स्वामिये शरणम् अय्यप्पा
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✦ अर्थ
'स्वामिये शरणम् अय्यप्पा' सबरीमला के भगवान अय्यप्पा का शरणम् घोष है — पूर्ण समर्पण की पुकार। प्रत्येक पंक्ति अय्यप्पा-परंपरा के किसी देवता को नमन करती है और 'शरणम् अय्यप्पा' पर समाप्त होती है। यह भक्त के भीतर पूर्ण शरणागति का भाव जगाता है और भय तथा अहंकार को मिटाता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Ayyappa Saranam Ghosha (surrender chant of Sabarimala pilgrims) · Traditional · Traditional
अय्यप्पा के भक्त सबरीमला के वन-मंदिर तक चलकर जाने से पहले 41 दिन का कठोर व्रत धारण करते हैं। इस यात्रा के हर पग पर वे शरणम् घोष उठाते हैं — 'स्वामिये शरणम् अय्यप्पा' — भगवान के प्रति समर्पण करते हुए और उनकी पहाड़ी की रक्षा करने वाले देवताओं को नमन करते हुए। यह घोष एक कठिन तीर्थयात्रा को निरंतर प्रार्थना में बदल देता है, और अपरिचितों को 'स्वामी' के रूप में एक-दूसरे से तथा अय्यप्पा से जोड़ देता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
यात्री कहते हैं कि जब उनकी अपनी शक्ति समाप्त हो जाती है तब शरणम् घोष उन्हें पर्वत पर चढ़ा ले जाता है — 'शरणम् अय्यप्पा' की स्थिर पुकार थकान, भय और 'मैं' के भाव को मिटा देती है, और केवल समर्पण शेष रह जाता है। इससे उत्पन्न समानता को स्वयं एक कृपा माना जाता है: सबरीमला के मार्ग पर हर भक्त, चाहे उसकी कोई भी स्थिति हो, बस एक 'स्वामी' है जो भगवान का नाम पुकार रहा है।
मंत्र
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स्वामिये शरणम् अय्यप्पा। हरिहरसुतने शरणम् अय्यप्पा। कन्निमूल गणपति भगवाने शरणम् अय्यप्पा। शक्तिवडिवेल मुरुगने शरणम् अय्यप्पा। मालिकैप्पुरत्तु मञ्जमातावे शरणम् अय्यप्पा। पम्पावासने शरणम् अय्यप्पा॥
Swamiye Saranam Ayyappa Harihara Suthane Saranam Ayyappa Kannimoola Ganapathi Bhagavane Saranam Ayyappa Sakthi Vadivela Murugane Saranam Ayyappa Malikaippurathu Manjamathave Saranam Ayyappa Pampavasane Saranam Ayyappa
अर्थ:हे स्वामी अय्यप्पा, मैं आपकी शरण लेता हूँ; हे हरि-हर के पुत्र, मैं शरण लेता हूँ; हे कन्निमूल गणपति, हे शक्तिवेलधारी मुरुगन, हे मालिकैप्पुरम् की माता, हे पम्पा-तट के स्वामी — अय्यप्पा, मैं आपकी शरण लेता हूँ।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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स्वामिये शरणम् अय्यप्पा पाठ के लाभ
शरणम् घोष — हर अय्यप्पा-यात्री की समर्पण-पुकार
41 दिन के व्रत और सबरीमला की यात्रा भर निरंतर दोहराया जाता है
हर पंक्ति सबरीमला-परंपरा के किसी देवता को नमन करती है, और 'शरणम् अय्यप्पा' पर समाप्त होती है
पूर्ण समर्पण (शरणागति) का भाव जगाता है और भय व अहंकार को मिटाता है
सरल आह्वान-प्रत्युत्तर जो समस्त यात्री-समूह को एक स्वर में बाँध देता है
स्वामिये शरणम् अय्यप्पा जप विधि
इसे आह्वान-प्रत्युत्तर के रूप में बोलें: एक नायक 'स्वामिये' पुकारता है और समूह 'शरणम् अय्यप्पा' उत्तर देता है। यात्री इसे चलते हुए, चढ़ते हुए और पूजा के समय दोहराते हैं — स्थिर लय शरीर और मन दोनों को समर्पण में बहा ले जाती है। इसे किसी विधि की आवश्यकता नहीं और कहीं भी बोला जा सकता है।