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गायत्री अष्टोत्तर शतनामावली — Word-by-Word Meaning

गायत्री अष्टोत्तर शतनामावली

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

वेदमाता व पवित्र गायत्री मन्त्र की मूर्तिस्वरूपा देवी गायत्री के १०८ नाम, प्रत्येक “ॐ” व “नमः” सहित — ज्ञान जगाने वाली तेजोमयी दिव्य माता।

Origin & History

Source: Traditional

Author: Traditional

Period: Classical

गायत्री अष्टोत्तर शतनामावली गायत्री के १०८ नामों की एक परम्परागत माला है। वेदमाता व पवित्र गायत्री मन्त्र की मूर्तिस्वरूपा देवी गायत्री के १०८ नाम, प्रत्येक “ॐ” व “नमः” सहित — ज्ञान जगाने वाली तेजोमयी दिव्य माता।

Frequently Asked Questions

गायत्री अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
वेदमाता व पवित्र गायत्री मन्त्र की मूर्तिस्वरूपा देवी गायत्री के १०८ नाम, प्रत्येक “ॐ” व “नमः” सहित — ज्ञान जगाने वाली तेजोमयी दिव्य माता।
अष्टोत्तर शतनामावली का जप कैसे किया जाता है?
इसका जप अर्चना के रूप में होता है: १०८ में से प्रत्येक नाम के पूर्व “ॐ” और पश्चात् “नमः” लगाकर पाठ किया जाता है, और प्रत्येक नाम पर देवी के चरणों में पुष्प या चुटकी भर कुमकुम अर्पित किया जाता है। १०८ नामों की पूर्ण माला एक ही बैठक में अर्पित की जाती है, विशेषकर शुक्रवार को तथा नवरात्रि के समय।
“अष्टोत्तर शतनामावली” का अर्थ क्या है?
“अष्टोत्तर-शत” का अर्थ है “एक सौ आठ” (१०८) और “नामावली” का अर्थ है “नामों की माला”। अतः यह गायत्री के १०८ नामों की पावन सूची है, जिनमें प्रत्येक स्तुति और ध्यान का नाम है।

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