अकबर के महल के कुछ दरबारी ईर्ष्या से जले जा रहे थे। सवाल कोई भी हो, बादशाह हमेशा बीरबल की ओर देखते; इनाम कोई भी हो, वह हमेशा बीरबल की झोली में गिरता। सो उन्होंने एक दुष्ट योजना रची — और उसके लिए शाही नाई को लालच देकर अपनी ओर मिला लिया, क्योंकि वही एक आदमी था जो हर रोज़ बादशाह के कान के पास रहता था।
शाही दाढ़ी बनाते-बनाते नाई ने आह भरी, “हुज़ूर, कल रात सपने में मैंने आपके पूज्य दादाजी को स्वर्ग में देखा। वे प्रसन्न दिखे, पर हाय, अच्छी बातचीत के लिए तरसते हैं! काश आप किसी सचमुच बुद्धिमान व्यक्ति को स्वर्ग भेज पाते जो उनका मन बहलाए और उनका समाचार ले आए।” अकबर चौंके, “स्वर्ग में आदमी भेजें? कैसे?” नाई ने चिकनी ज़बान में समझाया, “मेरे पुरोहित एक प्राचीन विधि जानते हैं, हुज़ूर। बुद्धिमान व्यक्ति को चंदन की चिता पर बैठना होगा। पवित्र अग्नि जलेगी, मंत्र गूँजेंगे, और उसकी आत्मा धुएँ पर सवार होकर सीधी स्वर्ग पहुँच जाएगी। और पूरी सल्तनत में बीरबल साहब से बुद्धिमान कौन है?”
जाल बिलकुल कसा हुआ था। दादाजी का समाचार पाने के विचार से मोहित बादशाह ने बीरबल से यह यात्रा करने को कहा। बीरबल ने चारों ओर ईर्ष्या भरी मुस्कानें देखीं और सब समझ गए। “सहर्ष, जहाँपनाह,” उन्होंने शांत स्वर में कहा। “बस दो छोटी विनती हैं — चिता की जगह मुझे अपने घर के पास चुनने दीजिए, और पूजा-पाठ व तैयारी के लिए दस दिन दीजिए।”
उन दस दिनों में बीरबल के विश्वासपात्र सेवकों ने चुपचाप उस जगह से उनके घर के एक कमरे तक सुरंग खोद डाली। नियत दिन बड़े समारोह से चिता जलाई गई। चंदन के गाढ़े धुएँ की आड़ में बीरबल एक गुप्त ढक्कन से सुरंग में उतर गए और कई सप्ताह घर में छिपे रहे — बाल और दाढ़ी बढ़ाते हुए, जंगली साधुओं जैसे।
महीनों बाद बीरबल दरबार में प्रकट हुए — पहाड़ी साधु जैसे झबरे। “आपके दादाजी ने आशीर्वाद भेजा है, हुज़ूर!” उन्होंने घोषणा की। “स्वर्ग अद्भुत है — बस एक ही कमी है। पूरे स्वर्ग में एक भी नाई नहीं है! देखिए, कुछ ही महीनों में मेरे बाल क्या हो गए। दादाजी ने विनती की है कि आप अपने बेहतरीन शाही नाई को तुरंत उसी अग्नि-मार्ग से उनके पास भेज दें।”
नाई का चेहरा दूध जैसा सफ़ेद पड़ गया और वह अकबर के क़दमों में गिरकर सारी साज़िश उगल बैठा। षड्यंत्रकारी दरबारियों को दंड मिला, और अकबर हँसते हुए चकित होते रहे कि बीरबल जाल से कैसे निकले — एक सुरंग के रास्ते, 'स्वर्ग' तक जाकर वापस।