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सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रम् — Complete Lyrics

सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रम्

Sanskrit text with English transliteration and translation

Verse 1
ध्यानम् श्रीमच्चन्दनचर्चितोज्ज्वलवपुः शुक्लाम्बरा मल्लिका- मालालालित कुन्तला प्रविलसन्मुक्तावलीशोभना सर्वज्ञाननिधानपुस्तकधरा रुद्राक्षमालाङ्किता वाग्देवी वदनाम्बुजे वसतु मे त्रैलोक्यमाता शुभा श्री नारद उवाच भगवन्परमेशान सर्वलोकैकनायक कथं सरस्वती साक्षात्प्रसन्ना परमेष्ठिनः 2 कथं देव्या महावाण्यास्सतत्प्राप सुदुर्लभम् एतन्मे वद तत्त्वेन महायोगीश्वर प्रभो 3 श्री सनत्कुमार उवाच साधु पृष्टं त्वया ब्रह्मन् गुह्याद्गुह्यमनुत्तमम् मयानुगोपितं यत्नादिदानीं सत्प्रकाश्यते 4 पुरा पितामहं दृष्ट्वा जगत्स्थावरजङ्गमम् निर्विकारं निराभासं स्तम्भीभूतमचेतसम् 5 सृष्ट्वा त्रैलोक्यमखिलं वागभावात्तथाविधम् आधिक्याभावतः स्वस्य परमेष्ठी जगद्गुरुः 6 दिव्यवर्षायुतं तेन तपो दुष्करमुत्तमम् ततः कदाचित्सञ्जाता वाणी सर्वार्थशोभिता 7 अहमस्मि महाविद्या सर्ववाचामधीश्वरी मम नाम्नां सहस्रं तु उपदेक्ष्याम्यनुत्तमम् 8
Dhyanam | Shrimachchandanacharchitojjvalavapuh shuklambara mallika- Malalalita kuntala pravilasanmuktavalishobhana | Sarvajnananidhanapustakadhara rudrakshamalankita Vagdevi vadanambuje vasatu me trailokyamata shubha || Shri narada uvacha – Bhagavanparameshana sarvalokaikanayaka | Katham sarasvati sakshatprasanna parameshthinah || 2 || Katham devya mahavanyassatatprapa sudurlabham | Etanme vada tattvena mahayogishvara prabho || 3 || Shri sanatkumara uvacha – Sadhu prishtam tvaya brahman guhyadguhyamanuttamam | Mayanugopitam yatnadidanim satprakashyate || 4 || Pura pitamaham drishtva jagatsthavarajangamam | Nirvikaram nirabhasam stambhibhutamachetasam || 5 || Srishtva trailokyamakhilam vagabhavattathavidham | Adhikyabhavatah svasya parameshthi jagadguruh || 6 || Divyavarshayutam tena tapo dushkaramuttamam | Tatah kadachitsanjata vani sarvarthashobhita || 7 || Ahamasmi mahavidya sarvavachamadhishvari | Mama namnam sahasram tu upadekshyamyanuttamam || 8 ||
स्तोत्र का आरम्भ ध्यान से होता है: चन्दन से चर्चित उज्ज्वल शरीर वाली, श्वेत वस्त्रधारिणी, मल्लिका-मालाओं से सुशोभित केशों वाली, मोतियों की लड़ियों से दमकती, समस्त ज्ञान की निधि — पुस्तक — धारण करने वाली, रुद्राक्षमाला से अङ्कित वे शुभ वाग्देवी, त्रैलोक्य-माता, मेरे मुख-कमल में निवास करें। फिर नारद सनत्कुमार से पूछते हैं कि सरस्वती ब्रह्मा (परमेष्ठी) पर साक्षात् कैसे प्रसन्न हुईं और उन्हें वह परम दुर्लभ कृपा कैसे मिली। सनत्कुमार कहते हैं — यह गुह्य से भी गुह्य रहस्य अब प्रकट करता हूँ: पूर्वकाल में ब्रह्मा ने त्रैलोक्य की सृष्टि करके देखा कि वाणी के अभाव में सारा स्थावर-जङ्गम जगत जड़, निष्प्रभ और अचेतन खड़ा है। अपनी न्यूनता अनुभव कर जगद्गुरु परमेष्ठी ने दस हजार दिव्य वर्षों तक अति दुष्कर तप किया; तब सर्वार्थों से शोभित वाणी प्रकट हुईं और बोलीं — 'मैं महाविद्या हूँ, समस्त वाणियों की अधीश्वरी; मैं तुम्हें अपने अनुत्तम सहस्र नामों का उपदेश करूँगी।'
Verse 2
अनेन संस्तुता नित्यं पत्नी तव भवाम्यहम् त्वया सृष्टं जगत्सर्वं वाणीयुक्तं भविष्यति 9 इदं रहस्यं परमं मम नामसहस्रकम् सर्वपापौघशमनं महासारस्वतप्रदम् 10 महाकवित्वदं लोके वागीशत्वप्रदायकम् त्वं वा परः पुमान्यस्तु स्तवेनाऽनेन तोषयेत् 11 तस्याहं किङ्करी साक्षाद्भविष्यामि संशयः इत्युक्त्वान्तर्दधे वाणी तदारभ्य पितामहः 12 स्तुत्वा स्तोत्रेण दिव्येन तत्पतित्वमवाप्तवान् वाणीयुक्तं जगत्सर्वं तदारभ्याऽभवन्मुने 13 तत्तेहं सम्प्रवक्ष्यामि शृणु यत्नेन नारद सावधानमना भूत्वा क्षणं शुद्धो मुनीश्वरः 14
Anena samstuta nityam patni tava bhavamyaham | Tvaya srishtam jagatsarvam vaniyuktam bhavishyati || 9 || Idam rahasyam paramam mama namasahasrakam | Sarvapapaughashamanam mahasarasvatapradam || 10 || Mahakavitvadam loke vagishatvapradayakam | Tvam va parah pumanyastu stavenanena toshayet || 11 || Tasyaham kinkari sakshadbhavishyami na samshayah | Ityuktvantardadhe vani tadarabhya pitamahah || 12 || Stutva stotrena divyena tatpatitvamavaptavan | Vaniyuktam jagatsarvam tadarabhyabhavanmune || 13 || Tatteham sampravakshyami shrinu yatnena narada | Savadhanamana bhutva kshanam shuddho munishvarah || 14 ||
देवी अपना वचन पूर्ण करती हैं: 'इस स्तोत्र से नित्य संस्तुत होकर मैं तुम्हारी पत्नी बनूँगी, और तुम्हारा रचा सारा जगत वाणी से युक्त हो जाएगा। यह परम रहस्य — मेरा नाम-सहस्र — समस्त पापों की राशियों का शमन करने वाला और महासारस्वत (वाणी की महासिद्धि) देने वाला है; यह लोक में महाकवित्व और वाणी का ईश्वरत्व देता है। तुम हो या कोई अन्य पुरुष — जो इस स्तव से मुझे सन्तुष्ट करेगा, मैं साक्षात् उसकी किङ्करी बन जाऊँगी, इसमें संशय नहीं।' यह कहकर वाणी अन्तर्धान हो गईं। तब से ब्रह्मा ने इस दिव्य स्तोत्र से स्तुति कर उन्हें पत्नी रूप में पाया, और तभी से सारा जगत वाणी से युक्त हुआ। सनत्कुमार कहते हैं — 'वही स्तोत्र मैं तुम्हें कहता हूँ; हे नारद, क्षण भर शुद्ध और सावधान मन होकर यत्नपूर्वक सुनो।'
Verse 3
[ ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] वाग्वाणी वरदा वन्द्या वरारोहा वरप्रदा वृत्तिर्वागीश्वरी वार्ता वरा वागीशवल्लभा 1 विश्वेश्वरी विश्ववन्द्या विश्वेशप्रियकारिणी वाग्वादिनी वाग्देवी वृद्धिदा वृद्धिकारिणी 2 वृद्धिर्वृद्धा विषघ्नी वृष्टिर्वृष्टिप्रदायिनी विश्वाराध्या विश्वमाता विश्वधात्री विनायका 3 विश्वशक्तिर्विश्वसारा विश्वा विश्वविभावरी वेदान्तवेदिनी वेद्या वित्ता वेदत्रयात्मिका 4 वेदज्ञा वेदजननी विश्वा विश्वविभावरी वरेण्या वाङ्मयी वृद्धा विशिष्टप्रियकारिणी 5 विश्वतोवदना व्याप्ता व्यापिनी व्यापकात्मिका व्यालघ्नी व्यालभूषाङ्गी विरजा वेदनायिका 6 वेदवेदान्तसंवेद्या वेदान्तज्ञानरूपिणी विभावरी विक्रान्ता विश्वामित्रा विधिप्रिया 7 वरिष्ठा विप्रकृष्टा विप्रवर्यप्रपूजिता वेदरूपा वेदमयी वेदमूर्तिश्च वल्लभा 8 [ ह्रीं गुरुरूपे मां गृह्ण गृह्ण ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] गौरी गुणवती गोप्या गन्धर्वनगरप्रिया गुणमाता गुणान्तस्था गुरुरूपा गुरुप्रिया 9 [ गुहान्तस्था ] गुरुविद्या गानतुष्टा गायकप्रियकारिणी [ गिरिविद्या ] गायत्री गिरीशाराध्या गीर्गिरीशप्रियङ्करी 10
[ Aim vada vada vagvadini svaha ] Vagvani varada vandya vararoha varaprada | Vrittirvagishvari varta vara vagishavallabha || 1 || Vishveshvari vishvavandya vishveshapriyakarini | Vagvadini cha vagdevi vriddhida vriddhikarini || 2 || Vriddhirvriddha vishaghni cha vrishtirvrishtipradayini | Vishvaradhya vishvamata vishvadhatri vinayaka || 3 || Vishvashaktirvishvasara vishva vishvavibhavari | Vedantavedini vedya vitta vedatrayatmika || 4 || Vedajna vedajanani vishva vishvavibhavari | Varenya vanmayi vriddha vishishtapriyakarini || 5 || Vishvatovadana vyapta vyapini vyapakatmika | Vyalaghni vyalabhushangi viraja vedanayika || 6 || Vedavedantasamvedya vedantajnanarupini | Vibhavari cha vikranta vishvamitra vidhipriya || 7 || Varishtha viprakrishta cha vipravaryaprapujita | Vedarupa vedamayi vedamurtishcha vallabha || 8 || [ Om hrim gururupe mam grihna grihna aim vada vada vagvadini svaha ] Gauri gunavati gopya gandharvanagarapriya | Gunamata gunantastha gururupa gurupriya || 9 || [ guhantastha ] Guruvidya ganatushta gayakapriyakarini | [ girividya ] Gayatri girisharadhya girgirishapriyankari || 10 ||
'ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा' बीज-मन्त्र से सहस्रनाम आरम्भ होता है, पहले व-कार के नामों से: वे वाक् और वाणी हैं — स्वयं वाणी; वरदा, वन्द्या, वरारोहा, वरप्रदा; वाणी की ईश्वरी वागीश्वरी और वाणी के ईश की वल्लभा; विश्वेश्वरी, विश्ववन्द्या, विश्व की माता, धात्री और शक्ति, विश्व का सार और उसकी विभावरी। वे वेदान्त को जानने वाली और जानने योग्य हैं; तीनों वेदों की आत्मा, वेदज्ञा और वेदों की जननी; सब ओर मुख वाली, व्याप्त और व्यापिका; सर्पों-विष का नाश करने वाली, फिर भी सर्पभूषण धारण करने वाली; विरजा, वेदों की नायिका, वेद की मूर्ति और वेदमयी। फिर गुरु-बीज के साथ ग-नाम आरम्भ होते हैं: गौरी, गुणवती, गोप्या, गन्धर्वनगर-प्रिया; गुणों की माता और गुणों के भीतर स्थित; गुरु-रूपा, गुरु-प्रिया, गुरु-विद्या; गान से सन्तुष्ट, गायकों का प्रिय करने वाली — गायत्री, गिरीश से आराधित और गिरीश का प्रिय करने वाली।
Verse 4
गिरिज्ञा ज्ञानविद्या गिरिरूपा गिरीश्वरी गीर्माता गणसंस्तुत्या गणनीयगुणान्विता 11 गूढरूपा गुहा गोप्या गोरूपा गौर्गुणात्मिका गुर्वी गुर्वम्बिका गुह्या गेयजा गृहनाशिनी 12 गृहिणी गृहदोषघ्नी गवघ्नी गुरुवत्सला गृहात्मिका गृहाराध्या गृहबाधाविनाशिनी 13 गङ्गा गिरिसुता गम्या गजयाना गुहस्तुता गरुडासनसंसेव्या गोमती गुणशालिनी 14 [ ऐं नमः शारदे श्रीं शुद्धे नमः शारदे वं ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] शारदा शाश्वती शैवी शाङ्करी शङ्करात्मिका श्रीश्शर्वाणी शतघ्नी शरच्चन्द्रनिभानना 15 शर्मिष्ठा शमनघ्नी शतसाहस्ररूपिणी शिवा शम्भुप्रिया श्रद्धा श्रुतिरूपा श्रुतिप्रिया 16 शुचिष्मती शर्मकरी शुद्धिदा शुद्धिरूपिणी शिवा शिवङ्करी शुद्धा शिवाराध्या शिवात्मिका 17 श्रीमती श्रीमयी श्राव्या श्रुतिः श्रवणगोचरा शान्तिश्शान्तिकरी शान्ता शान्ताचारप्रियङ्करी 18 शीललभ्या शीलवती श्रीमाता शुभकारिणी शुभवाणी शुद्धविद्या शुद्धचित्तप्रपूजिता 19 श्रीकरी श्रुतपापघ्नी शुभाक्षी शुचिवल्लभा शिवेतरघ्नी शबरी श्रवणीयगुणान्विता 20 [शर्वरी]
Girijna jnanavidya cha girirupa girishvari | Girmata ganasamstutya gananiyagunanvita || 11 || Gudharupa guha gopya gorupa gaurgunatmika | Gurvi gurvambika guhya geyaja grihanashini || 12 || Grihini grihadoshaghni gavaghni guruvatsala | Grihatmika griharadhya grihabadhavinashini || 13 || Ganga girisuta gamya gajayana guhastuta | Garudasanasamsevya gomati gunashalini || 14 || [ Om aim namah sharade shrim shuddhe namah sharade vam aim vada vada vagvadini svaha ] Sharada shashvati shaivi shankari shankaratmika | Shrishsharvani shataghni cha sharachchandranibhanana || 15 || Sharmishtha shamanaghni cha shatasahasrarupini | Shiva shambhupriya shraddha shrutirupa shrutipriya || 16 || Shuchishmati sharmakari shuddhida shuddhirupini | Shiva shivankari shuddha shivaradhya shivatmika || 17 || Shrimati shrimayi shravya shrutih shravanagochara | Shantishshantikari shanta shantacharapriyankari || 18 || Shilalabhya shilavati shrimata shubhakarini | Shubhavani shuddhavidya shuddhachittaprapujita || 19 || Shrikari shrutapapaghni shubhakshi shuchivallabha | Shivetaraghni shabari shravaniyagunanvita || 20 || [sharvari]
ग-नाम आगे चलते हैं: वाणी को जानने वाली, ज्ञानविद्या, गिरि-रूपा और गिरीश्वरी; वाणी की माता, गणों से संस्तुत्य; गूढ़रूपा, गुहा, गोप्या; गृह के दोषों और बाधाओं का नाश करने वाली, गृहिणी और गृह में आराध्या; वे गङ्गा हैं, गिरिसुता, गज पर चलने वाली, गुह (कार्तिकेय) से स्तुत, गरुडासन (विष्णु) से संसेव्या — गोमती, गुणशालिनी। फिर शारदा-बीज के साथ श-नाम: शारदा, शाश्वती, शैवी, शाङ्करी, शङ्कर की आत्मा; श्री, शर्वाणी, शरद के चन्द्र-सा मुख; शमन (यम) की शक्ति हरने वाली, शत-सहस्र रूपों वाली; शिवा, शम्भुप्रिया, श्रद्धा, श्रुति-रूपा और श्रुति-प्रिया; शुचिष्मती, कल्याणकारिणी, शुद्धि देने वाली और शुद्धि-रूपिणी; शिव करने वाली, शुद्धा, शिव से आराध्या; श्रीमती, श्रवण करने योग्य, स्वयं श्रुति; शान्ति और शान्ति करने वाली, शान्त आचार का प्रिय करने वाली; शील से प्राप्य, शीलवती, श्री-माता, शुभकारिणी; शुभ वाणी वाली, शुद्ध विद्या, शुद्ध चित्त वालों से पूजित; श्रीकरी, सुने हुए पापों को नष्ट करने वाली, शुभ नेत्रों वाली, अशुभ का नाश करने वाली।
Verse 5
शारी शिरीषपुष्पाभा शमनिष्ठा शमात्मिका शमान्विता शमाराध्या शितिकण्ठप्रपूजिता 21 शुद्धिः शुद्धिकरी श्रेष्ठा श्रुतानन्ता शुभावहा सरस्वती सर्वज्ञा सर्वसिद्धिप्रदायिनी 22 [ ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] सरस्वती सावित्री सन्ध्या सर्वेप्सितप्रदा सर्वार्तिघ्नी सर्वमयी सर्वविद्याप्रदायिनी 23 सर्वेश्वरी सर्वपुण्या सर्गस्थित्यन्तकारिणी सर्वाराध्या सर्वमाता सर्वदेवनिषेविता 24 सर्वैश्वर्यप्रदा सत्या सती सत्वगुणाश्रया सर्वक्रमपदाकारा सर्वदोषनिषूदिनी 25 [ स्वरक्रमपदाकारा ] सहस्राक्षी सहस्रास्या सहस्रपदसंयुता सहस्रहस्ता साहस्रगुणालङ्कृतविग्रहा 26 सहस्रशीर्षा सद्रूपा स्वधा स्वाहा सुधामयी षड्ग्रन्थिभेदिनी सेव्या सर्वलोकैकपूजिता 27 स्तुत्या स्तुतिमयी साध्या सवितृप्रियकारिणी संशयच्छेदिनी साङ्ख्यवेद्या सङ्ख्या सदीश्वरी 28 सिद्धिदा सिद्धसम्पूज्या सर्वसिद्धिप्रदायिनी सर्वज्ञा सर्वशक्तिश्च सर्वसम्पत्प्रदायिनी 29 सर्वाऽशुभघ्नी सुखदा सुखसंवित्स्वरूपिणी सर्वसम्भाषणी सर्वजगत्सम्मोहिनी तथा 30 [ सर्वसम्भीषणी ]
Shari shirishapushpabha shamanishtha shamatmika | Shamanvita shamaradhya shitikanthaprapujita || 21 || Shuddhih shuddhikari shreshtha shrutananta shubhavaha | Sarasvati cha sarvajna sarvasiddhipradayini || 22 || [ Om aim vada vada vagvadini svaha ] Sarasvati cha savitri sandhya sarvepsitaprada | Sarvartighni sarvamayi sarvavidyapradayini || 23 || Sarveshvari sarvapunya sargasthityantakarini | Sarvaradhya sarvamata sarvadevanishevita || 24 || Sarvaishvaryaprada satya sati satvagunashraya | Sarvakramapadakara sarvadoshanishudini || 25 || [ svarakramapadakara ] Sahasrakshi sahasrasya sahasrapadasamyuta | Sahasrahasta sahasragunalankritavigraha || 26 || Sahasrashirsha sadrupa svadha svaha sudhamayi | Shadgranthibhedini sevya sarvalokaikapujita || 27 || Stutya stutimayi sadhya savitripriyakarini | Samshayachchhedini sankhyavedya sankhya sadishvari || 28 || Siddhida siddhasampujya sarvasiddhipradayini | Sarvajna sarvashaktishcha sarvasampatpradayini || 29 || Sarvashubhaghni sukhada sukhasamvitsvarupini | Sarvasambhashani sarvajagatsammohini tatha || 30 || [ sarvasambhishani ]
वे शिरीष-पुष्प-सी कान्ति वाली हैं, शम में निष्ठ और शम से आराध्या, शितिकण्ठ (शिव) से प्रपूजित; स्वयं शुद्धि और शुद्धि करने वाली, श्रेष्ठा, अनन्त रूप से विख्यात, शुभ लाने वाली। फिर अपने ही बीज-मन्त्र के साथ महानाम आता है — सरस्वती: सर्वज्ञा, सर्वसिद्धिप्रदायिनी; वे सावित्री और सन्ध्या हैं, सब इच्छित देने वाली; सर्व पीड़ाओं का नाश करने वाली, सर्वमयी, समस्त विद्याओं की दात्री; सर्वेश्वरी, सर्वपुण्या, सृष्टि-स्थिति-अन्त करने वाली; सबकी आराध्या, सबकी माता, सब देवों से सेवित, सर्व ऐश्वर्य देने वाली — सत्या, सती, सत्त्वगुण का आश्रय। वे सहस्राक्षी हैं, सहस्रमुखी, सहस्रपदा, सहस्रहस्ता, सहस्रशीर्षा — स्त्री-रूप में विराट पुरुष; स्वधा, स्वाहा, सुधामयी; सूक्ष्म शरीर की छह ग्रन्थियों को भेदने वाली; स्तुत्या और स्तुतिमयी, संशय काटने वाली, सांख्य से वेद्या, स्वयं संख्या; सिद्धिदा, सिद्धों से सम्पूज्या; सर्वज्ञा, सर्वशक्ति, सर्व सम्पत्ति देने वाली; समस्त अशुभ हरने वाली, सुखदा, सुख-संवित् स्वरूपा, सबसे सम्भाषण करने वाली, समस्त जगत को सम्मोहित करने वाली।
Verse 6
सर्वप्रियङ्करी सर्वशुभदा सर्वमङ्गला सर्वमन्त्रमयी सर्वतीर्थपुण्यफलप्रदा 31 सर्वपुण्यमयी सर्वव्याधिघ्नी सर्वकामदा सर्वविघ्नहरी सर्ववन्दिता सर्वमङ्गला 32 सर्वमन्त्रकरी सर्वलक्ष्मीः सर्वगुणान्विता सर्वानन्दमयी सर्वज्ञानदा सत्यनायिका 33 सर्वज्ञानमयी सर्वराज्यदा सर्वमुक्तिदा सुप्रभा सर्वदा सर्वा सर्वलोकवशङ्करी 34 सुभगा सुन्दरी सिद्धा सिद्धाम्बा सिद्धमातृका सिद्धमाता सिद्धविद्या सिद्धेशी सिद्धरूपिणी 35 सुरूपिणी सुखमयी सेवकप्रियकारिणी स्वामिनी सर्वदा सेव्या स्थूलसूक्ष्मापराम्बिका 36 साररूपा सरोरूपा सत्यभूता समाश्रया सिताऽसिता सरोजाक्षी सरोजासनवल्लभा 37 सरोरुहाभा सर्वाङ्गी सुरेन्द्रादिप्रपूजिता [ ह्रीं ऐं महासरस्वति सारस्वतप्रदे ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] महादेवी महेशानी महासारस्वतप्रदा 38 महासरस्वती मुक्ता मुक्तिदा मोहनाशिनी [ मलनाशिनी ] महेश्वरी महानन्दा महामन्त्रमयी मही 39 महालक्ष्मीर्महाविद्या माता मन्दरवासिनी मन्त्रगम्या मन्त्रमाता महामन्त्रफलप्रदा 40
Sarvapriyankari sarvashubhada sarvamangala | Sarvamantramayi sarvatirthapunyaphalaprada || 31 || Sarvapunyamayi sarvavyadhighni sarvakamada | Sarvavighnahari sarvavandita sarvamangala || 32 || Sarvamantrakari sarvalakshmih sarvagunanvita | Sarvanandamayi sarvajnanada satyanayika || 33 || Sarvajnanamayi sarvarajyada sarvamuktida | Suprabha sarvada sarva sarvalokavashankari || 34 || Subhaga sundari siddha siddhamba siddhamatrika | Siddhamata siddhavidya siddheshi siddharupini || 35 || Surupini sukhamayi sevakapriyakarini | Svamini sarvada sevya sthulasukshmaparambika || 36 || Sararupa sarorupa satyabhuta samashraya | Sitasita sarojakshi sarojasanavallabha || 37 || Saroruhabha sarvangi surendradiprapujita | [ Om hrim aim mahasarasvati sarasvataprade aim vada vada vagvadini svaha ] Mahadevi maheshani mahasarasvataprada || 38 || Mahasarasvati mukta muktida mohanashini | [ malanashini ] Maheshvari mahananda mahamantramayi mahi || 39 || Mahalakshmirmahavidya mata mandaravasini | Mantragamya mantramata mahamantraphalaprada || 40 ||
सर्व-नामों की धारा बहती है: सबका प्रिय करने वाली, सर्वशुभदा, सर्वमङ्गला; सर्वमन्त्रमयी, समस्त तीर्थों का पुण्यफल देने वाली; सर्वपुण्यमयी, सब व्याधियाँ हरने वाली, सर्वकामदा; सब विघ्न हरने वाली, सर्ववन्दिता; सर्वमन्त्रकरी, सबकी लक्ष्मी, सर्वगुणान्विता; सर्वानन्दमयी, सर्वज्ञानदा, सत्य की नायिका; सब राज्य और पूर्ण मुक्ति देने वाली, सुप्रभा, सर्वा, समस्त लोकों को वश करने वाली। वे सुभगा हैं, सुन्दरी, सिद्धा — सिद्धों की अम्बा और मातृका, सिद्धविद्या, सिद्धेशी, सिद्धरूपिणी; सुरूपिणी, सुखमयी, सेवकों का प्रिय करने वाली; स्वामिनी, सदा सेव्या, स्थूल-सूक्ष्म से परे परा अम्बिका; सार-रूपा, सरोवर-रूपा, सत्यभूता, सबकी समान आश्रय; सित-असित, सरोजाक्षी, कमलासन (ब्रह्मा) की वल्लभा; कमल-सी आभा वाली, सर्वाङ्गसुन्दरी, इन्द्रादि देवों से प्रपूजित। फिर महासरस्वती-बीज के साथ म-नाम आरम्भ होते हैं: महादेवी, महेशानी, महासारस्वत देने वाली; महासरस्वती, मुक्ता और मुक्तिदा, मोह का नाश करने वाली; महेश्वरी, महानन्दा, महामन्त्रमयी, मही; महालक्ष्मी, महाविद्या, माता, मन्दरवासिनी; मन्त्र से गम्या, मन्त्रों की माता, महामन्त्रों का फल देने वाली।
Verse 7
महामुक्तिर्महानित्या महासिद्धिप्रदायिनी महासिद्धा महामाता महदाकारसंयुता 41 मही महेश्वरी मूर्तिर्मोक्षदा मणिभूषणा मेनका मानिनी मान्या मृत्युघ्नी मेरुरूपिणी 42 मदिराक्षी मदावासा मखरूपा मखेश्वरी [ महेश्वरी ] महामोहा महामाया मातॄणां मूर्ध्निसंस्थिता 43 महापुण्या मुदावासा महासम्पत्प्रदायिनी मणिपूरैकनिलया मधुरूपा मदोत्कटा 44 [ महोत्कटा ] महासूक्ष्मा महाशान्ता महाशान्तिप्रदायिनी मुनिस्तुता मोहहन्त्री माधवी माधवप्रिया 45 मा महादेवसंस्तुत्या महिषीगणपूजिता मृष्टान्नदा माहेन्द्री महेन्द्रपददायिनी 46 मतिर्मतिप्रदा मेधा मर्त्यलोकनिवासिनी मुख्या महानिवासा महाभाग्यजनाश्रिता 47 महिला महिमा मृत्युहारी मेधाप्रदायिनी मेध्या महावेगवती महामोक्षफलप्रदा 48 महाप्रभाभा महती महादेवप्रियङ्करी महापोषा महर्थिश्च मुक्ताहारविभूषणा 49 [ महर्द्धिश्च ] माणिक्यभूषणा मन्त्रा मुख्यचन्द्रार्धशेखरा मनोरूपा मनश्शुद्धिः मनश्शुद्धिप्रदायिनी 50
Mahamuktirmahanitya mahasiddhipradayini | Mahasiddha mahamata mahadakarasamyuta || 41 || Mahi maheshvari murtirmokshada manibhushana | Menaka manini manya mrityughni merurupini || 42 || Madirakshi madavasa makharupa makheshvari | [ maheshvari ] Mahamoha mahamaya matrinam murdhnisamsthita || 43 || Mahapunya mudavasa mahasampatpradayini | Manipuraikanilaya madhurupa madotkata || 44 || [ mahotkata ] Mahasukshma mahashanta mahashantipradayini | Munistuta mohahantri madhavi madhavapriya || 45 || Ma mahadevasamstutya mahishiganapujita | Mrishtannada cha mahendri mahendrapadadayini || 46 || Matirmatiprada medha martyalokanivasini | Mukhya mahanivasa cha mahabhagyajanashrita || 47 || Mahila mahima mrityuhari medhapradayini | Medhya mahavegavati mahamokshaphalaprada || 48 || Mahaprabhabha mahati mahadevapriyankari | Mahaposha maharthishcha muktaharavibhushana || 49 || [ maharddhishcha ] Manikyabhushana mantra mukhyachandrardhashekhara | Manorupa manashshuddhih manashshuddhipradayini || 50 ||
वे महामुक्ति और महानित्या हैं, महासिद्धियाँ देने वाली, महासिद्धा, महामाता, महत् के आकार से युक्त; मही, महेश्वरी, स्वयं मूर्ति, मोक्षदा, मणियों से भूषित; मेनका, मानिनी, मान्या, मृत्यु को हरने वाली, मेरु-रूपिणी; मद भरे नेत्रों वाली, आनन्द का आवास; मख (यज्ञ) की मूर्ति और मखेश्वरी; महामोहा, महामाया, मातृकाओं के शीर्ष पर विराजित; महापुण्या, प्रसन्नता का वास, महासम्पत्ति देने वाली; मणिपूर चक्र में एकमात्र निवास वाली, मधु-रूपा, मद से उत्कट; महासूक्ष्मा, महाशान्ता, महाशान्ति देने वाली; मुनियों से स्तुत, मोह की हन्त्री, माधवी, माधव-प्रिया। वे मा (लक्ष्मी) हैं, महादेव से संस्तुत्य, रानियों से पूजित; मृष्टान्न देने वाली, माहेन्द्री, इन्द्रपद देने वाली; मति और मति देने वाली, मेधा, मर्त्यलोक में निवास करने वाली; मुख्या, महानिवासा, महाभाग्यशाली जनों की आश्रया; महिला, महिमा, मृत्यु हरने वाली, मेधा देने वाली; मेध्या, महावेगवती, महामोक्ष का फल देने वाली; महाप्रभा वाली, महती, महादेव का प्रिय करने वाली; महापोषा, महाऋद्धि, मुक्ताहारों से विभूषित; माणिक्य-आभूषणों वाली, स्वयं मन्त्र, अर्धचन्द्र-शेखरा; मनोरूपा, मन की शुद्धि और मन की शुद्धि देने वाली।
Verse 8
महाकारुण्यसम्पूर्णा मनोनमनवन्दिता महापातकजालघ्नी मुक्तिदा मुक्तभूषणा 51 मनोन्मनी महास्थूला महाक्रतुफलप्रदा महापुण्यफलप्राप्या मायात्रिपुरनाशिनी 52 महानसा महामेधा महामोदा महेश्वरी मालाधरी महोपाया महातीर्थफलप्रदा 53 महामङ्गलसम्पूर्णा महादारिद्र्यनाशिनी महामखा महामेघा महाकाली महाप्रिया 54 महाभूषा महादेहा महाराज्ञी मुदालया [ ह्रीं ऐं नमो भगवति ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] भूरिदा भाग्यदा भोग्या भोग्यदा भोगदायिनी 55 भवानी भूतिदा भूतिः भूमिर्भूमिसुनायिका भूतधात्री भयहरी भक्तसारस्वतप्रदा 56 भुक्तिर्भुक्तिप्रदा भोक्त्री भक्तिर्भक्तिप्रदायिनी [भेकी] भक्तसायुज्यदा भक्तस्वर्गदा भक्तराज्यदा 57 भागीरथी भवाराध्या भाग्यासज्जनपूजिता भवस्तुत्या भानुमती भवसागरतारिणी 58 भूतिर्भूषा भूतेशी भाललोचनपूजिता [ फाललोचनपूजिता ] भूता भव्या भविष्या भवविद्या भवात्मिका 59 बाधापहारिणी बन्धुरूपा भुवनपूजिता भवघ्नी भक्तिलभ्या भक्तरक्षणतत्परा 60
Mahakarunyasampurna manonamanavandita | Mahapatakajalaghni muktida muktabhushana || 51 || Manonmani mahasthula mahakratuphalaprada | Mahapunyaphalaprapya mayatripuranashini || 52 || Mahanasa mahamedha mahamoda maheshvari | Maladhari mahopaya mahatirthaphalaprada || 53 || Mahamangalasampurna mahadaridryanashini | Mahamakha mahamegha mahakali mahapriya || 54 || Mahabhusha mahadeha maharajni mudalaya | [ Om hrim aim namo bhagavati aim vada vada vagvadini svaha ] Bhurida bhagyada bhogya bhogyada bhogadayini || 55 || Bhavani bhutida bhutih bhumirbhumisunayika | Bhutadhatri bhayahari bhaktasarasvataprada || 56 || Bhuktirbhuktiprada bhoktri bhaktirbhaktipradayini | [bheki] Bhaktasayujyada bhaktasvargada bhaktarajyada || 57 || Bhagirathi bhavaradhya bhagyasajjanapujita | Bhavastutya bhanumati bhavasagaratarini || 58 || Bhutirbhusha cha bhuteshi bhalalochanapujita | [ phalalochanapujita ] Bhuta bhavya bhavishya cha bhavavidya bhavatmika || 59 || Badhapaharini bandhurupa bhuvanapujita | Bhavaghni bhaktilabhya cha bhaktarakshanatatpara || 60 ||
वे महाकरुणा से परिपूर्ण हैं, मन के नमन से वन्दित; महापातकों के जाल की हन्त्री, मुक्तिदा, मुक्तों की भूषण; मनोन्मनी, महास्थूला, महाक्रतुओं का फल देने वाली; महापुण्य से प्राप्या, माया के त्रिपुर का नाश करने वाली; महान् अन्न वाली, महामेधा, महामोदा, महेश्वरी; मालाधारिणी, महा-उपाय, महातीर्थों का फल देने वाली; महामङ्गल से सम्पूर्ण, महादारिद्र्य की नाशिनी; महामखा, महामेघा, महाकाली, महाप्रिया; महाभूषा, महादेहा, महाराज्ञी, आनन्द का आलय। फिर भगवती-बीज के साथ भ-नाम: भूरि देने वाली, भाग्यदा, भोग्या और भोग देने वाली; भवानी, भूतिदा, स्वयं भूति, भूमि और भूमि की सुनायिका; भूतों की धात्री, भय हरने वाली, भक्तों को सारस्वत (वाणी-सिद्धि) देने वाली; भुक्ति और भुक्ति देने वाली, भोक्त्री, भक्ति और भक्ति देने वाली; भक्तों को सायुज्य, स्वर्ग और राज्य देने वाली; भागीरथी, भव से आराध्या, भाग्यवान सज्जनों से पूजित; भव से स्तुत्य, भानुमती, भवसागर से तारने वाली; भूति और भूषा, भूतों की ईश्वरी, भाल-लोचन (शिव) से पूजित; भूत, भव्य और भविष्य — भव-विद्या और भव की आत्मा; बाधा हरने वाली, बन्धु-रूपा, भुवनों से पूजित; भव का नाश करने वाली, भक्ति से प्राप्य, भक्तों की रक्षा में तत्पर।
Verse 9
भक्तार्तिशमनी भाग्या भोगदानकृतोद्यमा भुजङ्गभूषणा भीमा भीमाक्षी भीमरूपिणी 61 भाविनी भ्रातृरूपा भारती भवनायिका भाषा भाषावती भीष्मा भैरवी भैरवप्रिया 62 भूतिर्भासितसर्वाङ्गी भूतिदा भूतिनायिका भास्वती भगमाला भिक्षादानकृतोद्यमा 63 भिक्षुरूपा भक्तिकरी भक्तलक्ष्मीप्रदायिनी भ्रान्तिघ्ना भ्रान्तिरूपा भूतिदा भूतिकारिणी 64 भिक्षणीया भिक्षुमाता भाग्यवद्दृष्टिगोचरा भोगवती भोगरूपा भोगमोक्षफलप्रदा 65 भोगश्रान्ता भाग्यवती भक्ताघौघविनाशिनी [ ऐं क्लीं सौः बाले ब्राह्मी ब्रह्मपत्नी ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] ब्राह्मी ब्रह्मस्वरूपा बृहती ब्रह्मवल्लभा 66 ब्रह्मदा ब्रह्ममाता ब्रह्माणी ब्रह्मदायिनी ब्रह्मेशी ब्रह्मसंस्तुत्या ब्रह्मवेद्या बुधप्रिया 67 बालेन्दुशेखरा बाला बलिपूजाकरप्रिया बलदा बिन्दुरूपा बालसूर्यसमप्रभा 68 ब्रह्मरूपा ब्रह्ममयी ब्रध्नमण्डलमध्यगा ब्रह्माणी बुद्धिदा बुद्धिर्बुद्धिरूपा बुधेश्वरी 69 बन्धक्षयकरी बाधानाशिनी बन्धुरूपिणी बिन्द्वालया बिन्दुभूषा बिन्दुनादसमन्विता 70
Bhaktartishamani bhagya bhogadanakritodyama | Bhujangabhushana bhima bhimakshi bhimarupini || 61 || Bhavini bhratrirupa cha bharati bhavanayika | Bhasha bhashavati bhishma bhairavi bhairavapriya || 62 || Bhutirbhasitasarvangi bhutida bhutinayika | Bhasvati bhagamala cha bhikshadanakritodyama || 63 || Bhikshurupa bhaktikari bhaktalakshmipradayini | Bhrantighna bhrantirupa cha bhutida bhutikarini || 64 || Bhikshaniya bhikshumata bhagyavaddrishtigochara | Bhogavati bhogarupa bhogamokshaphalaprada || 65 || Bhogashranta bhagyavati bhaktaghaughavinashini | [ Om aim klim sauh bale brahmi brahmapatni aim vada vada vagvadini svaha ] Brahmi brahmasvarupa cha brihati brahmavallabha || 66 || Brahmada brahmamata cha brahmani brahmadayini | Brahmeshi brahmasamstutya brahmavedya budhapriya || 67 || Balendushekhara bala balipujakarapriya | Balada bindurupa cha balasuryasamaprabha || 68 || Brahmarupa brahmamayi bradhnamandalamadhyaga | Brahmani buddhida buddhirbuddhirupa budheshvari || 69 || Bandhakshayakari badhanashini bandhurupini | Bindvalaya bindubhusha bindunadasamanvita || 70 ||
वे भक्तों की पीड़ा शान्त करती हैं, भाग्य-स्वरूपा हैं, भोग देने में उद्यमशील; भुजङ्गों से भूषित, भीमा, भीम नेत्रों और भीम रूप वाली — फिर भी भाविनी, भ्रातृ-रूपा, भारती, भवन की नायिका; स्वयं भाषा और भाषावती; भीष्मा, भैरवी, भैरव-प्रिया; समस्त अङ्गों से भासित, भूति देने वाली, भूति की नायिका; भास्वती, भगमाला, भिक्षादान में उद्यत; भिक्षु-रूपा, भक्ति करने वाली, भक्तों को लक्ष्मी देने वाली; भ्रान्ति की हन्त्री होकर भी भ्रान्ति-रूपा; भिक्षणीया, भिक्षुओं की माता, भाग्यवानों की ही दृष्टि में आने वाली; भोगवती, भोग-रूपा, भोग और मोक्ष दोनों का फल देने वाली; भोग से परे विश्रान्त, भाग्यवती, भक्तों के पाप-समूहों की विनाशिनी। फिर ब्राह्मी-बीज के साथ ब-नाम: ब्राह्मी, ब्रह्मस्वरूपा, बृहती, ब्रह्मवल्लभा; ब्रह्म देने वाली, ब्रह्मा की माता, ब्रह्माणी, ब्रह्मदायिनी; ब्रह्मेशी, ब्रह्मा से संस्तुत्य, ब्रह्म से वेद्या, बुधों की प्रिया; बाल-चन्द्र-शेखरा बाला, बलि-पूजा से प्रसन्न; बल देने वाली, बिन्दु-रूपा, बाल सूर्य के समान प्रभा वाली; ब्रह्म-रूपा, ब्रह्ममयी, सूर्यमण्डल के मध्य विचरने वाली; ब्रह्माणी, बुद्धि देने वाली, स्वयं बुद्धि, बुद्धि-रूपा, बुधेश्वरी; बन्धों का क्षय करने वाली, बाधा-नाशिनी, बन्धु-रूपिणी; बिन्दु में निवास, बिन्दु-भूषा, बिन्दु और नाद से समन्विता।
Verse 10
बीजरूपा बीजमाता ब्रह्मण्या ब्रह्मकारिणी बहुरूपा बलवती ब्रह्मज्ञा ब्रह्मचारिणी 71 [ब्रह्मजा] ब्रह्मस्तुत्या ब्रह्मविद्या ब्रह्माण्डाधिपवल्लभा ब्रह्मेशविष्णुरूपा ब्रह्मविष्ण्वीशसंस्थिता 72 बुद्धिरूपा बुधेशानी बन्धी बन्धविमोचनी [ ह्रीं ऐं अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं ~लुं ~लूं एं ऐं औं कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं लं क्षं अक्षमाले अक्षरमालिका समलङ्कृते वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] अक्षमालाऽक्षराकाराऽक्षराऽक्षरफलप्रदा 73 अनन्ताऽनन्दसुखदाऽनन्तचन्द्रनिभानना अनन्तमहिमाऽघोरानन्तगम्भीरसम्मिता 74 अदृष्टाऽदृष्टदाऽनन्तादृष्टभाग्यफलप्रदा [ दृष्टिदा ] अरुन्धत्यव्ययीनाथाऽनेकसद्गुणसंयुता 75 अनेकभूषणाऽदृश्याऽनेकलेखनिषेविता अनन्ताऽनन्तसुखदाऽघोराऽघोरस्वरूपिणी 76 अशेषदेवतारूपाऽमृतरूपाऽमृतेश्वरी अनवद्याऽनेकहस्ताऽनेकमाणिक्यभूषणा 77 अनेकविघ्नसंहर्त्री त्वनेकाभरणान्विता अविद्याज्ञानसंहर्त्री ह्यविद्याजालनाशिनी 78 अभिरूपानवद्याङ्गी ह्यप्रतर्क्यगतिप्रदा अकलङ्करूपिणी ह्यनुग्रहपरायणा 79 अम्बरस्थाऽम्बरमयाऽम्बरमालाऽम्बुजेक्षणा अम्बिकाऽब्जकराऽब्जस्थाऽंशुमत्यऽंशुशतान्विता 80
Bijarupa bijamata brahmanya brahmakarini | Bahurupa balavati brahmajna brahmacharini || 71 || [brahmaja] Brahmastutya brahmavidya brahmandadhipavallabha | Brahmeshavishnurupa cha brahmavishnvishasamsthita || 72 || Buddhirupa budheshani bandhi bandhavimochani | [ Om hrim aim am am im im um um rim rim ~lum ~lum em aim Om aum kam kham gam gham nam cham chham jam jham nam tam tham dam dham nam tam tham dam dham nam pam pham bam bham mam yam ram lam vam sham sham sam ham lam ksham akshamale aksharamalika samalankrite vada vada vagvadini svaha ] Akshamalaksharakaraksharaksharaphalaprada || 73 || Anantanandasukhadanantachandranibhanana | Anantamahimaghoranantagambhirasammita || 74 || Adrishtadrishtadanantadrishtabhagyaphalaprada | [ drishtida ] Arundhatyavyayinathanekasadgunasamyuta || 75 || Anekabhushanadrishyanekalekhanishevita | Anantanantasukhadaghoraghorasvarupini || 76 || Asheshadevatarupamritarupamriteshvari | Anavadyanekahastanekamanikyabhushana || 77 || Anekavighnasamhartri tvanekabharananvita | Avidyajnanasamhartri hyavidyajalanashini || 78 || Abhirupanavadyangi hyapratarkyagatiprada | Akalankarupini cha hyanugrahaparayana || 79 || Ambarasthambaramayambaramalambujekshana | Ambikabjakarabjasthamshumatyamshushatanvita || 80 ||
वे बीज-रूपा और बीजों की माता हैं, ब्रह्मण्या और ब्रह्म की कारिणी; बहुरूपा, बलवती, ब्रह्मज्ञा, ब्रह्मचारिणी; ब्रह्मा से स्तुत्य, स्वयं ब्रह्मविद्या, ब्रह्माण्ड के अधिपति की वल्लभा; ब्रह्मा-विष्णु-शिव की रूपा और तीनों में स्थित; बुद्धि-रूपा, बुधों की ईशानी, बाँधने वाली और बन्धन से छुड़ाने वाली। फिर महान मातृका-बीज आता है, जिसमें 'अं' से 'क्षं' तक संस्कृत वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर जपा जाता है — वे अक्षरमालिका हैं, स्वयं वर्णों की माला से अलंकृत। अ-नाम चलते हैं: अक्षमाला, अक्षरों की आकृति, स्वयं अक्षर (अविनाशी) और अक्षर का फल देने वाली; अनन्ता, अनन्त सुखदा, अनन्त चन्द्रों-सा मुख, अनन्त महिमा, अनन्त गम्भीरता वाली; अदृष्ट और अदृष्ट (प्रारब्ध) का फल देने वाली; अरुन्धती; अनेक सद्गुणों और अनेक भूषणों से युक्त, अदृश्या, अनेक शास्त्र-लेखों से सेवित; अघोरा होकर भी अघोर-स्वरूपा (सौम्या); समस्त देवताओं की रूपा, अमृत-रूपा, अमृतेश्वरी; अनवद्या, अनेक हाथों वाली, अनेक माणिक्यों से भूषित; अनेक विघ्नों की संहर्त्री, अनेक आभरणों से अन्विता; अविद्या-अज्ञान की संहर्त्री, अविद्या के जाल की नाशिनी; अभिरूपा, अनवद्य अङ्गों वाली, अतर्क्य गति देने वाली; अकलङ्क-रूपिणी, अनुग्रह में तत्पर; अम्बर में स्थित, अम्बरमयी, अम्बर-माला, अम्बुज-नेत्रा; अम्बिका, कमल-हस्ता, कमल में स्थित, सौ किरणों से युक्त अंशुमती।
Verse 11
अम्बुजाऽनवराऽखण्डाऽम्बुजासनमहाप्रिया अजराऽमरसंसेव्याऽजरसेवितपद्युगा 81 अतुलार्थप्रदाऽर्थैक्याऽत्युदारात्वभयान्विता अनाथवत्सलाऽनन्तप्रियाऽनन्तेप्सितप्रदा 82 अम्बुजाक्ष्यम्बुरूपाऽम्बुजातोद्भवमहाप्रिया अखण्डा त्वमरस्तुत्याऽमरनायकपूजिता 83 अजेया त्वजसङ्काशाऽज्ञाननाशिन्यभीष्टदा अक्ताघनेन चाऽस्त्रेशी ह्यलक्ष्मीनाशिनी तथा 84 अनन्तसाराऽनन्तश्रीरनन्तविधिपूजिता अभीष्टामर्त्यसम्पूज्या ह्यस्तोदयविवर्जिता 85 आस्तिकस्वान्तनिलयाऽस्त्ररूपाऽस्त्रवती तथा अस्खलत्यस्खलद्रूपाऽस्खलद्विद्याप्रदायिनी 86 अस्खलत्सिद्धिदाऽऽनन्दाऽम्बुजाताऽऽमरनायिका अमेयाऽशेषपापघ्न्यक्षयसारस्वतप्रदा 87 [ ज्यां ह्रीं जय जय जगन्मातः ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] जया जयन्ती जयदा जन्मकर्मविवर्जिता जगत्प्रिया जगन्माता जगदीश्वरवल्लभा 88 जातिर्जया जितामित्रा जप्या जपनकारिणी जीवनी जीवनिलया जीवाख्या जीवधारिणी 89 जाह्नवी ज्या जपवती जातिरूपा जयप्रदा जनार्दनप्रियकरी जोषनीया जगत्स्थिता 90
Ambujanavarakhandambujasanamahapriya | Ajaramarasamsevyajarasevitapadyuga || 81 || Atularthapradarthaikyatyudaratvabhayanvita | Anathavatsalanantapriyanantepsitaprada || 82 || Ambujakshyamburupambujatodbhavamahapriya | Akhanda tvamarastutyamaranayakapujita || 83 || Ajeya tvajasankashajnananashinyabhishtada | Aktaghanena chastreshi hyalakshminashini tatha || 84 || Anantasaranantashriranantavidhipujita | Abhishtamartyasampujya hyastodayavivarjita || 85 || Astikasvantanilayastrarupastravati tatha | Askhalatyaskhaladrupaskhaladvidyapradayini || 86 || Askhalatsiddhidanandambujatamaranayika | Ameyasheshapapaghnyakshayasarasvataprada || 87 || [ Om jyam hrim jaya jaya jaganmatah aim vada vada vagvadini svaha ] Jaya jayanti jayada janmakarmavivarjita | Jagatpriya jaganmata jagadishvaravallabha || 88 || Jatirjaya jitamitra japya japanakarini | Jivani jivanilaya jivakhya jivadharini || 89 || Jahnavi jya japavati jatirupa jayaprada | Janardanapriyakari joshaniya jagatsthita || 90 ||
वे अम्बुजा हैं — कमल से जन्मी, अनवरा, अखण्डा, कमलासन की महाप्रिया; अजरा, अमरों से संसेव्या, जिनके चरण-युगल अजरों से सेवित हैं; अतुल अर्थ देने वाली, अर्थों की एकता, अति उदारा, अभय से युक्ता; अनाथों पर वत्सला, अनन्त-प्रिया, अनन्त इच्छित देने वाली; अम्बुज-नेत्रा, जल-रूपा, कमल-जन्मे (ब्रह्मा) की महाप्रिया; अखण्डा, अमरों से स्तुत्य, अमर-नायक से पूजित; अजेया, अज (ब्रह्म) के सदृश, अज्ञान-नाशिनी, अभीष्ट देने वाली; अस्त्रों की ईशी, अलक्ष्मी की नाशिनी; अनन्त-सारा, अनन्त-श्री, अनन्त विधियों से पूजित; अभीष्ट, अमर्त्यों से सम्पूज्या, उदय-अस्त से रहित; आस्तिकों के हृदय में निवास, अस्त्र-रूपा, अस्त्रवती; अस्खलित — कभी न चूकने वाली — अस्खलित रूप, अस्खलित विद्या और सिद्धि देने वाली; आनन्द-स्वरूपा, कमल से जाता, अमरों की नायिका; अमेया, अशेष पापों की हन्त्री, अक्षय सारस्वत देने वाली। फिर जय-बीज के साथ — 'जय जय जगन्मातः' — ज-नाम आरम्भ होते हैं: जया, जयन्ती, जय देने वाली, जन्म-कर्म से रहित; जगत-प्रिया, जगन्माता, जगदीश्वर की वल्लभा; जाति, जया, जिनके शत्रु जीते जा चुके हैं; जप्या और जप कराने वाली; जीवनी, जीवों का आश्रय, जीव नाम वाली, जीवों को धारण करने वाली; जाह्नवी, ज्या (प्रत्यञ्चा), जपवती, जाति-रूपा, जय देने वाली; जनार्दन का प्रिय करने वाली, सेवनीया, जगत में स्थित।
Verse 12
जगज्ज्येष्ठा जगन्माया जीवनत्राणकारिणी जीवातुलतिका जीवजन्मी जन्मनिबर्हणी 91 जाड्यविध्वंसनकरी जगद्योनिर्जयात्मिका जगदानन्दजननी जम्बूश्च जलजेक्षणा 92 जयन्ती जङ्गपूगघ्नी जनितज्ञानविग्रहा जटा जटावती जप्या जपकर्तृप्रियङ्करी 93 जपकृत्पापसंहर्त्री जपकृत्फलदायिनी जपापुष्पसमप्रख्या जपाकुसुमधारिणी 94 जननी जन्मरहिता ज्योतिर्वृत्यभिदायिनी जटाजूटनचन्द्रार्धा जगत्सृष्टिकरी तथा 95 जगत्त्राणकरी जाड्यध्वंसकर्त्री जयेश्वरी जगद्बीजा जयावासा जन्मभूर्जन्मनाशिनी 96 जन्मान्त्यरहिता जैत्री जगद्योनिर्जपात्मिका जयलक्षणसम्पूर्णा जयदानकृतोद्यमा 97 जम्भराद्यादिसंस्तुत्या जम्भारिफलदायिनी जगत्त्रयहिता ज्येष्ठा जगत्त्रयवशङ्करी 98 जगत्त्रयाम्बा जगती ज्वाला ज्वालितलोचना ज्वालिनी ज्वलनाभासा ज्वलन्ती ज्वलनात्मिका 99 जितारातिसुरस्तुत्या जितक्रोधा जितेन्द्रिया जरामरणशून्या जनित्री जन्मनाशिनी 100
Jagajjyeshtha jaganmaya jivanatranakarini | Jivatulatika jivajanmi janmanibarhani || 91 || Jadyavidhvamsanakari jagadyonirjayatmika | Jagadanandajanani jambushcha jalajekshana || 92 || Jayanti jangapugaghni janitajnanavigraha | Jata jatavati japya japakartripriyankari || 93 || Japakritpapasamhartri japakritphaladayini | Japapushpasamaprakhya japakusumadharini || 94 || Janani janmarahita jyotirvrityabhidayini | Jatajutanachandrardha jagatsrishtikari tatha || 95 || Jagattranakari jadyadhvamsakartri jayeshvari | Jagadbija jayavasa janmabhurjanmanashini || 96 || Janmantyarahita jaitri jagadyonirjapatmika | Jayalakshanasampurna jayadanakritodyama || 97 || Jambharadyadisamstutya jambhariphaladayini | Jagattrayahita jyeshtha jagattrayavashankari || 98 || Jagattrayamba jagati jvala jvalitalochana | Jvalini jvalanabhasa jvalanti jvalanatmika || 99 || Jitaratisurastutya jitakrodha jitendriya | Jaramaranashunya cha janitri janmanashini || 100 ||
वे जगत की ज्येष्ठा और जगन्माया हैं, जीवन की रक्षा करने वाली; जीवन की लता (जीवातु), जीवों की जननी, जन्म का नाश करने वाली; जड़ता का विध्वंस करने वाली, जगत की योनि, जय की आत्मा; जगत के आनन्द की जननी, जम्बू, जलज-नेत्रा; जयन्ती, शत्रु-समूहों की हन्त्री, प्रकट ज्ञान की मूर्ति; जटा और जटावती, जप्या, जप करने वालों का प्रिय करने वाली; जप करने वालों के पाप हरने वाली और उनके जप का फल देने वाली; जपा (अड़हुल) पुष्प-सी आभा वाली और जपा-कुसुम धारण करने वाली; स्वयं जननी होकर भी जन्म-रहिता, ज्योतिर्मय वृत्तियाँ देने वाली; जटाजूट में अर्धचन्द्र धारण करने वाली, जगत की सृष्टि करने वाली; जगत की त्राणकर्त्री, जड़ता का ध्वंस करने वाली, जय की ईश्वरी; जगत का बीज, जय का आवास, जन्मभूमि और जन्म की नाशिनी; जन्म और अन्त से रहित, जैत्री, जगद्योनि, जप की आत्मा; जय-लक्षणों से सम्पूर्ण, जय देने में उद्यत; जम्भ के शत्रु (इन्द्र) आदि देवों से संस्तुत्य, इन्द्र को फल देने वाली; तीनों जगत की हितकारिणी, ज्येष्ठा, त्रिलोकों को वश करने वाली; तीनों जगत की अम्बा, स्वयं जगती; ज्वाला, ज्वलित नेत्रों वाली, ज्वालिनी, अग्नि-सी आभा वाली, ज्वलन्ती, ज्वलन की आत्मा; शत्रुओं को जीतने वाले देवों से स्तुत्य, क्रोध और इन्द्रियों को जीत चुकी; जरा-मरण से शून्या, जनित्री, जन्म का नाश करने वाली।
Verse 13
जलजाभा जलमयी जलजासनवल्लभा जलजस्था जपाराध्या जनमङ्गलकारिणी 101 [ ऐं क्लीं सौः कल्याणी कामधारिणी वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] कामिनी कामरूपा काम्या काम्यप्रदायिनी [ कामप्रदायिनी ] कमौली कामदा कर्त्री क्रतुकर्मफलप्रदा 102 कृतघ्नघ्नी क्रियारूपा कार्यकारणरूपिणी कञ्जाक्षी करुणारूपा केवलामरसेविता 103 कल्याणकारिणी कान्ता कान्तिदा कान्तिरूपिणी कमला कमलावासा कमलोत्पलमालिनी 104 कुमुद्वती कल्याणी कान्तिः कामेशवल्लभा [ कान्ता ] कामेश्वरी कमलिनी कामदा कामबन्धिनी 105 कामधेनुः काञ्चनाक्षी काञ्चनाभा कलानिधिः क्रिया कीर्तिकरी कीर्तिः क्रतुश्रेष्ठा कृतेश्वरी 106 क्रतुसर्वक्रियास्तुत्या क्रतुकृत्प्रियकारिणी क्लेशनाशकरी कर्त्री कर्मदा कर्मबन्धिनी 107 कर्मबन्धहरी कृष्टा क्लमघ्नी कञ्जलोचना कन्दर्पजननी कान्ता करुणा करुणावती 108 क्लीङ्कारिणी कृपाकारा कृपासिन्धुः कृपावती करुणार्द्रा कीर्तिकरी कल्मषघ्नी क्रियाकरी 109 क्रियाशक्तिः कामरूपा कमलोत्पलगन्धिनी कला कलावती कूर्मी कूटस्था कञ्जसंस्थिता 110
Jalajabha jalamayi jalajasanavallabha | Jalajastha japaradhya janamangalakarini || 101 || [ Aim klim sauh kalyani kamadharini vada vada vagvadini svaha ] Kamini kamarupa cha kamya kamyapradayini | [ kamapradayini ] Kamauli kamada kartri kratukarmaphalaprada || 102 || Kritaghnaghni kriyarupa karyakaranarupini | Kanjakshi karunarupa kevalamarasevita || 103 || Kalyanakarini kanta kantida kantirupini | Kamala kamalavasa kamalotpalamalini || 104 || Kumudvati cha kalyani kantih kameshavallabha | [ kanta ] Kameshvari kamalini kamada kamabandhini || 105 || Kamadhenuh kanchanakshi kanchanabha kalanidhih | Kriya kirtikari kirtih kratushreshtha kriteshvari || 106 || Kratusarvakriyastutya kratukritpriyakarini | Kleshanashakari kartri karmada karmabandhini || 107 || Karmabandhahari krishta klamaghni kanjalochana | Kandarpajanani kanta karuna karunavati || 108 || Klinkarini kripakara kripasindhuh kripavati | Karunardra kirtikari kalmashaghni kriyakari || 109 || Kriyashaktih kamarupa kamalotpalagandhini | Kala kalavati kurmi kutastha kanjasamsthita || 110 ||
वे कमल-सी आभा वाली, जलमयी, कमलासन की वल्लभा, कमल पर स्थित, जप से आराध्या, जन-जन का मङ्गल करने वाली हैं। फिर कल्याणी-बीज के साथ क-नाम आरम्भ होते हैं: कामिनी, कामरूपा, काम्या, काम्य वस्तुएँ देने वाली; कामदा, कर्त्री, क्रतु-कर्मों का फल देने वाली; कृतघ्नों की हन्त्री, क्रिया-रूपा, कार्य-कारण-रूपिणी; कञ्ज-नेत्रा, करुणा-रूपा, केवल अमरों से सेविता; कल्याणकारिणी, कान्ता, कान्ति देने वाली, कान्ति-रूपिणी; कमला, कमला का आवास, कमल-उत्पल की मालिनी; कुमुद्वती, कल्याणी, कान्ति, कामेश की वल्लभा; कामेश्वरी, कमलिनी, कामदा, काम को बाँधने वाली; कामधेनु, स्वर्ण-नेत्रा, स्वर्ण-आभा, कलाओं की निधि; क्रिया, कीर्ति करने वाली, स्वयं कीर्ति, क्रतुओं में श्रेष्ठा, कृत की ईश्वरी; यज्ञ की समस्त क्रियाओं में स्तुत्य, यज्ञकर्ताओं का प्रिय करने वाली; क्लेशों का नाश करने वाली, कर्त्री, कर्म देने वाली और कर्म बाँधने वाली — और कर्म-बन्धन हरने वाली; कृष्टा, थकान की हन्त्री, कमल-लोचना; कन्दर्प (कामदेव) की जननी, कान्ता, करुणा और करुणावती; क्लीं-कार करने वाली, कृपा की आकृति, कृपा-सिन्धु, कृपावती; करुणा से आर्द्र, कीर्तिकरी, कल्मषों की हन्त्री, क्रिया करने वाली; क्रिया-शक्ति, कामरूपा, कमल-उत्पल की गन्ध वाली; कला, कलावती, कूर्मी, कूटस्था, कमल पर विराजित।
Verse 14
कालिका कल्मषघ्नी कमनीयजटान्विता करपद्मा कराभीष्टप्रदा क्रतुफलप्रदा 111 कौशिकी कोशदा काव्या कर्त्री कोशेश्वरी कृशा [ कन्या ] कूर्मयाना कल्पलता कालकूटविनाशिनी 112 कल्पोद्यानवती कल्पवनस्था कल्पकारिणी कदम्बकुसुमाभासा कदम्बकुसुमप्रिया 113 कदम्बोद्यानमध्यस्था कीर्तिदा कीर्तिभूषणा कुलमाता कुलावासा कुलाचारप्रियङ्करी 114 कुलनाथा कामकला कलानाथा कलेश्वरी कुन्दमन्दारपुष्पाभा कपर्दस्थितचन्द्रिका 115 कवित्वदा काम्यमाता कविमाता कलाप्रदा [काव्यमाता] [ सौः क्लीं ऐं ततो वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] तरुणी तरुणीताता ताराधिपसमानना 116 तृप्तिस्तृप्तिप्रदा तर्क्या तपनी तापिनी तथा तर्पणी तीर्थरूपा त्रिपदा त्रिदशेश्वरी 117 [ त्रिदशा ] त्रिदिवेशी त्रिजननी त्रिमाता त्र्यम्बकेश्वरी त्रिपुरा त्रिपुरेशानी त्र्यम्बका त्रिपुराम्बिका 118 त्रिपुरश्रीस्त्रयीरूपा त्रयीवेद्या त्रयीश्वरी त्रय्यन्तवेदिनी ताम्रा तापत्रितयहारिणी 119 तमालसदृशी त्राता तरुणादित्यसन्निभा त्रैलोक्यव्यापिनी तृप्ता तृप्तिकृत्तत्त्वरूपिणी 120
Kalika kalmashaghni cha kamaniyajatanvita | Karapadma karabhishtaprada kratuphalaprada || 111 || Kaushiki koshada kavya kartri kosheshvari krisha | [ kanya ] Kurmayana kalpalata kalakutavinashini || 112 || Kalpodyanavati kalpavanastha kalpakarini | Kadambakusumabhasa kadambakusumapriya || 113 || Kadambodyanamadhyastha kirtida kirtibhushana | Kulamata kulavasa kulacharapriyankari || 114 || Kulanatha kamakala kalanatha kaleshvari | Kundamandarapushpabha kapardasthitachandrika || 115 || Kavitvada kamyamata kavimata kalaprada | [kavyamata] [ Om sauh klim aim tato vada vada vagvadini svaha ] Taruni tarunitata taradhipasamanana || 116 || Triptistriptiprada tarkya tapani tapini tatha | Tarpani tirtharupa cha tripada tridasheshvari || 117 || [ tridasha ] Tridiveshi trijanani trimata tryambakeshvari | Tripura tripureshani tryambaka tripurambika || 118 || Tripurashristrayirupa trayivedya trayishvari | Trayyantavedini tamra tapatritayaharini || 119 || Tamalasadrishi trata tarunadityasannibha | Trailokyavyapini tripta triptikrittattvarupini || 120 ||
वे कालिका हैं, कल्मष हरने वाली, कमनीय जटाओं वाली; कर-कमल वाली, हाथों से अभीष्ट देने वाली, क्रतु का फल देने वाली; कौशिकी, कोश देने वाली, काव्या, कर्त्री, कोशों की ईश्वरी, कृशा; कूर्म पर चलने वाली, कल्पलता, कालकूट विष की नाशिनी; कल्प-उद्यानों वाली, कल्पवन में स्थित, कल्पों की कारिणी; कदम्ब-कुसुमों-सी आभा वाली और उनसे प्रीति रखने वाली, कदम्ब-उद्यान के मध्य विराजित; कीर्ति देने वाली, कीर्ति से भूषित; कुल की माता, कुल का आवास, कुलाचार का प्रिय करने वाली; कुल की नाथा, कामकला, कलाओं की नाथा और ईश्वरी; कुन्द-मन्दार पुष्पों-सी आभा, शिव के कपर्द (जटाजूट) में स्थित चाँदनी; कवित्व देने वाली, काम्य की माता, कवियों की माता, कलाएँ देने वाली। फिर बीज-मन्त्र के साथ त-नाम आरम्भ होते हैं: तरुणी, तरुणों की रक्षिका, ताराधिप (चन्द्र) के समान मुख वाली; तृप्ति और तृप्ति देने वाली, तर्क से गम्या; तपनी और तापिनी; तर्पणी, तीर्थ-रूपा; त्रिपदा, तैंतीस देवों की ईश्वरी; स्वर्ग की ईशी, तीन की जननी, त्रिमाता, त्र्यम्बकेश्वरी; त्रिपुरा, त्रिपुरेशानी, त्र्यम्बका, त्रिपुर की अम्बिका; त्रिपुर की श्री, त्रयी (वेदत्रयी) की रूपा, त्रयी से वेद्या, त्रयी की ईश्वरी; वेदान्त (त्रय्यन्त) को जानने वाली, ताम्रा, तीनों तापों की हारिणी; तमाल के सदृश श्यामा, त्राता, तरुण आदित्य-सी आभा वाली; त्रैलोक्य में व्यापिनी, तृप्ता, तृप्ति करने वाली, तत्त्व-रूपिणी।
Verse 15
तुर्या त्रैलोक्यसंस्तुत्या त्रिगुणा त्रिगुणेश्वरी त्रिपुरघ्नी त्रिमाता त्र्यम्बका त्रिगुणान्विता 121 तृष्णाच्छेदकरी तृप्ता तीक्ष्णा तीक्ष्णस्वरूपिणी तुला तुलादिरहिता तत्तद्ब्रह्मस्वरूपिणी 122 त्राणकर्त्री त्रिपापघ्नी त्रिदशा त्रिदशान्विता तथ्या त्रिशक्तिस्त्रिपदा तुर्या त्रैलोक्यसुन्दरी 123 तेजस्करी त्रिमूर्त्याद्या तेजोरूपा त्रिधामता त्रिचक्रकर्त्री त्रिभगा तुर्यातीतफलप्रदा 124 तेजस्विनी तापहारी तापोपप्लवनाशिनी तेजोगर्भा तपस्सारा त्रिपुरारिप्रियङ्करी 125 तन्वी तापससन्तुष्टा तपनाङ्गजभीतिनुत् त्रिलोचना त्रिमार्गा तृतीया त्रिदशस्तुता 126 त्रिसुन्दरी त्रिपथगा तुरीयपददायिनी [ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं नमश्शुद्धफलदे ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] शुभा शुभावती शान्ता शान्तिदा शुभदायिनी 127 शीतला शूलिनी शीता श्रीमती शुभान्विता [ ऐं यां यीं यूं यैं यौं यः ऐं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा ] योगसिद्धिप्रदा योग्या यज्ञेनपरिपूरिता 128 यज्ञा यज्ञमयी यक्षी यक्षिणी यक्षिवल्लभा यज्ञप्रिया यज्ञपूज्या यज्ञतुष्टा यमस्तुता 129 यामिनीयप्रभा याम्या यजनीया यशस्करी यज्ञकर्त्री यज्ञरूपा यशोदा यज्ञसंस्तुता 130
Turya trailokyasamstutya triguna triguneshvari | Tripuraghni trimata cha tryambaka trigunanvita || 121 || Trishnachchhedakari tripta tikshna tikshnasvarupini | Tula tuladirahita tattadbrahmasvarupini || 122 || Tranakartri tripapaghni tridasha tridashanvita | Tathya trishaktistripada turya trailokyasundari || 123 || Tejaskari trimurtyadya tejorupa tridhamata | Trichakrakartri tribhaga turyatitaphalaprada || 124 || Tejasvini tapahari tapopaplavanashini | Tejogarbha tapassara tripuraripriyankari || 125 || Tanvi tapasasantushta tapanangajabhitinut | Trilochana trimarga cha tritiya tridashastuta || 126 || Trisundari tripathaga turiyapadadayini | [ Om hrim shrim klim aim namashshuddhaphalade aim vada vada vagvadini svaha ] Shubha shubhavati shanta shantida shubhadayini || 127 || Shitala shulini shita shrimati cha shubhanvita | [ Om aim yam yim yum yaim yaum yah aim vada vada vagvadini svaha ] Yogasiddhiprada yogya yajnenaparipurita || 128 || Yajna yajnamayi yakshi yakshini yakshivallabha | Yajnapriya yajnapujya yajnatushta yamastuta || 129 || Yaminiyaprabha yamya yajaniya yashaskari | Yajnakartri yajnarupa yashoda yajnasamstuta || 130 ||
वे तुर्या हैं — जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति से परे चौथी अवस्था — त्रैलोक्य से संस्तुत्य; त्रिगुणा और त्रिगुणेश्वरी; त्रिपुर की हन्त्री, त्रिमाता, त्र्यम्बका, त्रिगुणों से युक्ता; तृष्णा को काटने वाली, तृप्ता, तीक्ष्णा, तीक्ष्ण-स्वरूपिणी; तुला होकर भी तुला आदि से रहित, तत्-तत् ब्रह्म-स्वरूपिणी; त्राण करने वाली, तीन पापों की हन्त्री, त्रिदशा और त्रिदशों से युक्ता; तथ्या, त्रिशक्ति, त्रिपदा, तुर्या, त्रैलोक्य-सुन्दरी; तेज करने वाली, त्रिमूर्ति की आद्या, तेजोरूपा, तीन धामों वाली; तीन चक्रों की कर्त्री, त्रिभगा, तुर्यातीत फल देने वाली; तेजस्विनी, ताप हरने वाली, ताप और उपप्लव की नाशिनी; तेज को गर्भ में धारण करने वाली, तप का सार, त्रिपुरारि (शिव) का प्रिय करने वाली; तन्वी, तापसों से सन्तुष्ट, यम के भय को हरने वाली; त्रिलोचना, त्रिमार्गा, तृतीया, त्रिदशों से स्तुत; त्रिसुन्दरी, त्रिपथगा (गङ्गा), तुरीय पद देने वाली। फिर शुद्ध-बीज के साथ शुभ-नाम: शुभा, शुभावती, शान्ता, शान्ति देने वाली, शुभदायिनी; शीतला, शूलिनी, शीता, श्रीमती, शुभ से युक्ता। और यं-बीज के साथ य-नाम आरम्भ होते हैं: योगसिद्धि देने वाली, योग्या, यज्ञ से परिपूरिता; यज्ञा, यज्ञमयी, यक्षी, यक्षिणी, यक्षों की वल्लभा; यज्ञ-प्रिया, यज्ञ में पूज्या और यज्ञ से तुष्टा, यम से स्तुता; यामिनी की प्रभा, याम्या, यजनीया, यश करने वाली; यज्ञ की कर्त्री और रूपा, यशोदा, यज्ञ में संस्तुता।
Verse 16
यज्ञेशी यज्ञफलदा योगयोनिर्यजुस्स्तुता यमिसेव्या यमाराध्या यमिपूज्या यमीश्वरी 131 योगिनी योगरूपा योगकर्तृप्रियङ्करी योगयुक्ता योगमयी योगयोगीश्वराम्बिका 132 योगज्ञानमयी योनिर्यमाद्यष्टाङ्गयोगता यन्त्रिताघौघसंहारा यमलोकनिवारिणी 133 यष्टिव्यष्टीशसंस्तुत्या यमाद्यष्टाङ्गयोगयुक् योगीश्वरी योगमाता योगसिद्धा योगदा 134 योगारूढा योगमयी योगरूपा यवीयसी यन्त्ररूपा यन्त्रस्था यन्त्रपूज्या यन्त्रिका 135 [ यन्त्रिता ] युगकर्त्री युगमयी युगधर्मविवर्जिता यमुना यामिनी याम्या यमुनाजलमध्यगा 136 [ यमिनी ] यातायातप्रशमनी यातनानान्निकृन्तनी योगावासा योगिवन्द्या यत्तच्छब्दस्वरूपिणी 137 योगक्षेममयी यन्त्रा यावदक्षरमातृका यावत्पदमयी यावच्छब्दरूपा यथेश्वरी 138 यत्तदीया यक्षवन्द्या यद्विद्या यतिसंस्तुता यावद्विद्यामयी यावद्विद्याबृन्दसुवन्दिता 139 योगिहृत्पद्मनिलया योगिवर्यप्रियङ्करी योगिवन्द्या योगिमाता योगीशफलदायिनी 140
Yajneshi yajnaphalada yogayoniryajusstuta | Yamisevya yamaradhya yamipujya yamishvari || 131 || Yogini yogarupa cha yogakartripriyankari | Yogayukta yogamayi yogayogishvarambika || 132 || Yogajnanamayi yoniryamadyashtangayogata | Yantritaghaughasamhara yamalokanivarini || 133 || Yashtivyashtishasamstutya yamadyashtangayogayuk | Yogishvari yogamata yogasiddha cha yogada || 134 || Yogarudha yogamayi yogarupa yaviyasi | Yantrarupa cha yantrastha yantrapujya cha yantrika || 135 || [ yantrita ] Yugakartri yugamayi yugadharmavivarjita | Yamuna yamini yamya yamunajalamadhyaga || 136 || [ yamini ] Yatayataprashamani yatananannikrintani | Yogavasa yogivandya yattachchhabdasvarupini || 137 || Yogakshemamayi yantra yavadaksharamatrika | Yavatpadamayi yavachchhabdarupa yatheshvari || 138 || Yattadiya yakshavandya yadvidya yatisamstuta | Yavadvidyamayi yavadvidyabrindasuvandita || 139 || Yogihritpadmanilaya yogivaryapriyankari | Yogivandya yogimata yogishaphaladayini || 140 ||
वे यज्ञ की ईशी और यज्ञ का फल देने वाली हैं, योग की योनि, यजुर्वेद से स्तुता; यमियों (संयमियों) से सेव्या, यम से आराध्या, यमियों से पूज्या, यमियों की ईश्वरी; योगिनी, योग-रूपा, योग करने वालों का प्रिय करने वाली; योग से युक्ता, योगमयी, योग और योगेश्वरों की अम्बिका; योग-ज्ञानमयी, योनि, यम आदि आठ अङ्गों वाला योग स्वयं; नियन्त्रित पाप-समूहों की संहर्त्री, यमलोक से बचाने वाली; व्यष्टि-समष्टि के ईशों से संस्तुत्य, अष्टाङ्ग योग से युक्ता; योगीश्वरी, योगमाता, योगसिद्धा और योग देने वाली; योगारूढा, योगमयी, योगरूपा, यवीयसी (नित्य तरुण); यन्त्र-रूपा, यन्त्र में स्थित, यन्त्र में पूज्या, यन्त्रिका; युगों की कर्त्री, युगमयी, फिर भी युग-धर्मों से अछूती; यमुना, यामिनी, याम्या, यमुना-जल के मध्य विराजित; आवागमन (पुनर्जन्म) का शमन करने वाली, यातनाओं को काटने वाली; योग का आवास, योगियों से वन्द्या, 'यत्' और 'तत्' शब्दों की स्वरूपिणी; योगक्षेममयी, यन्त्रा, जितने अक्षर हैं उन सबकी मातृका; जितने पद हैं उन सबमयी, जितने शब्द हैं उन सबकी रूपा, यथेश्वरी; जो कुछ 'उसका' है वह सब उनका है; यक्षों से वन्द्या, जो भी विद्या है वही, यतियों से संस्तुता; जितनी विद्याएँ हैं उन सबमयी, समस्त विद्या-वृन्दों से सुवन्दिता; योगियों के हृदय-कमल में निवास, योगिवरों का प्रिय करने वाली; योगियों से वन्द्या, योगियों की माता, योगीशों को फल देने वाली।
Verse 17
यक्षवन्द्या यक्षपूज्या यक्षराजसुपूजिता यज्ञरूपा यज्ञतुष्टा यायजूकस्वरूपिणी 141 यन्त्राराध्या यन्त्रमध्या यन्त्रकर्तृप्रियङ्करी यन्त्रारूढा यन्त्रपूज्या योगिध्यानपरायणा 142 यजनीया यमस्तुत्या योगयुक्ता यशस्करी योगबद्धा यतिस्तुत्या योगज्ञा योगनायकी 143 योगिज्ञानप्रदा यक्षी यमबाधाविनाशिनी योगिकाम्यप्रदात्री योगिमोक्षप्रदायिनी 144
Yakshavandya yakshapujya yaksharajasupujita | Yajnarupa yajnatushta yayajukasvarupini || 141 || Yantraradhya yantramadhya yantrakartripriyankari | Yantrarudha yantrapujya yogidhyanaparayana || 142 || Yajaniya yamastutya yogayukta yashaskari | Yogabaddha yatistutya yogajna yoganayaki || 143 || Yogijnanaprada yakshi yamabadhavinashini | Yogikamyapradatri cha yogimokshapradayini || 144 ||
अन्तिम नाम माला पूर्ण करते हैं: यक्षों से वन्द्या और पूज्या, यक्षराज (कुबेर) से सुपूजित; यज्ञ-रूपा, यज्ञ से तुष्टा, नित्य यज्ञशील (यायजूक) की स्वरूपिणी; यन्त्र से आराध्या, यन्त्र के मध्य विराजित, यन्त्र बनाने वालों का प्रिय करने वाली; यन्त्र पर आरूढा, यन्त्र में पूज्या, योगियों के ध्यान में लीन; यजनीया, यम से स्तुत्या, योगयुक्ता, यश करने वाली; योग में बद्धा, यतियों से स्तुत्या, योग को जानने वाली, योग की नायिका; योगियों को ज्ञान देने वाली, यक्षी, यम की बाधाओं की विनाशिनी; योगियों की कामनाएँ पूर्ण करने वाली — और अन्त में योगियों को मोक्ष प्रदान करने वाली।
Verse 18
फलश्रुतिः इति नाम्नां सरस्वत्याः सहस्रं समुदीरितम् मन्त्रात्मकं महागोप्यं महासारस्वतप्रदम् 1 यः पठेच्छृणुयाद्भक्त्यात्त्रिकालं साधकः पुमान् सर्वविद्यानिधिः साक्षात् एव भवति ध्रुवम् 2 लभते सम्पदः सर्वाः पुत्रपौत्रादिसंयुताः मूकोऽपि सर्वविद्यासु चतुर्मुख इवापरः 3 भूत्वा प्राप्नोति सान्निध्यं अन्ते धातुर्मुनीश्वर सर्वमन्त्रमयं सर्वविद्यामानफलप्रदम् 4 महाकवित्वदं पुंसां महासिद्धिप्रदायकम् कस्मै चिन्न प्रदातव्यं प्राणैः कण्ठगतैरपि 5 महारहस्यं सततं वाणीनामसहस्रकम् सुसिद्धमस्मदादीनां स्तोत्रं ते समुदीरितम् 6 इति श्रीस्कान्दपुराणान्तर्गत श्रीसनत्कुमार संहितायां नारद सनत्कुमार संवादे श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रं सम्पूर्णम्
Phalashrutih Iti namnam sarasvatyah sahasram samudiritam | Mantratmakam mahagopyam mahasarasvatapradam || 1 || Yah pathechchhrinuyadbhaktyattrikalam sadhakah puman | Sarvavidyanidhih sakshat sa eva bhavati dhruvam || 2 || Labhate sampadah sarvah putrapautradisamyutah | Mukopi sarvavidyasu chaturmukha ivaparah || 3 || Bhutva prapnoti sannidhyam ante dhaturmunishvara | Sarvamantramayam sarvavidyamanaphalapradam || 4 || Mahakavitvadam pumsam mahasiddhipradayakam | Kasmai chinna pradatavyam pranaih kanthagatairapi || 5 || Maharahasyam satatam vaninamasahasrakam | Susiddhamasmadadinam stotram te samudiritam || 6 || Iti shriskandapuranantargata shrisanatkumara samhitayam narada sanatkumara samvade shri sarasvati sahasranama stotram sampurnam ||
फलश्रुति फल की घोषणा करती है: 'इस प्रकार सरस्वती के सहस्र नाम कहे गए — मन्त्रात्मक, महागोपनीय, महासारस्वत (वाणी की महासिद्धि) देने वाले। जो साधक भक्तिपूर्वक त्रिकाल इन्हें पढ़ता या सुनता है, वह निश्चय ही साक्षात् सर्वविद्याओं का निधि बन जाता है। वह पुत्र-पौत्रादि सहित समस्त सम्पदाएँ पाता है; मूक (गूँगा) भी समस्त विद्याओं में दूसरे चतुर्मुख (ब्रह्मा) के समान होकर अन्त में विधाता का सान्निध्य प्राप्त करता है, हे मुनीश्वर। यह सर्वमन्त्रमय है, समस्त विद्याओं का पूर्ण फल देने वाला, पुरुषों को महाकवित्व और महासिद्धि देने वाला। प्राण कण्ठ में आ जाएँ तो भी यह किसी अपात्र को नहीं देना चाहिए। यह महारहस्य — वाणी का नाम-सहस्र — हम सबके लिए सुसिद्ध स्तोत्र तुम्हें कह दिया गया।' इस प्रकार श्रीस्कन्दपुराण के अन्तर्गत श्रीसनत्कुमार संहिता में नारद-सनत्कुमार संवाद में श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्र सम्पूर्ण हुआ।

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