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राज्य के अंधे

अकबर-बीरबल लोककथा

पात्र: बादशाह अकबर · चतुर मंत्री बीरबल · दो शाही मुंशी · बाज़ार के लोग

एक दोपहर दरबार में राज्य की प्रजा की बातें चल रही थीं। “हमारे राज्य में कितने अंधे होंगे?” अकबर ने पूछा। किसी दरबारी ने कहा कुछ सौ, किसी ने कहा हज़ार। तभी बीरबल बोले, “जहाँपनाह, हमारे राज्य में देखने वालों से कहीं ज़्यादा अंधे हैं।”

दरबार में हँसी गूँज उठी। “असंभव!” अकबर बोले। “चारों ओर देखो — लगभग सबकी आँखें बिलकुल ठीक हैं!” बीरबल ने बस झुककर कहा, “मुझे तीन दिन दीजिए, हुज़ूर। मैं लिखित सूची के साथ प्रमाण लाऊँगा।”

अगली सुबह बीरबल ने बड़ी अजीब बात की। वे एक पुरानी खाट और रस्सी का गट्ठर लेकर आगरा के सबसे भीड़भाड़ वाले बाज़ार के बीचोंबीच बैठ गए और खाट बुनने लगे। उनके पास काग़ज़-क़लम-दवात लिए दो शाही मुंशी बैठे। एक के काग़ज़ पर लिखा था 'अंधे', दूसरे के काग़ज़ पर 'देखने वाले'।

एक सब्ज़ीवाला गुज़रा। “अरे बीरबल साहब! यह क्या कर रहे हैं?” बीरबल कुछ नहीं बोले — बस पहले मुंशी को इशारा किया, और उसका नाम अंधों की सूची में लिख लिया गया। एक सिपाही रुका, “मंत्री जी, क्या कर रहे हैं?” उसका नाम भी अंधों की सूची में चढ़ गया। दिनभर लोग साफ़-साफ़ देखते रहे कि बीरबल खाट बुन रहे हैं, फिर भी पूछते रहे, “क्या कर रहे हैं?” अंधों की सूची में नाम पर नाम जुड़ते गए। बस इक्का-दुक्का लोगों ने कहा, “वाह, बीरबल जी खाट बुन रहे हैं!” — उनके नाम देखने वालों की छोटी-सी सूची में लिखे गए।

तीसरे दिन ख़बर महल तक पहुँची और अकबर खुद बाज़ार आ पहुँचे। रस्सियाँ कसते बीरबल को देखकर वे हँसते हुए बोले, “बीरबल, आख़िर यह क्या कर रहे हो?”

बीरबल ने गंभीरता से सिर हिलाया, और मुंशी ने अंधों की सूची में सबसे ऊपर लिखा — 'बादशाह अकबर'।

फिर बीरबल उठे और दोनों सूचियाँ पेश कीं। अंधों की सूची कई पन्नों लंबी थी; देखने वालों की सूची में मुश्किल से मुट्ठीभर नाम थे। “हुज़ूर,” उन्होंने विनम्रता से कहा, “सबने मुझे खाट बुनते देखा, फिर भी लगभग सबने पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ। जो आँखें रखकर भी उनसे काम नहीं लेते, क्या वे अंधे नहीं?” अकबर इतना हँसे कि ताज हिल गया, और उन्होंने मान लिया कि बीरबल फिर जीत गए।

शिक्षा (Moral)

आँखें होना और आँखों से काम लेना दो अलग बातें हैं — पूछने से पहले देखो और सोचो।

राज्य के अंधे कहानी की शिक्षा क्या है?

आँखें होना और आँखों से काम लेना दो अलग बातें हैं — पूछने से पहले देखो और सोचो।

यह कहानी किस ग्रंथ से है?

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