स्वामिये शरणम् अय्यप्पा — Word-by-Word Meaning
स्वामिये शरणम् अय्यप्पा
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
स्वामिये
Swamiye
हे स्वामी — अय्यप्पा
शरणम्
Saranam
मैं शरण लेता हूँ / मैं समर्पण करता हूँ
अय्यप्पा
Ayyappa
भगवान अय्यप्पा, शबरिमला के देव
हरिहरसुतने
Harihara Suthane
हे हरि (विष्णु) और हर (शिव) के पुत्र
कन्निमूल गणपति भगवाने
Kannimoola Ganapathi Bhagavane
हे पवित्र कोने के भगवान गणपति (शबरिमला में सर्वप्रथम पूजित)
शक्तिवडिवेल मुरुगने
Sakthi Vadivela Murugane
हे प्रबल वेल (भाला) धारण करने वाले मुरुगन
मालिकैप्पुरत्तु मञ्जमातावे
Malikaippurathu Manjamathave
हे मालिकप्पुरम् में विराजमान मञ्जु माता
पम्पावासने
Pampavasane
हे पवित्र पम्पा नदी के तट पर निवास करने वाले स्वामी
Complete Translation
हे स्वामी अय्यप्पा, मैं आपकी शरण लेता हूँ; हे हरि-हर के पुत्र, मैं शरण लेता हूँ; हे कन्निमूल गणपति, हे शक्तिवेलधारी मुरुगन, हे मालिकैप्पुरम् की माता, हे पम्पा-तट के स्वामी — अय्यप्पा, मैं आपकी शरण लेता हूँ।
यह 'शरणम् घोष' है — वह समर्पण-उद्घोष जिससे अय्यप्पा-यात्री अपनी यात्रा के हर पग पर भगवान और उनके आस-पास के देवताओं का नाम लेते हैं।
Origin & History
Source: Traditional Ayyappa Saranam Ghosha (surrender chant of Sabarimala pilgrims)
Author: Traditional
Period: Traditional
अय्यप्पा के भक्त सबरीमला के वन-मंदिर तक चलकर जाने से पहले 41 दिन का कठोर व्रत धारण करते हैं। इस यात्रा के हर पग पर वे शरणम् घोष उठाते हैं — 'स्वामिये शरणम् अय्यप्पा' — भगवान के प्रति समर्पण करते हुए और उनकी पहाड़ी की रक्षा करने वाले देवताओं को नमन करते हुए। यह घोष एक कठिन तीर्थयात्रा को निरंतर प्रार्थना में बदल देता है, और अपरिचितों को 'स्वामी' के रूप में एक-दूसरे से तथा अय्यप्पा से जोड़ देता है।
Frequently Asked Questions
'स्वामिये शरणम् अय्यप्पा' का क्या अर्थ है?▼
'हे स्वामी, मैं आपकी शरण लेता हूँ, अय्यप्पा।' यह भगवान अय्यप्पा के प्रति पूर्ण समर्पण (शरणागति) का भाव है, और उनके भक्तों की केन्द्रीय पुकार है।
भक्त शरणम् घोष कब बोलते हैं?▼
41 दिन के व्रत और सबरीमला की यात्रा के दौरान निरंतर — चलते हुए, अठारह सीढ़ियाँ चढ़ते हुए और पूजा के समय। यह निरंतर पुकार कठिन यात्रा भर यात्री के मन को भगवान में स्थिर रखती है।
इस घोष में अन्य देवताओं के नाम क्यों लिए जाते हैं?▼
शरणम् घोष सबरीमला-परंपरा के उन देवताओं को नमन करता है जो अय्यप्पा के साथ विराजते हैं — गणपति, मुरुगन, मालिकैप्पुरम् की माता और अन्य — इस प्रकार यात्रा के समस्त पवित्र क्षेत्र का सम्मान करता है, और हर पंक्ति 'शरणम् अय्यप्पा' पर समाप्त होती है।
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