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गरुड़ गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning

गरुड़ गायत्री मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
आदि नाद, परम ब्रह्म
तत्पुरुषाय
Tatpurushaya
उस परम पुरुष के लिए
विद्महे
Vidmahe
हम जानें / हम जानने का यत्न करें
सुवर्णपक्षाय
Suvarnapakshaya
स्वर्ण पंखों वाले (गरुड़) के लिए
धीमहि
Dhimahi
हम ध्यान करते हैं
तन्नः
Tannah
इसलिए, हमारे लिए / वे
गरुडः
Garudah
गरुड़, दिव्य पक्षिराज और विष्णु के वाहन
प्रचोदयात्
Prachodayat
वे हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें

Complete Translation

ॐ। हम उस परम पुरुष को जानें, स्वर्ण पंखों वाले का ध्यान करें; वे गरुड़ देव हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।

Origin & History

Source: The Gayatri mantra of Garuda

Author: Traditional (Vedic)

सार्वभौमिक गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परम्परा प्रत्येक महान् देवता को उसका अपना गायत्री देती है — पवित्र गायत्री छंद में एक प्रार्थना जो उस देवता से बुद्धि को प्रकाशित करने की याचना करती है। गरुड़ गायत्री गरुड़ का आवाहन करती है, जो भगवान विष्णु के वाहन तथा सर्पों और विष के महान् नाशक स्वर्ण-पंख वाले पक्षिराज हैं। उन्हें स्वर्ण पंखों वाले परम पुरुष के रूप में सम्बोधित करते हुए, यह मंत्र कालातीत शैली "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" का अनुसरण करता है और सबसे बढ़कर रक्षा, आरोग्य तथा विष और भय के निवारण के लिए जपा जाता है।

Frequently Asked Questions

गरुड़ गायत्री मंत्र क्या है?
यह गरुड़ का गायत्री मंत्र है: "ॐ तत्पुरुषाय विद्महे सुवर्णपक्षाय धीमहि। तन्नो गरुडः प्रचोदयात्"। पवित्र गायत्री छंद में रचित यह मंत्र गरुड़ — विष्णु के स्वर्ण-पंख वाले दिव्य पक्षिराज और वाहन — का आवाहन करता है कि वे "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" की शैली में रक्षा करें, आरोग्य दें और बुद्धि को प्रकाशित करें।
गरुड़ गायत्री मंत्र के क्या लाभ हैं?
यह रक्षा और आरोग्य के लिए जपा जाता है — विशेषतः विष, सर्पदंश, ज्वर और रोग को दूर करने तथा भय और नकारात्मकता हटाने के लिए। गायत्री मंत्र होने से यह पवित्र करने वाला और स्थिर करने वाला भी है, मन की स्पष्टता जगाता है और गरुड़ की शीघ्र, रक्षक कृपा को आकर्षित करता है।
गरुड़ का सम्बन्ध विष और सर्पों से क्यों है?
विष्णु को धारण करने वाले शक्तिशाली पक्षिराज गरुड़ नागों (सर्पों) के स्वाभाविक शत्रु हैं और शास्त्रों में विष के नाशक रूप में प्रसिद्ध हैं। इसी कारण उनके मंत्र परम्परागत रूप से सर्पदंश, विष और रोगों के विरुद्ध तथा शीघ्र रक्षा के लिए जपे जाते हैं।
इसे कब और कितनी बार जपना चाहिए?
इसे माला पर 108 बार जपें, आदर्शतः प्रातः और अन्य सन्ध्या-कालों में, पूर्व की ओर मुख करके। रक्षा, आरोग्य या सुरक्षित यात्रा माँगते समय इसे कभी भी जपा जा सकता है, और दैनिक गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
क्या गरुड़ गायत्री मंत्र को कोई भी जप सकता है?
हाँ — देव-गायत्री मंत्र कोई भी श्रद्धा सहित जप सकता है। इसे प्रातः स्नान के बाद, स्वच्छ मन से जपा जाता है, और यह आरोग्य व रक्षा के लिए एक सौम्य किन्तु शक्तिशाली दैनिक अभ्यास है।

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