दक्षिणामूर्ति अष्टकम् — Word-by-Word Meaning
दक्षिणामूर्ति अष्टकम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
दक्षिणामूर्ति — परम मौन गुरु रूप शिव — की आठ श्लोकों की स्तुति, जो तरुण गुरु अपने चरणों में बैठे वृद्ध ऋषियों को मौन द्वारा आत्मज्ञान का परम उपदेश देते हैं।
Origin & History
Source: Traditional
Author: Vrishabhadeva
Period: Classical
दक्षिणामूर्ति अष्टकम् परम्परागत रूप से वृषभदेव को आरोपित है। यह दक्षिणामूर्ति — परम मौन गुरु रूप शिव — की आठ श्लोकों की स्तुति है, जो तरुण गुरु अपने चरणों में बैठे वृद्ध ऋषियों को मौन के द्वारा आत्मज्ञान का परम उपदेश देते हैं।
Frequently Asked Questions
दक्षिणामूर्ति अष्टकम् क्या है?▼
दक्षिणामूर्ति — परम मौन गुरु रूप शिव — की आठ श्लोकों की स्तुति, जो तरुण गुरु अपने चरणों में बैठे वृद्ध ऋषियों को मौन के द्वारा आत्मज्ञान का परम उपदेश देते हैं।
दक्षिणामूर्ति अष्टकम् की रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?▼
यह वृषभदेव (परम्परागत) को आरोपित है। इसका पाठ प्रातः अथवा सायं श्रद्धापूर्वक किया जाता है, और विशेषतः सोमवार को तथा महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास में।
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