षण्मुख षट्पदी स्तोत्रम् — Word-by-Word Meaning
षण्मुख षट्पदी स्तोत्रम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
षण्मुख (भगवान मुरुगन) की षट्पदी ("छह-पद") छंद में रचित स्तुति, जो मयूरगिरि के षण्मुख प्रभु — कृपा, साहस व ज्ञान-ज्योति के दाता — को वंदन करती है।
Origin & History
Source: Traditional (Sringeri lineage)
Author: Bharati Tirtha
Period: Medieval
षण्मुख षट्पदी स्तोत्रम् पारम्परिक रूप से भारती तीर्थ को आरोपित है। यह षण्मुख (भगवान मुरुगन) की षट्पदी ("छह-पद") छंद में रचित स्तुति है, जो मयूरगिरि के षण्मुख प्रभु — कृपा, साहस और ज्ञान-ज्योति के दाता — को वंदन करती है।
Frequently Asked Questions
षण्मुख षट्पदी स्तोत्रम् क्या है?▼
षण्मुख (भगवान मुरुगन) की षट्पदी ("छह-पद") छंद में रचित स्तुति, जो मयूरगिरि के षण्मुख प्रभु — कृपा, साहस और ज्ञान-ज्योति के दाता — को वंदन करती है।
षण्मुख षट्पदी स्तोत्रम् की रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?▼
यह भारती तीर्थ (पारम्परिक — श्रृंगेरी परम्परा) को आरोपित है। इसका पाठ प्रातः या सन्ध्या में श्रद्धा से किया जाता है, और विशेषकर मंगलवार तथा कृत्तिका को व स्कन्द षष्ठी में।
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