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भगवती दुर्गा दुर्गार्तिनाशिनी (निशुम्भ-वध) — Word-by-Word Meaning

भगवती दुर्गा दुर्गार्तिनाशिनी (निशुम्भ-वध)

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

ततः भगवती क्रुद्धा
tataḥ bhagavatī kruddhā
तब भगवती (देवी) क्रुद्ध होकर
दुर्गा
durgā
दुर्गा (अगम्य, अजेय देवी)
दुर्गार्तिनाशिनी
durga-ārti-nāśinī
क्लेश और दुस्तर बाधाओं का नाश करने वाली
चिच्छेद देवी चक्राणि
ciccheda devī cakrāṇi
देवी ने उन चक्रों को काट डाला
स्वशरैः सायकान् च तान्
sva-śaraiḥ sāyakān ca tān
और उन बाणों को, अपने बाणों से
शूलहस्तं समायान्तम्
śūla-hastaṃ samāyāntam
हाथ में शूल लिए आगे आते हुए
निशुम्भम् अमरार्दनम्
niśumbham amar-ārdanam
निशुम्भ को, देवताओं (अमरों) को पीड़ा देने वाले
हृदि विव्याध शूलेन
hṛdi vivyādha śūlena
अपने शूल से उसके हृदय को बेध दिया
वेगाविद्धेन चण्डिका
vegāviddhena caṇḍikā
वेग से फेंके गए शूल से, चण्डिका ने (ऐसा किया)
भिन्नस्य तस्य शूलेन हृदयात्
bhinnasya tasya śūlena hṛdayāt
शूल से बिंधे उसके हृदय से
निःसृतः अपरः
niḥsṛtaḥ aparaḥ
एक और प्राणी निकला
तिष्ठ इति पुरुषः वदन्
tiṣṭha iti puruṣaḥ vadan
'ठहर!' कहता हुआ एक पुरुष
देवी प्रहस्य शिरः चिच्छेद खड्गेन
devī prahasya śiraḥ ciccheda khaḍgena
देवी ने अट्टहास करके खड्ग से उसका सिर काट दिया
ततः असौ अपतत् भुवि
tataḥ asau apatat bhuvi
तब वह भूमि पर गिर पड़ा

Complete Translation

तब क्रुद्ध भगवती दुर्गा, दुर्गति और दुस्तर पीड़ाओं का नाश करने वाली, ने अपने बाणों से उन चक्रों और बाणों को काट डाला। पीड़ा देने वाला निशुम्भ जब हाथ में शूल लिए आगे बढ़ा, तब चण्डिका ने वेग से फेंके गए शूल से उसके हृदय को बेध दिया। शूल से बिंधे उसके हृदय से एक और महाबली, महापराक्रमी पुरुष 'ठहर!' कहता हुआ निकला। उसके निकलते ही देवी ने अट्टहास करके खड्ग से उसका सिर काट डाला; तब वह भूमि पर गिर पड़ा।

Origin & History

Source: Durga Saptashati Chapter 9

Author: Sage Markandeya (Markandeya Purana)

Period: c. 400–600 CE (Markandeya Purana)

रक्तबीज के वध के पश्चात्, दैत्य-बन्धु शुम्भ और निशुम्भ अपार क्रोध से भरकर एक साथ देवी पर टूट पड़े। उस घोर द्वन्द्व में निशुम्भ ने बार-बार खड्ग, भाला, शूल और गदा से चण्डिका पर प्रहार किया, जिन्हें देवी ने एक-एक करके चूर कर दिया। अन्ततः उन्होंने अपने शूल से उसका हृदय बेध दिया, उससे निकले दूसरे योद्धा का सिर काटा, और निशुम्भ को धराशायी कर दिया, जिससे शुम्भ अकेला उनके सामने रह गया।

Frequently Asked Questions

'दुर्गार्तिनाशिनी' का क्या अर्थ है?
दुर्गार्तिनाशिनी का अर्थ है 'दुर्ग-आर्ति का नाश करने वाली' — अर्थात् क्लेश, पीड़ा और उन संकटों को हरने वाली जिन्हें पार करना कठिन है (दुर्ग का अर्थ 'दुस्तर' तथा देवी का एक नाम — दोनों है)। यह सप्तशती में देवी के सर्वाधिक प्रिय विशेषणों में से एक है।
जब चण्डिका निशुम्भ पर प्रहार करती हैं तब क्या होता है?
चण्डिका वेग से अपना शूल निशुम्भ के हृदय में मारती हैं। बिंधे हृदय से एक दूसरा महाबली योद्धा 'ठहर!' कहता हुआ निकलता है — परन्तु देवी अट्टहास करके खड्ग से उसका सिर काट देती हैं, और निशुम्भ का पूर्ण अन्त कर देती हैं।
यह दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय से है?
ये दुर्गा सप्तशती के नवम अध्याय (निशुम्भ-वध) के २९ तथा ३२ से ३४ श्लोक हैं, जो देवी महासरस्वती द्वारा अधिष्ठित उत्तम चरित का अंश है।

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