चन्द्र अष्टोत्तर शतनामावली — Word-by-Word Meaning
चन्द्र अष्टोत्तर शतनामावली
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
श्रीमते नमः
śrīmate namaḥ
श्रीमान्, यशस्वी एवं मंगलमय को प्रणाम (श्रीमत्)
शशधराय नमः
śaśadharāya namaḥ
खरगोश-चिह्न धारण करने वाले चन्द्रमा को प्रणाम (शशधर)
चन्द्राय नमः
candrāya namaḥ
उज्ज्वल देदीप्यमान चन्द्र को प्रणाम
ताराधीशाय नमः
tārādhīśāya namaḥ
नक्षत्रों के स्वामी को प्रणाम (ताराधीश)
निशाकराय नमः
niśākarāya namaḥ
रात्रि के कर्ता को प्रणाम (निशाकर)
सुधानिधये नमः
sudhānidhaye namaḥ
अमृत के कोश को प्रणाम (सुधानिधि)
सदाराध्याय नमः
sadārādhyāya namaḥ
सदा आराधना योग्य को प्रणाम (सदाराध्य)
सत्पतये नमः
satpataye namaḥ
सज्जनों एवं सत्यवादियों के स्वामी को प्रणाम (सत्पति)
साधुपूजिताय नमः
sādhupūjitāya namaḥ
सज्जनों द्वारा पूजित को प्रणाम (साधुपूजित)
जितेन्द्रियाय नमः
jitendriyāya namaḥ
इन्द्रियों को जीतने वाले को प्रणाम (जितेन्द्रिय)
जगद्योनये नमः
jagadyonaye namaḥ
जगत् के उद्गम/योनि को प्रणाम (जगद्योनि)
ज्योतिश्चक्रप्रवर्तकाय नमः
jyotiścakrapravartakāya namaḥ
ज्योतियों (तारों) के चक्र को गति देने वाले को प्रणाम (ज्योतिश्चक्रप्रवर्तक)
विकर्तनानुजाय नमः
vikartanānujāya namaḥ
सूर्य के छोटे भाई को प्रणाम (विकर्तनानुज)
वीराय नमः
vīrāya namaḥ
वीर को प्रणाम (वीर)
विश्वेशाय नमः
viśveśāya namaḥ
विश्व के स्वामी को प्रणाम (विश्वेश)
विदुषां पतये नमः
viduṣāṃ pataye namaḥ
विद्वानों के स्वामी को प्रणाम (विदुषाम्पति)
Complete Translation
चन्द्र अष्टोत्तर शतनामावली चन्द्र (सोम) — चन्द्रदेव, नक्षत्रों के स्वामी एवं अमृत व मन के शीतल कोश — के १०८ नामों की माला है। नवग्रहों में वे मन व भावनाओं, जीवन की जल-तत्त्व व पोषक शक्तियों तथा रात्रि के शीतल प्रकाश के अधिपति हैं। 'ॐ' व 'नमः' सहित, विशेषतः सोमवार को, इस नामावली का पाठ मनःशान्ति, भावनात्मक सन्तुलन, आरोग्य एवं चन्द्र की शीतल पोषक कृपा प्रदान करता है तथा दुर्बल या पीड़ित चन्द्र के दोषों को शान्त करता है।
Origin & History
Source: Traditional (Navagraha / Puranic tradition)
Author: Traditional
Period: Classical
चन्द्र, जिन्हें सोम भी कहते हैं, चन्द्रदेव हैं, जो (एक कथा अनुसार) क्षीरसागर के मंथन से उत्पन्न हुए और अमरत्व के अमृत के धारक हैं, तथा (दूसरी कथा में) अत्रि ऋषि के पुत्र हैं। नवग्रहों में से एक रूप में वे मन तथा जीवन की जल-तत्त्व, पोषक शक्तियों के स्वामी हैं। उनके इन १०८ नामों की माला का पाठ नवग्रह-पूजा में दुर्बल चन्द्र को बल देने तथा उनकी शीतल, शान्तिदायक कृपा प्राप्त करने हेतु किया जाता है।
Frequently Asked Questions
चन्द्र अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?▼
यह चन्द्र (सोम) — चन्द्रदेव, नवग्रहों में से एक — के १०८ नामों की माला है। प्रत्येक नाम के पूर्व 'ॐ' और पश्चात् 'नमः' कहकर जप किया जाता है, और चन्द्र की शीतल, शान्तिदायक कृपा के आह्वान हेतु विशेषतः सोमवार को इसे अर्चना रूप में अर्पित किया जाता है।
मनःशान्ति के लिए चन्द्र की पूजा क्यों की जाती है?▼
वैदिक परम्परा में चन्द्र मन (मनस्) — मन एवं भावनाओं — के अधिपति हैं तथा अमृत एवं शीतल रात्रि के स्वामी हैं। बलवान, प्रसन्न चन्द्र शान्ति, सन्तोष एवं भावनात्मक संतुलन से सम्बन्धित है, अतः मानसिक शान्ति हेतु उनके १०८ नामों का जप किया जाता है।
जप करते समय क्या अर्पित करना चाहिए?▼
श्वेत चन्द्र का रंग है: श्वेत पुष्प, अखण्डित श्वेत अक्षत, दूध अथवा खीर अर्पित किए जाते हैं — १०८ नामों में से प्रत्येक के लिए एक अर्पण, आदर्शतः श्वेत दीपक सहित।
जप का सर्वोत्तम समय कब है?▼
चन्द्र द्वारा शासित दिन सोमवार तथा पूर्णिमा रात्रि सर्वाधिक शुभ समय हैं, विशेषतः सायंकाल जब चन्द्रमा दृष्टिगोचर हो।
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