हरिवरासनम्
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✦ अर्थ
हरिवरासनम् भगवान अय्यप्पा — हरि (विष्णु) व हर (शिव) के पुत्र — की शरण में आठ श्लोकों की प्रार्थना है। प्रत्येक श्लोक 'हरिहरात्मजं देवमाश्रये' — 'मैं उस देव की शरण लेता हूँ' पर समाप्त होता है। यह शबरीमला में रात्रि को मन्दिर के द्वार बन्द होते समय गाया जाने वाला 'उराक्क पाट्टु' (शयन-गीत) है।
उत्पत्ति और कथा
Devotional Sanskrit stotra to Lord Ayyappa; sung as the nightly closing prayer at Sabarimala · Attributed to Kambakudi Kulathur Srinivasa Iyer · Traditional; popularised in the 20th century
अय्यप्पा हरिहरात्मज हैं, जो विष्णु (मोहिनी रूप में) व शिव के मिलन से जन्मे — हिन्दू भक्ति की दो महान धाराओं को जोड़ते हुए। हरिवरासनम् शबरीमला में 'उराक्क पाट्टु' के रूप में गाया जाता है, वह लोरी जो प्रभु को शयन कराती है: जैसे ही अन्तिम श्लोक मन्द होता है, गर्भगृह का दीप धीमा कर दिया जाता है और रात्रि के लिए द्वार बन्द कर दिए जाते हैं। के. जे. येसुदास के स्वर द्वारा संसार भर में पहुँचकर यह प्रत्येक अय्यप्पा भक्त की प्रतीक-प्रार्थना बन गया है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
जो तीर्थयात्री कठिन ४१ दिन का व्रत पूरा करके शबरीमला पर चढ़ते हैं, वे रात्रि के हरिवरासनम् को सबसे मार्मिक क्षण बताते हैं — समूचा पर्वत मौन हो जाता है, और यह कोमल स्तोत्र सहस्रों लोगों को प्रभु के चरणों में एक साझा समर्पण में ले जाता है। भक्त कहते हैं कि इस प्रार्थना से दिन समाप्त करने पर गहरी, निश्चिन्त निद्रा मिलती है और अय्यप्पा की देखरेख में होने का भाव जागता है।
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हरिवरासनं विश्वमोहनं हरिदधीश्वरं आराध्यपादुकम्। अरिविमर्दनं नित्यनर्तनं हरिहरात्मजं देवमाश्रये॥
Harivarasanam Vishwamohanam Haridadhishwaram Aradhyapadukam Arivimardanam Nityanartanam Hariharatmajam Devamashraye
अर्थ:मैं हरिहरात्मज (अय्यप्पा) की शरण लेता हूँ — जो हरि के श्रेष्ठ आसन पर विराजमान, विश्व को मोहित करने वाले, पूज्य चरण-पादुका वाले, शत्रुओं का नाश करने वाले और नित्य नर्तन करने वाले हैं।
शरणकीर्तनं शक्तमानसं भजनमानसं नर्तनालसम्। अरुणभासुरं भूतनायकं हरिहरात्मजं देवमाश्रये॥
Sharanakirtanam Shaktamanasam Bhajanamanasam Nartanalasam Arunabhasuram Bhutanayakam Hariharatmajam Devamashraye
अर्थ:भक्तों के 'शरणम्' कीर्तन से स्तुत, भक्तों के मन में बसे, अरुण-सी आभा वाले, समस्त भूतों के नायक — उन देव की मैं शरण लेता हूँ।
प्रणयसत्यकं प्राणनायकं प्रणतकल्पकं सुप्रभाञ्चितम्। प्रणवमन्दिरं कीर्तनप्रियं हरिहरात्मजं देवमाश्रये॥
Pranayasatyakam Prananayakam Pranatakalpakam Suprabhanchitam Pranavamandiram Kirtanapriyam Hariharatmajam Devamashraye
अर्थ:सच्चे प्रेम वाले, प्राणों के नायक, प्रणाम करने वालों की कामना पूर्ण करने वाले, ओंकार में निवास करने वाले, कीर्तनप्रिय — उन देव की मैं शरण लेता हूँ।
तुरगवाहनं सुन्दराननं वरगदायुधं देववर्णितम्। गुरुकृपाकरं कीर्तनप्रियं हरिहरात्मजं देवमाश्रये॥
Turagavahanam Sundarananam Varagadayudham Devavarnitam Gurukripakaram Kirtanapriyam Hariharatmajam Devamashraye
अर्थ:यह स्तोत्र हरिहरात्मज अय्यप्पा की महिमा का गान है, जिसकी आठ पंक्तियाँ 'हरिहरात्मजं देवमाश्रये' पर समाप्त होती हैं — 'मैं उस देव की शरण लेता हूँ।'
त्रिभुवनार्चितं देवतात्मकं त्रिनयनं प्रभुं दिव्यदेशिकम्। त्रिदशपूजितं चिन्तितप्रदं हरिहरात्मजं देवमाश्रये॥
Tribhuvanarchitam Devatatmakam Trinayanam Prabhum Divyadeshikam Tridashapujitam Chintitapradam Hariharatmajam Devamashraye
भवभयापहं भावुकावहं भुवनमोहनं भूतिभूषणम्। धवलवाहनं दिव्यवारणं हरिहरात्मजं देवमाश्रये॥
Bhavabhayapaham Bhavukavaham Bhuvanamohanam Bhutibhushanam Dhavalavahanam Divyavaranam Hariharatmajam Devamashraye
कलमृदुस्मितं सुन्दराननं कलभकोमलं गात्रमोहनम्। कलभकेसरी वाजिवाहनं हरिहरात्मजं देवमाश्रये॥
Kalamridusmitam Sundarananam Kalabhakomalam Gatramohanam Kalabhakesari Vajivahanam Hariharatmajam Devamashraye
श्रितजनप्रियं चिन्तितप्रदं श्रुतिविभूषणं साधुजीवनम्। श्रुतिमनोहरं गीतलालसं हरिहरात्मजं देवमाश्रये॥
Shritajanapriyam Chintitapradam Shrutivibhushanam Sadhujivanam Shrutimanoharam Gitalalasam Hariharatmajam Devamashraye
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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हरिवरासनम् पाठ के लाभ
'उराक्क पाट्टु' (शयन-गीत) — जो प्रतिदिन रात्रि को शबरीमला के द्वार बन्द होते समय गाया जाता है।
हरि (विष्णु) व हर (शिव) के पुत्र भगवान अय्यप्पा की आठ श्लोकों की शरणागति प्रार्थना।
प्रत्येक श्लोक 'हरिहरात्मजं देवमाश्रये' — 'मैं उस देव की शरण लेता हूँ' पर समाप्त होता है।
मधुर व धीमा — दिन को समर्पण के साथ समाप्त करने के लिए एक उत्तम रात्रि-प्रार्थना।
के. जे. येसुदास के स्वर में अमर, सर्वत्र अय्यप्पा मन्दिरों में सुनी जाती है।
हरिवरासनम् जप विधि
इसे धीरे व कोमलता से गाएँ, समर्पण की लोरी की भाँति, प्रत्येक श्लोक को 'हरिहरात्मजं देवमाश्रये' पर समाप्त होने दें। यह शबरीमला में दिन की अन्तिम प्रार्थना है, जो गर्भगृह का दीप मन्द होते और प्रभु को शयन कराते समय गाई जाती है — इसी प्रकार इसे शयन से पूर्व अन्तिम कर्म के रूप में गाएँ।