भूत पिशाच निकट नहिं आवै
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✦ अर्थ
हनुमान चालीसा की यह प्रसिद्ध चौपाई अदृश्य एवं दुष्ट शक्तियों से रक्षा का सर्वप्रमुख पद है। तुलसीदासजी कहते हैं कि जैसे ही महाबीर हनुमान का नाम सुनाया जाता है, भूत और पिशाच भाग जाते हैं और निकट नहीं आ सकते। घर की रक्षा के लिए, अन्धकार एवं अलौकिक भय को दूर करने के लिए यह सर्वाधिक पठित पंक्तियों में से एक है और परम्परा से रात्रि में तथा एकान्त स्थानों में रक्षा हेतु इसका पाठ किया जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Hanuman Chalisa (chaupai) · Tulsidas · 16th century CE
हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास हनुमान की रक्षक कृपा को अनेक चौपाइयों में वर्णित करते हैं। यह चौपाई उनकी एक सर्वाधिक प्रसिद्ध शक्ति की घोषणा करती है — कि महाबीर के नाम का मात्र उच्चारण भूतों और आसुरी पिशाचों को बिखेर देता है, जिससे वे भक्त के निकट नहीं आ सकते। यह सम्पूर्ण हिन्दू जगत् में आवाहित की जाने वाली रक्षा की सर्वप्रमुख पंक्ति बन गई है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
असंख्य भक्त बताते हैं कि भय की रातों में अथवा भुतहा कहे जाने वाले स्थानों में इस पद का पाठ करने पर वह दमनकारी उपस्थिति सहसा हट गई; लोक-परम्परा में महाबीर का नाम एक अमोघ कवच माना जाता है, जिसके सम्मुख कोई भूत या पिशाच टिक नहीं सकता।
मंत्र
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भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥
Bhoot Pishach Nikat Nahi Aavai. Mahabir Jab Nam Sunavai.
अर्थ:जब महाबीर (हनुमान) का नाम सुनाया जाता है, तब भूत-पिशाच निकट भी नहीं आते॥
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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भूत पिशाच निकट नहिं आवै पाठ के लाभ
भूत, पिशाच और नकारात्मक अलौकिक शक्तियों (भूत-पिशाच) से रक्षा करती है।
अन्धकार, एकान्त स्थानों और रात्रि के भय को दूर करती है।
परम्परा से घर की रक्षा करने और एक रक्षा-कवच बनाने के लिए इसका पाठ किया जाता है।
बालकों और भयभीत व्यक्तियों को साहस और सुरक्षा का भाव देती है।
ऐसा माना जाता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों को दूर करती है।
महाबीर हनुमान के नाम का ही आवाहन करती एक प्रत्यक्ष, शक्तिशाली शरण-पंक्ति।
भूत पिशाच निकट नहिं आवै जप विधि
इस चौपाई का रक्षा के लिए 11, 21 अथवा 108 बार पाठ करें, महाबीर हनुमान के नाम का पूर्ण श्रद्धा से उच्चारण करते हुए। विशेषकर रात्रि में, सोने से पूर्व, अथवा एकान्त या भयप्रद स्थानों से गुजरते समय इसका पाठ किया जाता है। माता-पिता परम्परा से बालकों से इसे दोहरवाते हैं ताकि अन्धकार का भय दूर हो। आप इसे हनुमान को रक्षक रूप में खड़े देखते हुए भी पढ़ सकते हैं, और घर की रक्षा हेतु सम्पूर्ण हनुमान चालीसा पढ़ते समय इसे प्रायः सम्मिलित किया जाता है।
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