बुध गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning
बुध गायत्री मंत्र
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
ॐ
Om
ॐ — आदिनाद, परब्रह्म
गजध्वजाय
Gajadhwajaya
गजध्वजाय — जिनकी ध्वजा पर गज (हाथी) अंकित है, उनको
विद्महे
Vidmahe
विद्महे — हम जानें / जानने का यत्न करें
शुकहस्ताय
Sukahastaya
शुकहस्ताय — हाथ में शुक (तोता) धारण करने वाले को
धीमहि
Dhimahi
धीमहि — हम ध्यान करते हैं
तन्नः
Tannah
तन्नः — इसलिए, हमारे लिए / वह
बुधः
Budhah
बुधः — बुध, बुधग्रह, बुद्धिमान देव
प्रचोदयात्
Prachodayat
प्रचोदयात् — वे हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें
Complete Translation
ॐ। हम गज-ध्वज वाले को जानें, हाथ में शुक (तोता) धारण करने वाले का ध्यान करें; वे बुध (बुधग्रह) हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।
Origin & History
Source: The Gayatri mantra of Budha (Mercury), among the Navagraha Gayatris
Author: Traditional (Vedic)
प्रत्येक नवग्रह की अपनी गायत्री है — पवित्र गायत्री छंद में वह प्रार्थना जो उस ग्रह से अपने आशीर्वाद प्रदान करने और बुद्धि को प्रकाशित करने की याचना करती है। बुध गायत्री बुध का आवाहन करती है — बुद्धि, वाणी और विद्या के ग्रह, जो ध्वजा पर गज और हाथ में शुक लिए दर्शाए जाते हैं। बुद्धि, वाक्पटुता और वाणिज्य के अधिपति बुध की वन्दना इस मंत्र द्वारा "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" के शाश्वत प्रतिमान में, विशेषकर बुधवार को तथा अध्ययन या व्यापार से पूर्व की जाती है।
Frequently Asked Questions
बुध गायत्री मंत्र क्या है?▼
यह बुध ग्रह की गायत्री है: "ॐ गजध्वजाय विद्महे शुकहस्ताय धीमहि। तन्नो बुधः प्रचोदयात्"। पवित्र गायत्री छंद में रचित यह मंत्र बुध का आवाहन करता है — गज-ध्वज एवं शुकधारी बुद्धिमान — कि वे बुद्धि को तीक्ष्ण और प्रकाशित करें, "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" के प्रतिमान में।
बुध गायत्री मंत्र के क्या लाभ हैं?▼
यह बुद्धि, स्मरणशक्ति, वाक्पटुता और स्पष्ट चिन्तन के लिए तथा विद्या, परीक्षा, लेखन, संवाद और व्यापार में सफलता के लिए जपा जाता है। यह कमजोर या पीड़ित बुध को बल देने में भी सहायक है, जो ज्योतिष में बुद्धि के अधिपति ग्रह हैं।
ज्योतिष में बुध किसके स्वामी हैं?▼
बुध बुद्धि, वाणी, विद्या, तर्क, लेखन, वाणिज्य और स्नायुतन्त्र के स्वामी हैं। बलवान बुध तीक्ष्ण बुद्धि, उत्तम संवाद और व्यापार-कौशल प्रदान करते हैं; इन्हीं गुणों को बल देने तथा पीड़ित बुध के निवारण हेतु यह मंत्र जपा जाता है।
इसे कब और कितनी बार जपना चाहिए?▼
इसे माला पर 108 बार जपें, आदर्श रूप से बुधवार — बुध के दिन — प्रातः तथा अन्य सन्ध्या कालों में। हरे नैवेद्य पारम्परिक हैं। यह विशेषकर अध्ययन या व्यापार से पूर्व सहायक है, और इसे दैनिक नवग्रह या गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
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