कृष्ण गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning
कृष्ण गायत्री मंत्र
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
ॐ
Om
आदिनाद (परम ध्वनि)
विद्महे
Vidmahe
हम जानें / जानने का प्रयास करें — देवकीनन्दन (देवकी के आनन्द) को
धीमहि
Dhimahi
हम ध्यान करें — वासुदेव (वसुदेव के पुत्र, अन्तर्यामी प्रभु) का
तन्नः … प्रचोदयात्
Tannah … Prachodayat
वे कृष्ण हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करें
Complete Translation
ॐ। हम Lord Krishna को जानें, उनका ध्यान करें; वे Lord Krishna हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।
Origin & History
Source: The Gayatri mantra of Lord Krishna
Author: Traditional (Vedic)
सार्वभौमिक गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परम्परा प्रत्येक महान देवता को उसका अपना गायत्री देती है — पवित्र गायत्री छन्द में एक प्रार्थना जो उस देवता से बुद्धि को प्रकाशित करने का आह्वान करती है। कृष्ण गायत्री मंत्र भगवान कृष्ण का — प्रेम, भक्ति, आनन्द और दिव्य ज्ञान के दाता का — आह्वान करता है, कालातीत शैली "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" में — "हम जानें, हम ध्यान करें, प्रभु हमारे मन को प्रेरित करें।" सन्ध्या के समय जपा जाने वाला यह एक पूर्ण और सौम्य दैनिक साधना है।
Frequently Asked Questions
कृष्ण गायत्री मंत्र क्या है?▼
यह भगवान कृष्ण का गायत्री मंत्र है: "ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्"। पवित्र गायत्री छन्द में रचित, यह "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" की शैली में कृष्ण से बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करने का आह्वान करता है।
कृष्ण गायत्री मंत्र के क्या लाभ हैं?▼
यह प्रेम, भक्ति, आनन्द और दिव्य ज्ञान के लिए तथा मन की स्पष्टता और बुद्धि जाग्रत करने के लिए जपा जाता है। गायत्री मंत्र के रूप में यह विशेष रूप से पवित्र करने वाला और स्थिर करने वाला माना जाता है, जो भगवान कृष्ण के आशीर्वाद को दैनिक जीवन में लाता है।
इसका जप कब और कितनी बार करना चाहिए?▼
इसे माला पर 108 बार जपें, आदर्श रूप से प्रातः और अन्य सन्ध्या समयों में, पूर्व दिशा की ओर मुख करके। बुधवार इसका विशेष दिन है। इसे दैनिक गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
"विद्महे धीमहि प्रचोदयात्" का क्या अर्थ है?▼
हर गायत्री इसी शैली का अनुसरण करती है: "विद्महे" — हम जानें; "धीमहि" — हम ध्यान करें; "प्रचोदयात्" — वह देव हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करें। अतः यह मंत्र देव से हमारे भीतर ज्ञान जाग्रत करने की प्रार्थना है।
क्या कोई भी कृष्ण गायत्री मंत्र का जप कर सकता है?▼
हाँ — देवताओं के गायत्री मंत्र भक्ति के साथ कोई भी जप सकता है। ये प्रातःकाल स्नान के पश्चात्, स्वच्छ मन से, आदर्श रूप से बुधवार को जपे जाते हैं, और एक सौम्य, पूर्ण दैनिक साधना हैं।
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