गोवर्धनधरं वन्दे — Word-by-Word Meaning
गोवर्धनधरं वन्दे
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Govardhan Puja / Annakut tradition (rooted in the Bhagavata Purana, Canto 10)
Author: Unknown (devotional invocation of the Vaishnava tradition)
Period: Puranic / classical
गोवर्धन का उठाया जाना कृष्ण की व्रज-लीला के सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रसंगों में से एक है, जो श्रीमद्भागवत के दशम स्कन्ध में वर्णित है। इन्द्र के अभिमान को चूर्ण करने और व्रज को पोषित करने वाले पर्वत एवं गौओं के प्रति भक्ति स्थापित करने हेतु बालक कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को एक उँगली पर उठाया और सात दिन की वर्षा में सब लोगों और पशुओं को उसके नीचे आश्रय दिया। इसी की स्मृति में दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है, और भगवान को अन्नकूट अर्पित करते समय यह आवाहन — 'गोवर्धनधरं वन्दे' — गाया जाता है।
Frequently Asked Questions
गोवर्धन पूजा क्या है?▼
'गोवर्धनधरं वन्दे' का क्या अर्थ है?▼
कृष्ण ने गोवर्धन क्यों उठाया?▼
अन्नकूट क्या है?▼
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