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हयग्रीव अष्टोत्तर शतनामावली — Word-by-Word Meaning

हयग्रीव अष्टोत्तर शतनामावली

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

भगवान हयग्रीव के १०८ नाम — विष्णु के अश्वमुख अवतार, ज्ञान, विद्या व वेदों के परम देव — प्रत्येक “ॐ” व “नमः” सहित, विद्यार्थी व साधक विद्या, स्मृति व शास्त्र-निपुणता हेतु पाठ करते हैं।

Origin & History

Source: Traditional

Author: Traditional

Period: Classical

हयग्रीव अष्टोत्तर शतनामावली हयग्रीव के १०८ नामों की एक परम्परागत माला है। भगवान हयग्रीव के ये १०८ नाम — विष्णु के अश्वमुख अवतार, ज्ञान, विद्या व वेदों के परम देव — प्रत्येक 'ॐ' व 'नमः' सहित, जिनका विद्यार्थी व साधक विद्या, स्मृति व शास्त्र-निपुणता हेतु पाठ करते हैं।

Frequently Asked Questions

हयग्रीव अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
भगवान हयग्रीव के १०८ नाम — विष्णु के अश्वमुख अवतार, ज्ञान, विद्या व वेदों के परम देव — प्रत्येक 'ॐ' व 'नमः' सहित, जिनका विद्यार्थी व साधक विद्या, स्मृति व शास्त्र-निपुणता हेतु पाठ करते हैं।
अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कैसे किया जाता है?
इसे अर्चना के रूप में किया जाता है: १०८ नामों में से प्रत्येक के पूर्व 'ॐ' व पश्चात् 'नमः' लगाकर पाठ किया जाता है, और प्रत्येक नाम पर एक पुष्प या चुटकी भर कुमकुम अर्पित किया जाता है। पूरी माला एक ही बैठक में अर्पित की जाती है, विशेषकर बुधवार व गुरुवार को और हयग्रीव जयन्ती (श्रावण पूर्णिमा) पर।
'अष्टोत्तर शतनामावली' का क्या अर्थ है?
'अष्टोत्तर-शत' का अर्थ है 'एक सौ आठ' (१०८) और 'नामावली' का अर्थ है 'नामों की माला' — हयग्रीव के १०८ नामों की पवित्र सूची, जिनमें से प्रत्येक स्तुति व ध्यान का नाम है।

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