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बृहस्पति (गुरु) मंत्र — Word-by-Word Meaning

बृहस्पति (गुरु) मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
आदि ध्वनि
बृं बृहस्पतये
Brim Brihaspataye
बृहस्पति (गुरु) का नाम/बीज
नमः
Namah
नमस्कार / मैं नमन करता हूँ

Complete Translation

ॐ। बृहस्पति / गुरु को नमस्कार — इसकी कृपा बढ़ाने तथा अशुभ प्रभाव शांत करने हेतु।

Origin & History

Source: The Vedic Navagraha mantra of Jupiter (Brihaspati / Guru)

Author: Traditional (Vedic Jyotish)

वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रह जीवन के मार्ग को आकार देते हैं, और प्रत्येक का आशीर्वाद तथा उपाय के लिए अपना मंत्र है। "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" बृहस्पति (गुरु) का मंत्र है, जो बुद्धि, ज्ञान, सौभाग्य, धन, संतान, विवाह तथा धर्म के स्वामी हैं। जब ग्रह कुंडली में दुर्बल या अशुभ हो, तब ऋषियों ने इसके मंत्र का जप — दान, इसके दिन (गुरुवार) के व्रत, इसके देव की पूजा तथा इसके रत्न (पीला पुखराज) के साथ — इसकी कृपा बढ़ाने तथा इसकी कठिनाइयाँ शांत करने के लिए विहित किया।

Frequently Asked Questions

बृहस्पति मंत्र क्या है?
यह बृहस्पति (गुरु) ग्रह का वैदिक मंत्र है — "ॐ बृं बृहस्पतये नमः"। इसका जप अपनी जन्मकुंडली में बृहस्पति (गुरु) को बलवान करने तथा ग्रह के दुर्बल या अशुभ होने पर उत्पन्न कठिनाइयों को कम करने के लिए किया जाता है।
बृहस्पति मंत्र के क्या लाभ हैं?
बृहस्पति (गुरु) बुद्धि, ज्ञान, सौभाग्य, धन, संतान, विवाह तथा धर्म के स्वामी हैं। इसके मंत्र का जप एक प्रसिद्ध ज्योतिष उपाय है, जो इन क्षेत्रों को आशीर्वादित करता है, ग्रह की कठिन अवधि (दशा तथा गोचर) को सरल करता है, तथा मन की शांति और रक्षा लाता है।
बृहस्पति मंत्र किस दिन जपना चाहिए?
यह गुरुवार को सबसे प्रभावशाली है। इसे माला पर नित्य 108 बार जपें; पूर्ण उपाय के रूप में परंपरागत रूप से इसे एक निश्चित अवधि में 19,000 जप के रूप में किया जाता है।
बृहस्पति (गुरु) से कौन-सा रत्न संबंधित है?
बृहस्पति (गुरु) का रत्न पीला पुखराज है। इसे (उचित धातु तथा अंगुली में जड़वाकर) किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श के बाद ही धारण किया जाता है, मंत्र तथा ग्रह की वस्तुओं के दान के साथ।
बृहस्पति मंत्र का ज्योतिष उपाय के रूप में प्रयोग कैसे होता है?
जब बृहस्पति (गुरु) दुर्बल, पीड़ित या प्रतिकूल दशा/गोचर में हो, तब मंत्र का जप (नित्य 108 बार, या पूर्ण 19,000 जप) किया जाता है, ग्रह की वस्तुओं के दान, उसके दिन व्रत या पूजा, तथा — ज्योतिषीय मार्गदर्शन के साथ — उसके रत्न के साथ। समग्र ग्रह-संतुलन के लिए इसे नवग्रह मंत्र के साथ जपें।

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