गणेश (विघ्नेश्वर) अष्टोत्तर शतनामावली — Word-by-Word Meaning
गणेश (विघ्नेश्वर) अष्टोत्तर शतनामावली
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
विघ्नहर्ता व आरम्भ के स्वामी भगवान गणेश (विघ्नेश्वर) के १०८ नाम, प्रत्येक “ॐ” व “नमः” सहित — सफलता व बुद्धि हेतु प्रत्येक कार्य के आरम्भ में पठित।
Origin & History
Source: Traditional
Author: Traditional
Period: Classical
गणेश (विघ्नेश्वर) अष्टोत्तर शतनामावली गणेश (विघ्नेश्वर) के १०८ नामों की एक परम्परागत माला है। विघ्नहर्ता व आरम्भ के स्वामी भगवान गणेश (विघ्नेश्वर) के १०८ नाम, प्रत्येक “ॐ” व “नमः” सहित — सफलता व बुद्धि हेतु प्रत्येक कार्य के आरम्भ में पठित।
Frequently Asked Questions
गणेश (विघ्नेश्वर) अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?▼
विघ्नहर्ता व आरम्भ के स्वामी भगवान गणेश (विघ्नेश्वर) के १०८ नाम, प्रत्येक “ॐ” व “नमः” सहित — सफलता व बुद्धि हेतु प्रत्येक कार्य के आरम्भ में पठित।
अष्टोत्तर शतनामावली का जप कैसे किया जाता है?▼
इसका जप अर्चना के रूप में होता है: १०८ में से प्रत्येक नाम के पूर्व “ॐ” और पश्चात् “नमः” लगाकर पाठ किया जाता है, और प्रत्येक नाम पर देवता के चरणों में पुष्प या चुटकी भर कुमकुम अर्पित किया जाता है। १०८ नामों की पूर्ण माला एक ही बैठक में अर्पित की जाती है, विशेषकर बुधवार और चतुर्थी को तथा गणेश चतुर्थी और संकष्टी के समय।
“अष्टोत्तर शतनामावली” का अर्थ क्या है?▼
“अष्टोत्तर-शत” का अर्थ है “एक सौ आठ” (१०८) और “नामावली” का अर्थ है “नामों की माला”। अतः यह गणेश (विघ्नेश्वर) के १०८ नामों की पावन सूची है, जिनमें प्रत्येक स्तुति और ध्यान का नाम है।
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