ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — Word-by-Word Meaning
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
ॐ
Om
आदिनाद, परम ब्रह्म
नमो
Namo
मैं नमन करता हूँ, प्रणाम / समर्पण करता हूँ
भगवते
Bhagavate
भगवान को — जो समस्त ऐश्वर्य, शक्ति, यश और कृपा से पूर्ण हैं
वासुदेवाय
Vasudevaya
वासुदेव को — भगवान कृष्ण (वसुदेव-पुत्र) और विष्णु, जो सब प्राणियों में (वसु) निवास करते हैं और जिनमें सब निवास करते हैं
Complete Translation
ॐ। हर प्राणी में निवास करने वाले, जिसमें सम्पूर्ण ब्रह्मांड स्थित है, उस सर्वव्यापक परमात्मा — कृष्ण-विष्णु स्वरूप भगवान वासुदेव को मैं शरणागत होकर नमन करता हूँ।
Origin & History
Source: Vaishnava tradition / Bhagavata Purana
Author: Traditional (Vedic/Puranic)
Period: Ancient
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भगवान विष्णु का बारह अक्षरों वाला मूल मंत्र है, जो भागवत पुराण में पिरोया हुआ है। इसी से वन को जाते हुए बालक ध्रुव ने भगवान के दर्शन पाए; इसी से पीढ़ी-दर-पीढ़ी भक्तों ने सबमें निवास करने वाले परमात्मा वासुदेव की शरण ली है। बिना दीक्षा के सबके लिए खुला, यह भक्ति और मुक्ति के सबसे प्रिय मंत्रों में से एक है।
Frequently Asked Questions
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का अर्थ क्या है?▼
इसका अर्थ है 'ॐ, मैं भगवान वासुदेव को शरणागत होकर नमन करता हूँ' — हर प्राणी में निवास करने वाले सर्वव्यापक परमात्मा भगवान कृष्ण-विष्णु को। यह ईश्वर के सबसे घनिष्ठ, सर्व-प्रेममय रूप के प्रति समर्पण की पूर्ण प्रार्थना है।
इसे द्वादशाक्षरी मंत्र क्यों कहा जाता है?▼
'द्वादशाक्षरी' का अर्थ है 'बारह अक्षरों वाला'। ॐ-न-मो-भ-ग-व-ते-वा-सु-दे-वा-य में बारह अक्षर हैं, और यह विष्णु का प्रधान (मूल) मंत्र है, जिसे वैष्णव परंपरा में सबसे शक्तिशाली और शुभ मंत्रों में से एक माना जाता है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय के जप के क्या लाभ हैं?▼
इसे भक्ति और शरणागति, आंतरिक शांति, भय व पाप से रक्षा, और अंततः मोक्ष के लिए जपा जाता है। भागवत में वर्णन है कि किस प्रकार बालक ध्रुव ने इससे विष्णु के दर्शन पाए और प्रह्लाद की इससे रक्षा हुई। इसे कोई भी, बिना औपचारिक दीक्षा के, जप सकता है।
मुझे इसका जप कितनी बार करना चाहिए?▼
इसे प्रतिदिन तुलसी माला पर 108 बार जप के रूप में करें, आदर्श रूप से प्रातःकाल। अनेक भक्त इसे दिनभर निरंतर स्मरण के रूप में रखते हैं। एकादशी, गुरुवार और जन्माष्टमी पर इसका विशेष रूप से जप किया जाता है।
मंत्र में वासुदेव कौन हैं?▼
वासुदेव का अर्थ है 'वसुदेव के पुत्र' (भगवान कृष्ण) और 'वह जिसमें सभी प्राणी निवास करते हैं और जो सबमें निवास करता है' (विष्णु/नारायण) — दोनों। इस प्रकार यह मंत्र परमात्मा को अंतर्यामी, सर्वव्यापक सत्य के रूप में संबोधित करता है, जिसे प्रेमपूर्वक कृष्ण के रूप में पूजा जाता है।
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