गणेश गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning
गणेश गायत्री मंत्र
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
ॐ
Om
आदि नाद (मूल ध्वनि)
विद्महे
Vidmahe
हम जानें / जानने की इच्छा करें — एकदन्त (एक दाँत वाले) को
धीमहि
Dhimahi
हम ध्यान करें — वक्रतुण्ड (वक्र सूँड वाले) का
तन्नः … प्रचोदयात्
Tannah … Prachodayat
वे दन्ती प्रभु (गणेश) हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करें
Complete Translation
ॐ। हम Lord Ganesha को जानें, उनका ध्यान करें; वे Lord Ganesha हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।
Origin & History
Source: The Gayatri mantra of Lord Ganesha
Author: Traditional (Vedic)
महान गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परंपरा प्रत्येक महान देवता को उसकी अपनी गायत्री देती है — पावन गायत्री छंद में एक प्रार्थना जो उस देवता से बुद्धि को प्रकाशित करने की याचना करती है। गणेश गायत्री मंत्र बुद्धि, सफलता और विघ्नों के निवारण के दाता भगवान गणेश का आह्वान, "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" के चिरंतन क्रम में करता है — "हम जानें, हम ध्यान करें, प्रभु हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।" संध्या वेलाओं में जपा गया, यह एक पूर्ण और सौम्य नित्य साधना है।
Frequently Asked Questions
गणेश गायत्री मंत्र क्या है?▼
यह भगवान गणेश का गायत्री मंत्र है: "ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्"। पावन गायत्री छंद में रचित, यह गणेश से बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करने की प्रार्थना करता है, "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" के क्रम में।
गणेश गायत्री मंत्र के क्या लाभ हैं?▼
यह बुद्धि, सफलता और विघ्नों के निवारण के लिए तथा मन की स्पष्टता व बुद्धि को जगाने के लिए जपा जाता है। गायत्री मंत्र होने के कारण इसे विशेष रूप से पवित्र करने वाला और स्थिर करने वाला माना जाता है, जो गणेश का आशीर्वाद नित्य जीवन में लाता है।
इसे कब और कितनी बार जपना चाहिए?▼
इसे माला पर 108 बार जपें, आदर्श रूप से प्रातःकाल और अन्य संध्या समयों में, पूर्व दिशा की ओर मुख करके। बुधवार इसका विशेष दिन है। इसे नित्य गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
"विद्महे धीमहि प्रचोदयात्" का क्या अर्थ है?▼
हर गायत्री इसी क्रम का अनुसरण करती है: "विद्महे" — हम जानें; "धीमहि" — हम ध्यान करें; "प्रचोदयात्" — वह देवता हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें। इस प्रकार यह मंत्र देवता से हमारे भीतर बुद्धि जगाने की प्रार्थना है।
क्या गणेश गायत्री मंत्र कोई भी जप सकता है?▼
हाँ — देवता के गायत्री मंत्र भक्ति के साथ कोई भी जप सकता है। इन्हें प्रातःकाल स्नान के बाद, स्वच्छ मन से, आदर्श रूप से बुधवार को जपा जाता है, और ये एक सौम्य, पूर्ण नित्य साधना हैं।
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