ਸ਼ਬਦ ਹਜ਼ਾਰੇ ਪਾਤਿਸ਼ਾਹੀ ੧੦ — Word-by-Word Meaning
ਸ਼ਬਦ ਹਜ਼ਾਰੇ ਪਾਤਿਸ਼ਾਹੀ ੧੦
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Dasam Granth
Author: Guru Gobind Singh Ji
Period: 17th–18th century CE
परम्परा अनुसार गुरु जी ने चमकौर की जंग के बाद, जंगल में विश्राम करते हुए, अपने सिखों से बिछुड़ कर “मित्र पिआरे नूं” उचारा — उस हानि की रात को भी प्रियतम के प्रेम का गीत बना दिया। यह सिख भक्ति की सबसे मार्मिक अभिव्यक्तियों में से एक है।
Frequently Asked Questions
“मित्र पिआरे नूं” क्या है?▼
“मित्र पिआरे नूं हाल मुरीदां दा कहणा” शबद हज़ारे पातिशाही ੧੦ का सबसे प्रिय शबद है — गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रियतम वाहिगुरु को संदेश, जो सिखों की दशा बताता है, गहन प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति।
शबद हज़ारे पातिशाही ੧੦ की रचना किसने की?▼
इसकी रचना दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने की और यह दशम ग्रंथ का अंग है।
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