निर्वाण मञ्जरी — Word-by-Word Meaning
निर्वाण मञ्जरी
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
आदि शंकराचार्य की "मुक्ति की मञ्जरी" — श्लोक-दर-श्लोक आत्मा को देव, मर्त्य व दैत्य से परे, नाम-रूप व तीन अवस्थाओं से परे घोषित करती है: एकमात्र अनंत शिव, चैतन्य स्वरूप।
Origin & History
Source: Ascribed to Adi Shankaracharya
Author: Adi Shankaracharya
Period: Classical
निर्वाण मञ्जरी परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को समर्पित है। आदि शंकराचार्य की एक 'मुक्ति की मञ्जरी' — श्लोक-दर-श्लोक आत्मा को देव, मर्त्य और दैत्य से परे, नाम-रूप एवं तीन अवस्थाओं से परे घोषित करती है: एकमात्र अनंत शिव, चैतन्य स्वरूप।
Frequently Asked Questions
निर्वाण मञ्जरी क्या है?▼
आदि शंकराचार्य की एक 'मुक्ति की मञ्जरी' — श्लोक-दर-श्लोक आत्मा को देव, मर्त्य और दैत्य से परे, नाम-रूप एवं तीन अवस्थाओं से परे घोषित करती है: एकमात्र अनंत शिव, चैतन्य स्वरूप।
इसकी रचना किसने की और इसे कब पढ़ा जाता है?▼
इसका श्रेय आदि शंकराचार्य को दिया जाता है। इसे प्रातः या संध्या समय भक्तिपूर्वक पढ़ा जाता है, विशेषकर सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण के दौरान।
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