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ब्रह्मा गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning

ब्रह्मा गायत्री मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
ॐ, आदि नाद, परम ब्रह्म
वेदात्मनाय
Vedatmanaya
जिनका स्वरूप ही वेद है उनके लिए (पवित्र ज्ञान की आत्मा)
विद्महे
Vidmahe
हम जानें / हम जानने की इच्छा करते हैं
हिरण्यगर्भाय
Hiranyagarbhaya
हिरण्यगर्भ के लिए, स्वर्णिम गर्भ जिससे सृष्टि प्रकट होती है
धीमहि
Dhimahi
हम ध्यान करते हैं
तन्नः
Tannah
इसलिए, हमारे लिए / वह
ब्रह्मा
Brahma
ब्रह्मा, विश्व के रचयिता
प्रचोदयात्
Prachodayat
वे हमारी बुद्धि को प्रेरित एवं प्रकाशित करें

Complete Translation

ॐ। हम वेदस्वरूप को जानें, हिरण्यगर्भ का ध्यान करें; वे भगवान ब्रह्मा हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।

Origin & History

Source: The Gayatri mantra of Brahma

Author: Traditional (Vedic)

सार्वभौमिक गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परम्परा प्रत्येक महान देवता को उसका अपना गायत्री देती है — पवित्र गायत्री छंद में एक प्रार्थना जो उस देवता से बुद्धि को प्रकाशित करने का आवाहन करती है। ब्रह्मा गायत्री विश्व के रचयिता ब्रह्मा का आवाहन करती है, जो वेदों की आत्मा (वेदात्मा) और हिरण्यगर्भ — वह स्वर्णिम कॉस्मिक गर्भ जिससे समस्त सृष्टि प्रकट होती है — हैं। "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" की शाश्वत शैली का अनुसरण करते हुए यह सर्वोपरि बुद्धि, ज्ञान और सृजन-शक्ति के लिए जपा जाता है।

Frequently Asked Questions

ब्रह्मा गायत्री मंत्र क्या है?
यह रचयिता ब्रह्मा का गायत्री मंत्र है: "ॐ वेदात्मनाय विद्महे हिरण्यगर्भाय धीमहि। तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्"। पवित्र गायत्री छंद में रचित यह मंत्र ब्रह्मा — वेदों की आत्मा और स्वर्णिम कॉस्मिक गर्भ (हिरण्यगर्भ) — का आवाहन करके बुद्धि को प्रकाशित करने की प्रार्थना करता है, "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" की शैली में।
ब्रह्मा गायत्री मंत्र के क्या लाभ हैं?
यह बुद्धि, ज्ञान, सृजनशीलता एवं मन की स्पष्टता के लिए तथा अध्ययन, शोध और विद्या में सफलता के लिए जपा जाता है। गायत्री मंत्र होने से यह पवित्र एवं स्थिरतादायक भी है, जो बुद्धि को जगाता और ब्रह्मा की सृजन-कृपा को आकर्षित करता है।
मंत्र में नामित हिरण्यगर्भ कौन हैं?
हिरण्यगर्भ का अर्थ है 'स्वर्णिम गर्भ' या 'स्वर्ण अंड' — वह कॉस्मिक बीज जिससे विश्व प्रकट होता है, जिसे रचयिता ब्रह्मा से अभिन्न माना गया है। हिरण्यगर्भ का ध्यान करके यह मंत्र सृष्टि एवं ज्ञान के मूल स्रोत का आवाहन करता है, ताकि हमारे भीतर बुद्धि जागे।
इसे कब और कितनी बार जपना चाहिए?
इसे माला पर 108 बार जपें, आदर्श रूप से प्रातः और अन्य सन्ध्या कालों में, पूर्वाभिमुख होकर। अध्ययन, अध्यापन या सृजन-कार्य से पूर्व यह विशेष रूप से उपयुक्त है, और इसे दैनिक गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
क्या ब्रह्मा गायत्री मंत्र कोई भी जप सकता है?
हाँ — देवता गायत्री मंत्र भक्ति के साथ कोई भी जप सकता है। इसे प्रातः स्नान के पश्चात्, स्वच्छ मन से जपा जाता है, और यह एक सरल, पूर्ण दैनिक साधना है, विशेषकर विद्यार्थियों और ज्ञान के साधकों के लिए मूल्यवान।

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