बोधोऽन्यसाधनेभ्यो हि (आत्मबोध २) — Word-by-Word Meaning
बोधोऽन्यसाधनेभ्यो हि (आत्मबोध २)
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
बोधः
bodhaḥ
ज्ञान, आध्यात्मिक जागरण, आत्मा का प्रत्यक्ष बोध
अन्य-साधनेभ्यः
anya-sādhanebhyaḥ
अन्य साधनों की अपेक्षा (जैसे कर्म, दान, तप)
हि
hi
निश्चय ही, अवश्य
साक्षात्
sākṣāt
साक्षात्, प्रत्यक्ष रूप से
मोक्ष-एक-साधनम्
mokṣa-eka-sādhanam
मोक्ष का एकमात्र / प्रत्यक्ष साधन
पाकस्य
pākasya
पकाने का, पाक-कर्म के लिए
वह्निवत्
vahnivat
अग्नि के समान
ज्ञानम्
jñānam
ज्ञान (आत्मा / ब्रह्म का)
विना
vinā
के बिना
मोक्षः
mokṣaḥ
मोक्ष, अन्तिम मुक्ति
न सिध्यति
na sidhyati
सिद्ध नहीं होता, प्राप्त नहीं हो सकता
Complete Translation
अन्य समस्त साधनों की अपेक्षा ज्ञान ही साक्षात् मोक्ष का एकमात्र साधन है। जैसे अग्नि के बिना भोजन पकाना सम्भव नहीं, वैसे ही ज्ञान के बिना मोक्ष सिद्ध नहीं होता।
Origin & History
Source: Atma Bodha (Self-Knowledge), Verse 2
Author: Adi Shankaracharya
Period: c. 8th century CE
आत्मबोध अद्वैत वेदान्त का एक संक्षिप्त प्रवेश-ग्रन्थ है, जिसे आदि शंकराचार्य ने उन सच्चे साधकों के लिए रचा जिन्होंने अपने चित्त को शुद्ध कर लिया है और मोक्ष के लिए लालायित हैं। प्रथम श्लोक यह बताने के पश्चात् कि यह ग्रन्थ किसके लिए है, यह द्वितीय श्लोक इसकी आधारशिला रखता है — कि समस्त साधनों में आत्मज्ञान ही प्रत्यक्ष रूप से मोक्ष प्रदान करता है — और यही विषय शेष ग्रन्थ क्रमशः खोलता है।
Frequently Asked Questions
यह श्लोक किस ग्रन्थ से है?▼
यह 'आत्मबोध' (आत्मज्ञान) का द्वितीय श्लोक है, जो आदि शंकराचार्य कृत 68 श्लोकों की एक संक्षिप्त एवं प्रिय अद्वैत वेदान्त प्रवेशिका है।
क्या यह श्लोक कर्मकाण्ड और सत्कर्मों को पूर्णतः अस्वीकार करता है?▼
नहीं। शंकराचार्य सिखाते हैं कि कर्म, दान और तप मूल्यवान हैं क्योंकि वे चित्त को शुद्ध करके उसे ज्ञान के योग्य बनाते हैं। परन्तु वे स्वयं अज्ञान को दूर नहीं कर सकते, जो बन्धन का वास्तविक कारण है। केवल ज्ञान ही अज्ञान को दूर करता है, जैसे केवल प्रकाश ही अन्धकार को।
ज्ञान की तुलना अग्नि से क्यों की गई है?▼
क्योंकि यह सम्बन्ध प्रत्यक्ष एवं अनिवार्य है। आप सामग्री को अनन्त काल तक एकत्र एवं तैयार कर सकते हैं, परन्तु अग्नि के बिना पका हुआ भोजन नहीं बनता। इसी प्रकार आप प्रत्येक पूर्वसाधन कर सकते हैं, परन्तु आत्मा के प्रत्यक्ष ज्ञान के बिना मोक्ष नहीं होता।
इस मुक्तिदायक ज्ञान को कैसे प्राप्त किया जाता है?▼
वेदान्त के पारम्परिक त्रिविध मार्ग द्वारा: श्रवण (शास्त्र और गुरु से उपदेश सुनना), मनन (सन्देहों के निवारण तक उस पर चिन्तन करना), और निदिध्यासन (गहन, सतत ध्यान जब तक सत्य का प्रत्यक्ष साक्षात्कार न हो)।
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