श्रीमद्भगवद्गीता १.२९ — सीदन्ति मम गात्राणि — Word-by-Word Meaning
श्रीमद्भगवद्गीता १.२९ — सीदन्ति मम गात्राणि
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
सीदन्ति
sīdanti
शिथिल हो रहे हैं; कमज़ोर पड़ रहे हैं
मम
mama
मेरे
गात्राणि
gātrāṇi
शरीर के अंग
मुखम्
mukham
मुख
च
cha
और
परिशुष्यति
pariśhuṣhyati
सूख रहा है
वेपथुः
vepathuḥ
कम्पन; कँपकँपी
च
cha
और
शरीरे
śharīre
शरीर पर
मे
me
मेरे
रोमहर्षः
roma-harṣhaḥ
रोमांच (रोएँ खड़े होना)
च
cha
भी
जायते
jāyate
हो रहा है; उत्पन्न हो रहा है
Complete Translation
मेरे अंग शिथिल हुए जा रहे हैं और मुख सूख रहा है; मेरे शरीर में कम्प तथा रोमांच हो रहा है।
Origin & History
Source: Bhagavad Gita Chapter 1, Verse 29
Author: Sage Veda Vyasa (Mahabharata, Bhishma Parva)
Period: Ancient (text compiled c. 5th–2nd century BCE)
श्रीकृष्ण से अपने रथ को दोनों सेनाओं के बीच खड़ा करने को कहकर अर्जुन दोनों ओर युद्ध के लिए सज्जित पिताओं, पितामहों, गुरुओं, चाचाओं, भाइयों एवं मित्रों को देखते हैं। करुणा एवं शोक से अभिभूत होकर वे अपने शरीर के कम्पन एवं बल के क्षीण होने का वर्णन करते हैं। संजय द्वारा धृतराष्ट्र को सुनाया गया यह विषाद ही श्रीकृष्ण के उपदेश का आरम्भ-बिन्दु बनता है।
Frequently Asked Questions
भगवद्गीता १.२९ में क्या वर्णन है?▼
इसमें युद्धभूमि पर खड़े अर्जुन के शोक के शारीरिक लक्षणों का वर्णन है: उनके अंग कमज़ोर पड़ जाते हैं, मुख सूख जाता है, शरीर काँपने लगता है और रोमांच हो जाता है। अपने ही स्वजनों एवं गुरुजनों से युद्ध करने के विचार से वे विह्वल हो जाते हैं।
गीता में अर्जुन का विषाद क्यों महत्त्वपूर्ण है?▼
अर्जुन का यह टूटना, जिसे 'विषाद' कहते हैं, सम्पूर्ण भगवद्गीता का निमित्त है। उनके शोक एवं भ्रम के कारण वे श्रीकृष्ण की शरण लेकर मार्गदर्शन माँगते हैं, जिसका उत्तर श्रीकृष्ण कर्तव्य, आत्मा एवं भक्ति के कालजयी उपदेश से देते हैं।
इस श्लोक से भक्त क्या सीख सकता है?▼
यह सिखाता है कि अभिभूत, भयभीत या शोकग्रस्त होना मनुष्य होने का अंग है, महान वीर के लिए भी। बुद्धिमानी का उत्तर इसे छिपाना नहीं, बल्कि अर्जुन की भाँति इसे सच्चाई से प्रभु के समक्ष रखना है, जिससे हृदय दिव्य ज्ञान ग्रहण करने के लिए खुल जाता है।
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