भूत पिशाच निकट नहिं आवै — Word-by-Word Meaning
भूत पिशाच निकट नहिं आवै
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
भूत
bhoot
भूत, प्रेत
पिशाच
pishach
पिशाच, दुष्ट आत्माएँ (पिशाच)
निकट
nikat
निकट, पास
नहिं
nahi
नहीं, कभी नहीं
आवै
aavai
आते हैं, समीप आते हैं
महाबीर
Mahabir
महाबीर — महान वीर, अर्थात् हनुमान
जब
jab
जब
नाम
nam
नाम (हनुमान का)
सुनावै
sunavai
सुनाया जाता है / उच्चारित किया जाता है
Complete Translation
जब महाबीर (हनुमान) का नाम सुनाया जाता है, तब भूत-पिशाच निकट भी नहीं आते॥
Origin & History
Source: Hanuman Chalisa (chaupai)
Author: Tulsidas
Period: 16th century CE
हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास हनुमान की रक्षक कृपा को अनेक चौपाइयों में वर्णित करते हैं। यह चौपाई उनकी एक सर्वाधिक प्रसिद्ध शक्ति की घोषणा करती है — कि महाबीर के नाम का मात्र उच्चारण भूतों और आसुरी पिशाचों को बिखेर देता है, जिससे वे भक्त के निकट नहीं आ सकते। यह सम्पूर्ण हिन्दू जगत् में आवाहित की जाने वाली रक्षा की सर्वप्रमुख पंक्ति बन गई है।
Frequently Asked Questions
'भूत पिशाच निकट नहिं आवै' का क्या अर्थ है?▼
इसका अर्थ है 'भूत और दुष्ट आत्माएँ निकट नहीं आतीं।' पूरी पंक्ति कहती है कि जब महाबीर (हनुमान) का नाम सुनाया जाता है, तब भूत और पिशाच समीप नहीं आ सकते — रक्षा का एक सशक्त आश्वासन।
यह पद दुष्ट आत्माओं से रक्षा के लिए क्यों पढ़ा जाता है?▼
हनुमान समस्त नकारात्मक एवं आसुरी शक्तियों को दूर करने वाले सर्वोच्च रक्षक माने जाते हैं। यह चौपाई स्पष्ट कहती है कि उनके नाम का मात्र उच्चारण ही भूत और दुष्ट आत्माओं को भगा देता है, इसलिए स्वयं, परिवार और घर की रक्षा के लिए इसका पाठ किया जाता है।
इस पंक्ति का पाठ करने का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?▼
इसका पाठ प्रायः रात्रि में सोने से पूर्व, सन्ध्या समय, अथवा जब भय अनुभव हो या नकारात्मक ऊर्जा का आभास हो — जैसे एकान्त, अन्धकारमय या अपरिचित स्थानों में — किया जाता है। बहुत-से माता-पिता बालकों को अन्धकार का भय दूर करने के लिए यह सिखाते हैं।
मुझे इसे कितनी बार दोहराना चाहिए?▼
कोई निश्चित नियम नहीं है, परन्तु भक्त सामान्यतः इसे श्रद्धापूर्वक 11, 21 या 108 बार दोहराते हैं। महाबीर के नाम का एक भी सच्चा उच्चारण भी दुष्ट आत्माओं को दूर रखने वाला माना जाता है।
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