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ह्रौं बीज मंत्र — Word-by-Word Meaning

ह्रौं बीज मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
सृष्टि की आदि ध्वनि — सार्वभौमिक स्पन्दन, स्वयं शिव का प्रतीक
ह्रौं
Hraum
शिव बीज — महादेव का बीज, शुद्ध चेतना, मंगलमयता और मुक्ति की ध्वनि
Ha
शिव और आकाश तत्त्व का प्रतीक — असीम शुद्ध जागृति
Ra
अग्नि तत्त्व — अज्ञान को भस्म करने वाली पावन शक्ति
Au
सदाशिव और परम की ओर ऊर्ध्वगामी, विस्तारशील गति का प्रतीक
ं (बिन्दु)
Anusvara (Bindu)
नासिक अनुनाद और बिन्दु जो ध्वनि को मौन अनन्त में विलीन कर देते हैं — शुद्ध शिव-चेतना
नमः
Namah
मैं नमन करता हूँ, समर्पित होता हूँ — स्वयं को प्रभु को अर्पित करते हुए
शिवाय
Shivaya
शिव को — कल्याणकारी, परम सत्य और अन्तरात्मा
शिव
Shiva
कल्याणकारी; विलय, ध्यान एवं मुक्ति के परम स्वामी
महादेव
Mahadeva
महादेव — परम देव रूप में शिव
सदाशिव
Sadashiva
सदाशिव — नित्य, सदा-कल्याणमय शिव — निराकार परम तत्त्व
मृत्युञ्जय
Mrityunjaya
मृत्युंजय — मृत्यु को जीतने वाले, उपचार और अमरत्व से सम्बद्ध शिव का स्वरूप
बीज
Beej
बीज — एक अक्षर जो देवता की समस्त शक्ति को धारण करता है
मोक्ष
Moksha
मोक्ष — परम स्वतंत्रता और शिव-चेतना से एकत्व
शान्ति
Shanti
शान्ति — शिव की गहन स्थिरता जो यह बीज प्रदान करता है
जूं
Joom
मृत्युंजय बीज — मृत्यु पर विजय का बीज, उपचार और रक्षा हेतु ह्रौं के साथ आवाहित
सः
Sah
अमृत (अमरत्व) बीज, शिव के मृत्युंजय बीज मंत्र में जूं के साथ युग्मित

Complete Translation

ॐ ह्रौं — मैं कल्याणकारी भगवान शिव के बीज-मंत्र को प्रणाम करता हूँ, जो शुद्ध चेतना एवं मोक्ष की ध्वनि है। ॐ ह्रौं, परम आत्मा एवं मृत्युंजय शिव को नमस्कार।

Origin & History

Source: Tantric and Vedic tradition; Shaiva Agamas and bija-mantra texts

Author: Tantric and Vedic seers (traditional)

Period: Ancient

शैव तंत्रों में ह्रौं शिव का बीज है — कल्याणकारी परम सत्य का ध्वनि-शरीर। 'ह' (शिव, आकाश), 'र' (अग्नि), 'औ' (सदाशिव) और बिन्दु से रचित, यह शिव की शुद्ध जागृति और विलय की शक्ति को एक अक्षर में समेट लेता है। शिव महान योगी हैं और ध्यान एवं मुक्ति के स्वामी हैं, और इसलिए ह्रौं मन को स्थिर करने, अज्ञान को भस्म करने और सदा-कल्याणमय आत्म का साक्षात्कार करने हेतु बीज रूप में प्रिय है।

Frequently Asked Questions

ह्रौं बीज मंत्र का क्या अर्थ है?
ह्रौं (ह्रौं) भगवान शिव का बीज अक्षर है। इसका कोई शब्दकोशीय अर्थ नहीं, किन्तु यह शिव की शुद्ध चेतना, मंगलमयता, ध्यान और मुक्ति की ऊर्जा से युक्त एक सघन ध्वनि है। यह 'ह' (शिव/आकाश), 'र' (अग्नि), 'औ' (सदाशिव) और बिन्दु से बना है, और प्रायः 'ॐ ह्रौं नमः शिवाय' रूप में जपा जाता है।
ह्रौं बीज किस देवता से सम्बन्धित है?
ह्रौं शिव (महादेव / सदाशिव) का बीज मंत्र है, जो कल्याणकारी परम सत्य और अन्तरात्मा हैं। यह उपचार और रक्षा के मंत्रों में मृत्यु को जीतने वाले मृत्युंजय शिव से भी जुड़ा है।
ह्रौं ॐ नमः शिवाय से किस प्रकार भिन्न है?
'ॐ नमः शिवाय' शिव का महान पंचाक्षर (पाँच अक्षरों का) भक्ति मंत्र है। 'ह्रौं' उनका एकाक्षर बीज है — शिव का सघन ध्वनि-सार। दोनों को प्रायः 'ॐ ह्रौं नमः शिवाय' रूप में मिलाया जाता है, जो बीज की शक्ति को भक्तिपूर्ण नमस्कार के साथ जोड़ता है।
ह्रौं मंत्र जपने का सर्वोत्तम समय कौन सा है?
प्रातःकाल का ब्रह्म मुहूर्त और सोमवार (शिव का दिन) आदर्श हैं। प्रदोष काल (त्रयोदशी की सन्ध्या) और विशेषतः महाशिवरात्रि ह्रौं से शिव साधना को गहरा करने के सर्वाधिक शुभ अवसर हैं।

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