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सूर्य अष्टोत्तर शतनामावली — Word-by-Word Meaning

सूर्य अष्टोत्तर शतनामावली

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

सूर्यदेव के १०८ नाम — प्रत्यक्ष देव, प्रकाश, आरोग्य व जीवन के स्रोत, तमस-नाशक — प्रत्येक “ॐ” व “नमः” सहित, प्रातः (विशेषतः रविवार) आरोग्य, ओज व सूर्य-दोष शमन हेतु पठित।

Origin & History

Source: Traditional

Author: Traditional

Period: Classical

सूर्य अष्टोत्तर शतनामावली सूर्य के 108 नामों की एक परम्परागत माला है। ये सूर्यदेव के 108 नाम हैं — प्रत्यक्ष देव, प्रकाश, आरोग्य व जीवन के स्रोत, तमस-नाशक — प्रत्येक 'ॐ' व 'नमः' सहित, जो आरोग्य, ओज व सूर्य-दोष शमन हेतु प्रातः (विशेषतः रविवार) पढ़े जाते हैं।

Frequently Asked Questions

सूर्य अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
सूर्यदेव के 108 नाम — प्रत्यक्ष देव, प्रकाश, आरोग्य व जीवन के स्रोत, तमस-नाशक — प्रत्येक 'ॐ' व 'नमः' सहित, आरोग्य, ओज व सूर्य-दोष शमन हेतु प्रातः (विशेषतः रविवार) पढ़े जाते हैं।
अष्टोत्तर शतनामावली का जाप कैसे किया जाता है?
इसे अर्चना के रूप में किया जाता है: 108 में से प्रत्येक नाम के पूर्व 'ॐ' व पश्चात् 'नमः' लगाकर पढ़ा जाता है, साथ ही प्रत्येक नाम पर देव के चरणों में पुष्प या चुटकी भर कुमकुम अर्पित किया जाता है। पूरी नामावली एक ही बैठक में अर्पित की जाती है, विशेषकर रविवार को तथा रथ सप्तमी व मकर संक्रान्ति में।
'अष्टोत्तर शतनामावली' का क्या अर्थ है?
'अष्टोत्तर-शत' का अर्थ 'एक सौ आठ' (108) तथा 'नामावली' का अर्थ 'नामों की माला' है — सूर्य के 108 नामों की पवित्र सूची, जिनमें प्रत्येक स्तुति व ध्यान का नाम है।

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