शुक्र मंत्र — Word-by-Word Meaning
शुक्र मंत्र
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
ॐ
Om
आदि नाद / प्रणव
शुं शुक्राय
Shum Shukraya
वीनस (शुक्र) का नाम/बीज
नमः
Namah
नमस्कार / मैं नमन करता हूँ
Complete Translation
ॐ। शुक्र को नमस्कार — इसकी कृपा बढ़ाने तथा अशुभ प्रभाव शांत करने हेतु।
Origin & History
Source: The Vedic Navagraha mantra of Venus (Shukra)
Author: Traditional (Vedic Jyotish)
वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रह जीवन की दिशा को आकार देते हैं, और प्रत्येक का आशीर्वाद और उपाय हेतु अपना मंत्र है। 'ॐ शुं शुक्राय नमः' शुक्र ग्रह का मंत्र है, जो प्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख-सुविधा, विलास, कला और संबंधों का कारक है। जब कुंडली में ग्रह कमजोर या अशुभ हो, तब ऋषियों ने इसकी कृपा बढ़ाने तथा कठिनाइयों को शांत करने हेतु इसके मंत्र का जप — दान, इसके दिन (शुक्रवार) व्रत, इसके देवता की पूजा और इसके रत्न (हीरा) के साथ — निर्धारित किया।
Frequently Asked Questions
शुक्र मंत्र क्या है?▼
यह शुक्र ग्रह का वैदिक मंत्र है — 'ॐ शुं शुक्राय नमः'। इसे जन्म कुंडली में शुक्र को बलवान बनाने तथा ग्रह के कमजोर या अशुभ होने पर उत्पन्न कठिनाइयों को कम करने हेतु जपा जाता है।
शुक्र मंत्र के क्या लाभ हैं?▼
शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख-सुविधा, विलास, कला और संबंधों का कारक है। इसके मंत्र का जप इन क्षेत्रों के आशीर्वाद, ग्रह की कठिन अवधियों (दशा और गोचर) को सरल करने, तथा मन की शांति और रक्षा हेतु एक उत्कृष्ट ज्योतिषीय उपाय है।
शुक्र मंत्र किस दिन जपा जाना चाहिए?▼
यह शुक्रवार को सर्वाधिक शक्तिशाली होता है। इसे माला पर प्रतिदिन 108 बार जपें; पूर्ण उपाय के रूप में परंपरागत रूप से निश्चित अवधि में 16,000 जप का अनुष्ठान किया जाता है।
शुक्र ग्रह से कौन सा रत्न संबंधित है?▼
शुक्र ग्रह का रत्न हीरा है। इसे (सही धातु और उंगली में जड़वाकर) केवल योग्य ज्योतिषी के परामर्श के पश्चात, मंत्र और ग्रह की वस्तुओं के दान के साथ धारण किया जाता है।
शुक्र मंत्र को ज्योतिषीय उपाय के रूप में कैसे प्रयोग किया जाता है?▼
जब शुक्र कमजोर, पीड़ित, या प्रतिकूल दशा/गोचर में चल रहा हो, तब मंत्र जपा जाता है (प्रतिदिन 108 बार, या पूर्ण 16,000 जप), ग्रह की वस्तुओं के दान, इसके दिन व्रत या पूजा, और — ज्योतिषीय मार्गदर्शन के साथ — इसके रत्न के साथ संयुक्त किया जाता है। समग्र ग्रह संतुलन हेतु इसे नवग्रह मंत्र के साथ पढ़ें।
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