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सूर्य मंत्र — Word-by-Word Meaning

सूर्य मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
आदि नाद (मूल ध्वनि)
घृणिः सूर्याय
Ghrinih Suryaya
सूर्य का नाम/बीज
नमः
Namah
नमस्कार / मैं नमन करता हूँ

Complete Translation

ॐ। सूर्य को नमस्कार — इसकी कृपा बढ़ाने तथा अशुभ प्रभाव शांत करने हेतु।

Origin & History

Source: The Vedic Navagraha mantra of the Sun (Surya)

Author: Traditional (Vedic Jyotish)

वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रह जीवन की दिशा को प्रभावित करते हैं, और प्रत्येक का आशीर्वाद व उपाय हेतु अपना मंत्र है। "ॐ घृणिः सूर्याय नमः" सूर्य का मंत्र है, जो आत्मा, जीवनशक्ति, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, अधिकार, शासन और पिता का कारक है। जब ग्रह कुंडली में दुर्बल या अशुभ हो, तब ऋषियों ने इसके मंत्र के जप का विधान बताया — दान, उसके दिन (रविवार) व्रत, देवता की पूजा तथा उसके रत्न (माणिक्य) के साथ — ताकि इसकी कृपा बढ़े और कठिनाइयाँ शांत हों।

Frequently Asked Questions

सूर्य मंत्र क्या है?
यह सूर्य का वैदिक मंत्र है — "ॐ घृणिः सूर्याय नमः"। यह जन्मकुंडली में सूर्य को बलवान बनाने तथा ग्रह के दुर्बल या अशुभ होने पर उत्पन्न कठिनाइयों को घटाने हेतु जपा जाता है।
सूर्य मंत्र के क्या लाभ हैं?
सूर्य आत्मा, जीवनशक्ति, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, अधिकार, शासन और पिता का कारक है। इसके मंत्र का जप इन क्षेत्रों को आशीर्वाद देने, ग्रह की कठिन अवधियों (दशा व गोचर) को सरल करने तथा मन को शांति और रक्षा देने का प्रसिद्ध ज्योतिषीय उपाय है।
सूर्य मंत्र किस दिन जपना चाहिए?
यह रविवार को सर्वाधिक प्रभावी है। इसे प्रतिदिन माला पर १०८ बार जपें; पूर्ण उपाय के रूप में परंपरा से इसे एक निश्चित अवधि में ७,००० आवृत्तियों के जप के रूप में किया जाता है।
सूर्य से कौन-सा रत्न संबंधित है?
सूर्य का रत्न माणिक्य है। इसे (सही धातु और अंगुली में जड़वाकर) योग्य ज्योतिषी के परामर्श के बाद ही धारण किया जाता है, मंत्र तथा ग्रह की वस्तुओं के दान के साथ।
सूर्य मंत्र का ज्योतिषीय उपाय के रूप में उपयोग कैसे होता है?
जब सूर्य दुर्बल, पीड़ित अथवा प्रतिकूल दशा/गोचर में हो, तब यह मंत्र जपा जाता है (प्रतिदिन १०८ बार, या पूर्ण ७,००० जप), साथ में ग्रह की वस्तुओं का दान, उसके दिन व्रत या पूजा, तथा ज्योतिषीय परामर्श से उसका रत्न। समग्र ग्रह-संतुलन हेतु इसे नवग्रह मंत्र के साथ जपें।

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