कात्यायनी मंत्र — Word-by-Word Meaning
कात्यायनी मंत्र
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
कात्यायनि
Katyayani
हे देवी कात्यायनी (नवदुर्गा का छठा रूप)
महामाये
Mahamaye
हे महान विश्व-शक्ति (माया)
नन्दगोपसुतं पतिं मे कुरु
Nanda-gopa-sutam patim me kuru
नन्द के पुत्र (कृष्ण / योग्य वर) को मेरा पति बनाइए
ते नमः
Te namah
आपको नमस्कार
Complete Translation
ॐ। देवी कात्यायनी को नमस्कार।
हे कात्यायनी, महामाया, महायोगिनियों की अधीश्वरी — हे देवी, नन्दगोप के पुत्र (कृष्ण) को मेरा पति बनाइए; आपको नमस्कार।
Origin & History
Source: The mantra of Goddess Katyayani (the gopis’ prayer, Bhagavata Purana)
Author: Traditional (Puranic)
भागवत पुराण में वृंदावन की युवा गोपियाँ, भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने की लालसा से, मार्गशीर्ष मास भर देवी कात्यायनी की उपासना करती रहीं, प्रातःकाल यमुना में स्नान कर प्रार्थना करतीं: "हे कात्यायनी, महामाया, नन्दगोप के पुत्र को मेरा पति बनाइए।" उनकी प्रार्थना पूर्ण हुई। तभी से कात्यायनी — नवदुर्गा का छठा स्वरूप, महिषासुर की उग्र संहारिणी — वह देवी हैं जिनकी ओर अविवाहित कन्याएँ अच्छे वर और शीघ्र, सुखी विवाह हेतु अभिमुख होती हैं।
Frequently Asked Questions
कात्यायनी मंत्र क्या है?▼
यह देवी कात्यायनी का मंत्र है, जो दुर्गा के नौ स्वरूपों (नवदुर्गा) में छठी हैं। प्रसिद्ध श्लोक "कात्यायनि महामाये... नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः" अच्छे वर की प्रार्थना है — वही प्रार्थना जो गोपियों ने भगवान कृष्ण को पाने हेतु की थी।
कात्यायनी मंत्र के क्या लाभ हैं?▼
इसे मुख्यतः अविवाहित कन्याएँ शीघ्र और सुखी विवाह तथा प्रेमपूर्ण, उपयुक्त वर पाने हेतु जपती हैं। माना जाता है कि यह विवाह में आने वाली बाधाओं और विलंब (विवाह बाधा), मंगल दोष सहित, को दूर करता है और वैवाहिक जीवन को सुख-समृद्धि से आशीर्वादित करता है।
विवाह हेतु कात्यायनी मंत्र का जप कैसे करना चाहिए?▼
इसे माला पर प्रतिदिन 108 बार, आदर्श रूप से प्रातःकाल एक पूरे मास तक जपें, तथा विशेषकर नवरात्रि की नौ रातों में (छठा दिन कात्यायनी का है)। देवी को हल्दी, मधु या लाल पुष्प अर्पित करें और श्रद्धा से जप करें।
कात्यायनी मंत्र जपने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?▼
नवरात्रि — विशेषकर छठा दिन (षष्ठी) — सर्वाधिक शक्तिशाली समय है, साथ ही मार्गशीर्ष मास, जब गोपियों ने कात्यायनी की उपासना की थी, ऐसा कहा जाता है। प्रातःकाल आदर्श समय है।
कात्यायनी कौन थीं?▼
कात्यायनी दुर्गा का एक उग्र, सुंदर स्वरूप हैं, जो ऋषि कात्यायन की पुत्री रूप में जन्मीं और महिषासुर का वध करने वाली हैं। छठी नवदुर्गा के रूप में उनका आह्वान विवाह, साहस तथा धर्मपूर्ण कामनाओं की पूर्ति हेतु किया जाता है।
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