राम दूत अतुलित बल धामा — Word-by-Word Meaning
राम दूत अतुलित बल धामा
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
राम
Ram
भगवान श्रीराम
दूत
doot
दूत, संदेशवाहक
अतुलित
atulit
अतुलनीय, अनुपम, जिसकी तुलना न हो
बल
bal
बल, शक्ति
धामा
dhama
धाम, निवास — अर्थात् अतुलनीय बल का धाम
अंजनि-पुत्र
Anjani-putra
अंजना (हनुमान की माता) के पुत्र
पवनसुत
Pavansut
पवनदेव (पवन/वायु) के पुत्र
नामा
nama
नाम से, ये आपके नाम हैं
Complete Translation
आप श्रीराम के दूत और अतुलनीय बल के धाम हैं; आप अंजनी-पुत्र तथा पवनसुत नाम से जाने जाते हैं॥
Origin & History
Source: Hanuman Chalisa (chaupai, verse 2)
Author: Tulsidas
Period: 16th century CE
हनुमान चालीसा में, हनुमानजी को ज्ञान के सागर के रूप में नमन करने के पश्चात्, गोस्वामी तुलसीदास यह दूसरी चौपाई हनुमान के स्वरूप को स्थापित करने में समर्पित करते हैं: वे भगवान श्रीराम के विश्वसनीय दूत और अतुलनीय बल के धाम हैं, माता अंजना और पवनदेव से उत्पन्न। यह पंक्ति सम्पूर्ण रामायण में प्रशंसित उस द्विविध स्वरूप को सार रूप में प्रकट करती है — हनुमान की पूर्ण भक्ति के साथ उनका अद्वितीय बल।
Frequently Asked Questions
'राम दूत अतुलित बल धामा' का क्या अर्थ है?▼
इसका अर्थ है 'राम के दूत, अतुलनीय बल के धाम।' 'दूत' अर्थात् संदेशवाहक, 'अतुलित' अर्थात् अनुपम/अतुलनीय, 'बल' अर्थात् शक्ति, और 'धाम' अर्थात् निवास — इस प्रकार हनुमानजी की राम के दूत और असीम शक्ति के निवास के रूप में स्तुति की गई है।
हनुमानजी को अंजनी-पुत्र और पवनसुत क्यों कहा जाता है?▼
अंजनी-पुत्र का अर्थ है 'अंजना के पुत्र', उनकी माता, और पवनसुत (पवन-सुत) का अर्थ है 'पवनदेव पवन/वायु के पुत्र', उनके दिव्य पिता। दोनों नाम हनुमानजी के सर्वप्रिय नामों में से हैं और उन्हें पुकारने के लिए आवाहित किए जाते हैं।
यह पंक्ति हनुमान चालीसा में कहाँ है?▼
यह हनुमान चालीसा की दूसरी चौपाई है, जो आरम्भिक पद 'जय हनुमान ज्ञान गुन सागर' के पश्चात् आती है। यह हनुमानजी की पहचान राम के दूत और अतुलनीय बल के धाम के रूप में कराती है।
बल के लिए इस पद के जप का क्या लाभ है?▼
क्योंकि यह हनुमानजी को 'अतुलित बल धाम' — अनुपम बल के निवास — के रूप में नमन करता है, भक्त इसे साहस, ओज और कठिन कार्यों का सामना करने की ऊर्जा के लिए जपते हैं, और साथ ही हनुमानजी के समान राम के प्रति विनम्र भाव से समर्पित रहते हैं।
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