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रङ्गनाथ अष्टोत्तर शतनामावली — Word-by-Word Meaning

रङ्गनाथ अष्टोत्तर शतनामावली

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

श्रीरंगम् के भगवान रङ्गनाथ — शेषनाग पर शयन करते विष्णु — के १०८ नाम, प्रत्येक “ॐ” व “नमः” सहित, श्रीवैष्णव परम्परा के परम आराध्य।

Origin & History

Source: Traditional

Author: Traditional

Period: Classical

रङ्गनाथ अष्टोत्तर शतनामावली रङ्गनाथ के १०८ नामों की एक पारम्परिक माला है। श्रीरंगम् के भगवान रङ्गनाथ — शेषनाग पर शयन करते विष्णु — के ये १०८ नाम, प्रत्येक “ॐ” और “नमः” सहित, श्रीवैष्णव परम्परा के परम आराध्य।

Frequently Asked Questions

रङ्गनाथ अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
श्रीरंगम् के भगवान रङ्गनाथ — शेषनाग पर शयन करते विष्णु — के १०८ नाम, प्रत्येक “ॐ” और “नमः” सहित, श्रीवैष्णव परम्परा के परम आराध्य।
अष्टोत्तर शतनामावली का जप कैसे किया जाता है?
इसे अर्चना के रूप में जपा जाता है: १०८ नामों में से प्रत्येक नाम के आगे “ॐ” और पीछे “नमः” लगाकर पाठ किया जाता है, और प्रत्येक नाम पर देवता के चरणों में एक पुष्प या चुटकी भर कुंकुम अर्पित किया जाता है। १०८ नामों की पूरी माला एक ही बैठक में अर्पित की जाती है, विशेषकर गुरुवार और एकादशी को तथा एकादशी और वैकुण्ठ एकादशी में।
“अष्टोत्तर शतनामावली” का अर्थ क्या है?
“अष्टोत्तर-शत” का अर्थ है “एक सौ आठ” (१०८) और “नामावली” का अर्थ है “नामों की माला”। अतः यह रङ्गनाथ के १०८ नामों की पवित्र सूची है, प्रत्येक स्तुति और ध्यान का नाम।

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