दशश्लोकी (निर्वाण दशकम्) — Word-by-Word Meaning
दशश्लोकी (निर्वाण दशकम्)
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
आदि शंकराचार्य के परम अद्वैत सत्य के दस श्लोक — "मैं न भूमि हूँ, न जल, न अग्नि, न वायु, न आकाश… मैं केवल शिव हूँ, एकमात्र कल्याणमय सत्य, शुद्ध चैतन्य व आनंद।"
Origin & History
Source: Ascribed to Adi Shankaracharya
Author: Adi Shankaracharya
Period: Classical
दशश्लोकी (निर्वाण दशकम्) परम्परागत रूप से आदि शंकराचार्य को आरोपित है। ये आदि शंकराचार्य के परम अद्वैत सत्य के दस श्लोक हैं — 'मैं न भूमि हूँ, न जल, न अग्नि, न वायु, न आकाश… मैं केवल शिव हूँ, एकमात्र कल्याणमय सत्य, शुद्ध चैतन्य व आनंद।'
Frequently Asked Questions
दशश्लोकी (निर्वाण दशकम्) क्या है?▼
आदि शंकराचार्य के परम अद्वैत सत्य के दस श्लोक — 'मैं न भूमि हूँ, न जल, न अग्नि, न वायु, न आकाश… मैं केवल शिव हूँ, एकमात्र कल्याणमय सत्य, शुद्ध चैतन्य व आनंद।'
इसकी रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?▼
यह आदि शंकराचार्य को आरोपित है (आदि शंकराचार्य को आश्रित)। इसका पाठ प्रातः अथवा सायं श्रद्धापूर्वक किया जाता है, विशेषतः सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण में।
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