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संकट मोचन हनुमानाष्टक Meaning — Line by Line

संकट मोचन हनुमानाष्टक

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of संकट मोचन हनुमानाष्टक with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

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  1. Verse 1. Baalpana Son Hanumant Ati Khelen.
  2. Verse 2. Baalpana Mein Khelat Tahan Dekhe Phalan Ki Baari.
  3. Verse 3. Anjani Putra Balwant Shankar Suvan.
  4. Verse 4. Danav Dalan Rankarm Ati Bhayankara.
  5. Verse 5. Sarnaagat Ki Raksha Sankat Ko Harain.
  6. Verse 6. Jai Jai Jai Hanuman Gosain.
  7. Verse 7. Pavan Putra Balwant Bajrangi.
  8. Verse 8. Jai Jai Jai Hanumant Agadha.
Verse 1#

Baalpana Son Hanumant Ati Khelen.

बालपना सों हनुमंत अति खेलें। दुर्गम काज सवारत सहज में मेलें॥ कीन्हों एक पारन तों सों रबि मग में धायो। जब भागवत बखानत ताहि ग्रसन को धायो॥१॥

Baalpana Son Hanumant Ati Khelen. Durgam Kaaj Savarat Sahaj Mein Melen. Keenho Ek Paaran To Son Rabi Mag Mein Dhayo. Jab Bhagavat Bakhanat Tahi Grasan Ko Dhayo.

Meaningबचपन में ही हनुमान बड़े आनन्द से खेलते थे और दुर्गम कार्यों को सहज में सँवार देते थे — हे कपि! जग में 'संकटमोचन' तुम्हारा नाम कौन नहीं जानता?

Verse 2#

Baalpana Mein Khelat Tahan Dekhe Phalan Ki Baari.

बालपना में खेलत तहँ देखे फलन की बारी। मन में भई उमंग ताहि खावत ग्रसन को धारी॥ पाँव तर दाबत धरनी को धरत गिरि भारी। मारुत नंदन महाबली बल अतुल अति भारी॥२॥

Baalpana Mein Khelat Tahan Dekhe Phalan Ki Baari. Man Mein Bhayi Umang Tahi Khavat Grasan Ko Dhari. Panv Tar Dabat Dharni Ko Dharat Giri Bhari. Marut Nandan Mahabali Bal Atul Ati Bhari.

Meaningबचपन में खेलते हुए उन्होंने फलों की वाटिका देखी; मन में उमंग उठी (और सूर्य को फल समझ ग्रहण कर लिया) — हे कपि! 'संकटमोचन' तुम्हारा नाम कौन नहीं जानता?

Verse 3#

Anjani Putra Balwant Shankar Suvan.

अंजनि पुत्र बलवंत शंकर सुवन। केसरी नंदन रामदूत प्रिय भगवन॥ लंक विदेश को सुन करत बजरंग। हे प्रभु बीर हनूमान स्वामी चरन मंग॥३॥

Anjani Putra Balwant Shankar Suvan. Kesari Nandan Ramdoot Priya Bhagwan. Lank Videsh Ko Sun Karat Bajrang. He Prabhu Beer Hanuman Swami Charan Mang.

Meaningअंजनिपुत्र, बलवान, शंकर के अवतार; केसरीनन्दन, रामदूत के प्रिय — हे कपि! 'संकटमोचन' तुम्हारा नाम कौन नहीं जानता?

Verse 4#

Danav Dalan Rankarm Ati Bhayankara.

दानवदलन रणकर्म अति भयंकर। जिनके भय से काँपत सदा रजनीचर॥ नित्य बिराजत सिय राम के दरबार में। कीरति बिमल विराजत त्रिभुवन संसार में॥४॥

Danav Dalan Rankarm Ati Bhayankara. Jinke Bhay Se Kanpat Sada Rajnichar. Nitya Birajat Siya Ram Ke Darbar Mein. Keerti Bimal Birajat Tribhuvan Sansar Mein.

Meaningदानवों का दलन करने वाले, रणकर्म में अति भयंकर; जिनके भय से निशाचर सदा काँपते हैं — हे कपि! 'संकटमोचन' तुम्हारा नाम कौन नहीं जानता?

Verse 5#

Sarnaagat Ki Raksha Sankat Ko Harain.

सरनागत की रक्षा संकट को हरैं। जो सुमिरत हिय हरषत मोद मंगल भरैं॥ ऐसे प्रभु हनुमान सदा जन के हितकारी। मोरे दोष बिचारि केहि नाथ टारी॥५॥

Sarnaagat Ki Raksha Sankat Ko Harain. Jo Sumirat Hiy Harshat Mod Mangal Bharain. Aise Prabhu Hanuman Sada Jan Ke Hitkari. More Dosh Bichari Kehi Nath Na Tari.

Meaningशरणागत की रक्षा कर संकट हरने वाले; जिनका स्मरण करते ही हृदय हर्ष और आनन्द से भर जाता है — हे कपि! 'संकटमोचन' तुम्हारा नाम कौन नहीं जानता?

Verse 6#

Jai Jai Jai Hanuman Gosain.

जय जय जय हनुमान गोसाईं। तुम बिन और कोऊ सहाई॥ राम दूत अतुलित बल धामा। बड़े भाग मोहि मिले श्रीरामा॥६॥

Jai Jai Jai Hanuman Gosain. Tum Bin Aur Na Kou Sahai. Ram Doot Atulit Bal Dhama. Bade Bhag Mohi Mile Shrirama.

Meaningजय जय जय हनुमान गोसाईं! तुम्हारे बिना और कोई सहायक नहीं; हे रामदूत — हे कपि! 'संकटमोचन' तुम्हारा नाम कौन नहीं जानता?

Verse 7#

Pavan Putra Balwant Bajrangi.

पवन पुत्र बलवंत बजरंगी। महाबीर कुमति निवार सुमति के संगी॥ संकट मोचन हनुमान बिरद तुम्हारो। संकट से मोहि आन उबारो॥७॥

Pavan Putra Balwant Bajrangi. Mahabir Kumati Nivar Sumati Ke Sangi. Sankat Mochan Hanuman Birad Tumharo. Sankat Se Mohi Aan Ubaro.

Meaningपवनपुत्र, बलवान बजरंगी; महावीर, कुमति को दूर कर सुमति देने वाले — हे कपि! 'संकटमोचन' तुम्हारा नाम कौन नहीं जानता?

Verse 8#

Jai Jai Jai Hanumant Agadha.

जय जय जय हनुमंत अगाधा। करहु कृपा गुरुदेव समाना॥ जो सत बार पाठ कर कोई। संकट मिटे सदा सुख होई॥८॥

Jai Jai Jai Hanumant Agadha. Karahu Kripa Gurudev Samana. Jo Sat Bar Path Kar Koi. Sankat Mite Sada Sukh Hoi.

Meaningजय जय जय अगाध हनुमन्त! गुरुदेव-समान कृपा करो — हे कपि! 'संकटमोचन' तुम्हारा नाम कौन नहीं जानता?

Word-by-Word Breakdown

बालपना
Baalpana
बचपन
दुर्गम काज
Durgam Kaaj
दुर्गम (कठिन) कार्य
सवारत
Savarat
सँवारते, पूर्ण करते हैं
रबि
Rabi
सूर्य
ग्रसन
Grasan
निगलना, ग्रसना
फलन की बारी
Phalan Ki Baari
फलों की वाटिका
उमंग
Umang
उमंग, उत्साह
धरनी
Dharni
पृथ्वी
गिरि
Giri
पर्वत
मारुत नंदन
Marut Nandan
पवनदेव के पुत्र (मारुति)
अतुल
Atul
अतुल, अपरिमित
अंजनि पुत्र
Anjani Putra
अंजनी के पुत्र
शंकर सुवन
Shankar Suvan
शिव के अवतार
केसरी नंदन
Kesari Nandan
केसरी के पुत्र
रामदूत
Ramdoot
श्रीराम के दूत
बजरंग
Bajrang
वज्र के समान देह वाले
दानवदलन
Danav Dalan
दानवों का दलन करने वाले
रणकर्म
Rankarm
रणकर्म, युद्ध-कर्म
रजनीचर
Rajnichar
निशाचर (राक्षस)
दरबार
Darbar
दरबार, राजसभा
कीरति बिमल
Keerti Bimal
निर्मल कीर्ति/यश
त्रिभुवन
Tribhuvan
तीनों लोक
सरनागत
Sarnaagat
शरणागत (शरण में आने वाला)
संकट मोचन
Sankat Mochan
संकटों से उद्धार करने वाले
बिरद
Birad
विरुद, यश, उपाधि
उबारो
Ubaro
उबारना, बचाना
अगाधा
Agadha
अगाध, अथाह, गंभीर
कृपा
Kripa
कृपा, दया
गुरुदेव
Gurudev
गुरुदेव, दिव्य गुरु
सुख
Sukh
सुख, आनन्द

Origin & History

Source: Composed by Tulsidas, associated with Sankat Mochan Temple, Varanasi

Author: Goswami Tulsidas

Period: 16th century CE

तुलसीदास ने इस अष्टक की रचना वाराणसी में की, जहाँ उन्हें भगवान हनुमान के प्रत्यक्ष दर्शन हुए माने जाते हैं। उन्होंने उसी स्थान पर प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान मंदिर की स्थापना की, जहाँ उन्हें यह दिव्य अनुभूति हुई। यह स्तोत्र हनुमान के संकटों के परम निवारक रूप को प्रकट करता है और इस पवित्र मंदिर की मूल प्रार्थना बन गया।

Frequently Asked Questions

संकट मोचन हनुमानाष्टक क्या है?
संकट मोचन हनुमानाष्टक भगवान हनुमान को समर्पित आठ चौपाइयों का स्तोत्र है, जो उन्हें 'संकटों से उद्धार करने वाला' (संकट मोचन) कहकर स्तुति करता है। इसमें हनुमान की बाललीला, अपार बल, राम के प्रति भक्ति तथा शरणागत भक्तों की रक्षा के उनके वचन का वर्णन है।
संकट मोचन हनुमानाष्टक की रचना किसने की?
संकट मोचन हनुमानाष्टक गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित माना जाता है, जिन्होंने हनुमान चालीसा और रामचरितमानस की भी रचना की। यह वाराणसी के संकट मोचन हनुमान मंदिर से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है, जिसकी स्थापना तुलसीदास ने की मानी जाती है।
संकट मोचन हनुमानाष्टक कितनी बार पढ़ना चाहिए?
उत्तम फल हेतु इसे प्रतिदिन 8 बार पढ़ें, क्योंकि इसमें 8 चौपाइयाँ हैं (अष्टक अर्थात आठ)। अत्यावश्यक आवश्यकता पर इसे 108 बार पढ़ें। सम्पूर्ण अनुष्ठान हेतु इसे निरंतर 40 दिन तक प्रतिदिन बिना नागा पढ़ें।
इस प्रार्थना का पाठ करने का सर्वोत्तम समय क्या है?
सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) अथवा संध्या के समय है। मंगलवार और शनिवार विशेष रूप से शुभ हैं। फिर भी संकट या विपत्ति के समय इसे किसी भी समय सच्ची भक्ति से पढ़ा जा सकता है।
क्या इस स्तोत्र का पाठ स्वास्थ्य समस्याओं के लिए किया जा सकता है?
हाँ, संकट मोचन हनुमानाष्टक का पाठ स्वास्थ्य संबंधी कष्टों से राहत हेतु व्यापक रूप से किया जाता है, क्योंकि हनुमान को रोगहर्ता और सभी पीड़ाओं को दूर करने वाला माना जाता है। अनेक भक्त नियमित भक्तिपूर्ण पाठ के बाद स्वास्थ्य में सुधार की अनुभूति बताते हैं।

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