequently Asked Questions
यह श्लोक किस स्तोत्र से है?▼
यह भज गोविन्दम् (जिसे मोह मुद्गर भी कहते हैं) के प्रसिद्ध श्लोकों में से एक है, जिसे आदि शंकराचार्य ने मन को भगवान की ओर मोड़ने के आह्वान के रूप में रचा।
'भगवद्गीता किञ्चिदधीता' का अर्थ क्या है?▼
इसका अर्थ है कि जिसने भगवद्गीता का थोड़ा-सा भी अध्ययन किया, गंगाजल की एक बूँद भी पी, और एक बार भी विष्णु की अर्चना की — वह अब मृत्यु के स्वामी यमराज के विवाद के अधीन नहीं रहता।
इस श्लोक का सन्देश क्या है?▼
कि भक्ति के छोटे, सच्चे कर्म भी अपार शक्ति रखते हैं — वे भक्त को मृत्यु के भय से मुक्त करते हैं और मोक्ष की ओर ले जाते हैं। यह सबको, चाहे कितना भी अल्प क्यों न हो, आरम्भ करने को प्रेरित करता है।
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