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विष्णु गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning

विष्णु गायत्री मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
आदि (मूल) ध्वनि
विद्महे
Vidmahe
हम जानें / हम जानना चाहते हैं — नारायण (सबके आश्रय) को
धीमहि
Dhimahi
हम ध्यान करते हैं — वासुदेव (अंतर्यामी प्रभु) का
तन्नः … प्रचोदयात्
Tannah … Prachodayat
वे विष्णु हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करें

Complete Translation

ॐ। हम Lord Vishnu को जानें, उनका ध्यान करें; वे Lord Vishnu हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।

Origin & History

Source: The Gayatri mantra of Lord Vishnu

Author: Traditional (Vedic)

सार्वभौम गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परम्परा प्रत्येक महान देवता को उसकी अपनी गायत्री प्रदान करती है — पवित्र गायत्री छंद में एक प्रार्थना जो उस देवता से बुद्धि को प्रकाशित करने की याचना करती है। विष्णु गायत्री मंत्र भगवान विष्णु का आह्वान करता है, जो संरक्षण, समृद्धि, धर्म व मोक्ष के दाता हैं, उसी कालातीत क्रम "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" में — "हम जानें, हम ध्यान करें, भगवान हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।" संध्या समयों में जपा जाने वाली यह एक पूर्ण व कोमल दैनिक साधना है।

Frequently Asked Questions

विष्णु गायत्री मंत्र क्या है?
यह भगवान विष्णु का गायत्री मंत्र है: "ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।" पवित्र गायत्री छंद में रचित, यह भगवान विष्णु से बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करने की प्रार्थना करता है, "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" के क्रम में।
विष्णु गायत्री मंत्र के क्या लाभ हैं?
यह संरक्षण, समृद्धि, धर्म व मोक्ष हेतु तथा मन की स्पष्टता व बुद्धि जगाने हेतु जपा जाता है। गायत्री मंत्र होने के कारण इसे विशेष रूप से पवित्र व स्थिर करने वाला माना जाता है, जो दैनिक जीवन में भगवान विष्णु के आशीर्वाद लाता है।
इसे कब और कितनी बार जपना चाहिए?
इसे माला पर १०८ बार जपें, आदर्श रूप से प्रातः व अन्य संध्या समयों में, पूर्व की ओर मुख करके। गुरुवार इसका विशेष दिवस है। इसे दैनिक गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
"विद्महे धीमहि प्रचोदयात्" का अर्थ क्या है?
प्रत्येक गायत्री इसी क्रम का अनुसरण करती है: "विद्महे" — हम जानें; "धीमहि" — हम ध्यान करें; "प्रचोदयात्" — वह देवता हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें। अतः यह मंत्र देवता से हममें ज्ञान जगाने की प्रार्थना है।
क्या कोई भी विष्णु गायत्री मंत्र जप सकता है?
हाँ — देवता गायत्री मंत्र कोई भी भक्ति के साथ जप सकता है। इन्हें प्रातः स्नान के पश्चात्, स्वच्छ मन से, आदर्श रूप से गुरुवार को जपा जाता है, और ये एक कोमल, पूर्ण दैनिक साधना हैं।

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