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चिन्मय लिङ्गाष्टकम् — Word-by-Word Meaning

चिन्मय लिङ्गाष्टकम्

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

चिन्मय लिङ्ग — शुद्ध चैतन्य के लिङ्ग — की आठ श्लोकों की स्तुति, जो शिव को रूप नहीं अपितु निराकार, सर्वव्यापी चेतना रूप में, जो ब्रह्मांड का सार है, ध्यान करती है।

Origin & History

Source: Traditional (ascribed to Rudra)

Author: Rudra

Period: Classical

चिन्मय लिङ्गाष्टकम् परंपरागत रूप से रुद्र द्वारा रचित माना जाता है। यह चिन्मय लिङ्ग — शुद्ध चैतन्य के लिङ्ग — की आठ श्लोकों की स्तुति है, जो शिव को रूप में नहीं, अपितु निराकार, सर्वव्यापी चेतना रूप में, जो ब्रह्मांड का सार है, ध्यान करती है।

Frequently Asked Questions

चिन्मय लिङ्गाष्टकम् क्या है?
चिन्मय लिङ्ग — शुद्ध चैतन्य के लिङ्ग — की आठ श्लोकों की स्तुति, जो शिव को रूप में नहीं, अपितु निराकार, सर्वव्यापी चेतना रूप में, जो ब्रह्मांड का सार है, ध्यान करती है।
चिन्मय लिङ्गाष्टकम् की रचना किसने की और कब पाठ किया जाता है?
इसका श्रेय रुद्र (परंपरागत रूप से रुद्र को) को दिया जाता है। इसका पाठ प्रातः या सायं श्रद्धा सहित किया जाता है, विशेषकर सोमवार तथा महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास में।

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