ਰਹਰਾਸਿ ਸਾਹਿਬ — Word-by-Word Meaning
ਰਹਰਾਸਿ ਸਾਹਿਬ
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Sri Guru Granth Sahib and Dasam Granth (compilation)
Author: Guru Nanak Dev Ji and successor Gurus; Guru Gobind Singh Ji
Period: 15th–18th century CE
रहरासि साहिब गुरुओं की संध्या वाणियों को — गुरु नानक की “सो दर” से आरम्भ करते हुए — सिखों की सूर्यास्त प्रार्थना में एकत्र करती है। प्रकाश के मंद पड़ते समय पढ़ी जाने वाली यह वाणी हृदय को ईश्वर के प्रति कृतज्ञता में मोड़ती है और रात्रि भर आश्रय एवं शक्ति माँगती है।
Frequently Asked Questions
रहरासि साहिब कब पढ़ी जाती है?▼
रहरासि साहिब संध्या प्रार्थना है, जो प्रतिदिन नितनेम के अंग रूप में सूर्यास्त के समय पढ़ी जाती है।
रहरासि साहिब में क्या-क्या सम्मिलित है?▼
यह गुरु ग्रंथ साहिब से कई गुरुओं की वाणियों का तथा गुरु गोबिंद सिंह जी की वाणियों का संग्रह है, जिसमें बेनती चौपाई और आनंद साहिब के समापन भाग सम्मिलित हैं।
रहरासि साहिब संध्या समय क्यों पढ़ी जाती है?▼
यह दिन के अंत में वाहेगुरु का दिन के लिए धन्यवाद करने और आने वाली रात्रि के लिए कृपा, शांति और रक्षा माँगने हेतु पढ़ी जाती है।
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