दशावतार स्तोत्रम् — Word-by-Word Meaning
दशावतार स्तोत्रम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
भगवान विष्णु के दस अवतारों (दशावतार) — मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध व कल्कि — की स्तुति, जिसमें प्रत्येक अवतार की धर्म-स्थापना की वंदना है।
Origin & History
Source: Vadiraja Tirtha
Author: Vadiraja Tirtha
Period: Medieval
दशावतार स्तोत्रम् पारम्परिक रूप से वादिराज तीर्थ को आरोपित किया जाता है। यह भगवान विष्णु के दस अवतारों — मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि — की स्तुति है। इसमें प्रत्येक अवतार की उस धर्म-स्थापना की वंदना की गई है जो उसने इस संसार में आकर की।
Frequently Asked Questions
दशावतार स्तोत्रम् क्या है?▼
यह भगवान विष्णु के दस अवतारों — मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि — की स्तुति है, जिसमें प्रत्येक अवतार की धर्म-स्थापना की वंदना है।
दशावतार स्तोत्रम् की रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?▼
यह वादिराज तीर्थ को आरोपित है। इसका पाठ प्रातः या संध्या समय श्रद्धापूर्वक किया जाता है, और विशेषतः गुरुवार, एकादशी तथा विष्णु उत्सवों के समय।
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