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हनुमान गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning

हनुमान गायत्री मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

आञ्जनेयाय
Anjaneyaya
आंजनेय को, अंजना के पुत्र को
विद्महे
Vidmahe
हम जानें / साक्षात्कार करें
वायुपुत्राय
Vayuputraya
वायुदेव के पुत्र को
धीमहि
Dhimahi
हम ध्यान करें
तन्नो हनुमत्
Tanno Hanumat
वे हनुमान, हमारे लिए
प्रचोदयात्
Prachodayat
(हमारी बुद्धि को) प्रेरित व प्रवृत्त करें

Complete Translation

ॐ। हम आंजनेय (अंजना के पुत्र) को जानें, वायुपुत्र हनुमान का ध्यान करें। वे हनुमान हमें (बल, साहस व भक्ति की ओर) प्रेरित करें।

Origin & History

Source: Traditional Gayatri invocation of Lord Hanuman

Author: Traditional

Period: Classical Hindu tradition

जैसे अनेक देवताओं के लिए रचे गए गायत्री मंत्र हैं, वैसे ही हनुमान गायत्री पवित्र गायत्री छंद का अनुसरण करती है — विद्महे (हम जानें), धीमहि (हम ध्यान करें), प्रचोदयात् (वे प्रेरित करें)। यह अंजना और वायु के महाबली पुत्र हनुमान की उपासना को बल, साहस और एकाग्र मन के लिए एक ही दीप्तिमान प्रार्थना में समाहित करती है।

Frequently Asked Questions

हनुमान गायत्री मंत्र क्या है?
यह भगवान हनुमान का गायत्री-शैली का आह्वान है — 'ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि, तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्' — जो अंजना और पवन-पुत्र हनुमान से प्रार्थना करता है कि वे भक्त को बल, साहस, एकाग्रता और भक्ति से प्रेरित करें।
हनुमान गायत्री मंत्र का जप कब करना चाहिए?
मंगलवार और शनिवार हनुमान को समर्पित हैं, और सूर्योदय आदर्श समय है। इसका जप परीक्षा, साक्षात्कार, यात्रा या साहस और स्पष्टता की आवश्यकता वाले किसी भी कार्य से पूर्व भी किया जाता है। नित्य जप, कुछ ही बार सही, मन को स्थिर करता है।
हनुमान गायत्री के क्या लाभ हैं?
यह साहस और निर्भयता प्रदान करता है, बुद्धि और एकाग्रता को तीक्ष्ण करता है, चिन्ता और नकारात्मकता को दूर करता है, और राम के प्रति भक्ति को गहरा करता है। संक्षिप्त होने के कारण यह विशेषकर बच्चों, विद्यार्थियों और आरम्भ करने वालों के लिए उत्तम है।
हनुमान गायत्री का कितनी बार जप करना चाहिए?
परम्परा से माला पर १०८ बार। समय की कमी होने पर सच्ची एकाग्रता के साथ ३, ११ या २१ बार का जप भी लाभकारी है।

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