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सुब्रह्मण्य (षण्मुख) अष्टोत्तर शतनामावली — Word-by-Word Meaning

सुब्रह्मण्य (षण्मुख) अष्टोत्तर शतनामावली

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

भगवान सुब्रह्मण्य (षण्मुख, मुरुगन, कार्तिकेय) के १०८ नाम — शिव-पुत्र, देव-सेनापति व भक्ति के स्वामी — प्रत्येक “ॐ” व “नमः” सहित, साहस, विजय व ज्ञान हेतु।

Origin & History

Source: Traditional

Author: Traditional

Period: Classical

सुब्रह्मण्य (षण्मुख) अष्टोत्तर शतनामावली सुब्रह्मण्य (षण्मुख) के १०८ नामों की परम्परागत माला है। भगवान सुब्रह्मण्य (षण्मुख, मुरुगन, कार्तिकेय) — शिव के छह-मुख वाले पुत्र, देव-सेना के सेनापति और भक्ति के स्वामी — के १०८ नाम साहस, विजय और ज्ञान के लिए प्रत्येक 'ॐ' और 'नमः' सहित जपे जाते हैं।

Frequently Asked Questions

सुब्रह्मण्य (षण्मुख) अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
भगवान सुब्रह्मण्य (षण्मुख, मुरुगन, कार्तिकेय) — शिव के छह-मुख वाले पुत्र, देव-सेना के सेनापति और भक्ति के स्वामी — के १०८ नाम, जो साहस, विजय और ज्ञान के लिए प्रत्येक 'ॐ' और 'नमः' सहित जपे जाते हैं।
अष्टोत्तर शतनामावली का जप कैसे किया जाता है?
इसका जप अर्चना के रूप में किया जाता है: १०८ नामों में से प्रत्येक को उसके पूर्व 'ॐ' और पश्चात 'नमः' सहित पढ़ा जाता है, और प्रत्येक नाम पर देवता के चरणों में पुष्प या एक चुटकी कुमकुम अर्पित किया जाता है। पूरी माला एक ही बैठक में अर्पित की जाती है, विशेषकर मंगलवार और षष्ठी पर तथा स्कन्द षष्ठी और थैपूसम के समय।
'अष्टोत्तर शतनामावली' का क्या अर्थ है?
'अष्टोत्तर-शत' का अर्थ है 'एक सौ आठ' (१०८) और 'नामावली' का अर्थ है 'नामों की माला' — सुब्रह्मण्य (षण्मुख) के १०८ नामों की पवित्र सूची, जिनमें से प्रत्येक स्तुति और ध्यान का नाम है।

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