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दीपज्योतिः परब्रह्म — दीप प्रज्वलन मन्त्र — Word-by-Word Meaning

दीपज्योतिः परब्रह्म — दीप प्रज्वलन मन्त्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

दीपज्योतिः
deepa-jyotih
दीप की ज्योति
परब्रह्म
parabrahma
परब्रह्म
जनार्दनः
janardanah
जनार्दन (विष्णु), समस्त प्राणियों का आश्रय
दीपः
deepah
दीप
हरतु मे पापं
haratu me papam
मेरे पापों का हरण करे
नमः अस्तु ते
namo'stu te
तुम्हें नमस्कार हो (हे दीपज्योति)
शुभं करोतु
shubham karotu
शुभ करे
कल्याणम्
kalyanam
कल्याण, मंगल
आरोग्यं
arogyam
आरोग्य, रोगरहितता
धनसम्पदः
dhana-sampadah
धन और सम्पदा
शत्रुबुद्धिविनाशाय
shatru-buddhi-vinashaya
शत्रुबुद्धि (शत्रुता) के नाश के लिए

Complete Translation

दीप की ज्योति परब्रह्म है, दीप की ज्योति जनार्दन (विष्णु) है। यह दीप मेरे पापों का हरण करे; हे दीपज्योति, तुम्हें नमस्कार है। यह शुभ, कल्याण, आरोग्य, धन-सम्पदा प्रदान करे और शत्रुबुद्धि का नाश करे; हे दीपज्योति, तुम्हें नमस्कार है।

Origin & History

Source: Traditional Deepa-darshana / lamp-lighting shloka

Author: Traditional

Period: Classical

संध्या-वेला में दीप जलाना हिन्दू गृह के सबसे प्राचीन और प्रिय अनुष्ठानों में से एक है। यह श्लोक सायंकालीन दीपम् के साथ पढ़ा जाता है, यह घोषित करते हुए कि यह ज्योति केवल अग्नि नहीं अपितु साक्षात् परब्रह्म और भगवान विष्णु हैं, जो प्रकाश रूप में विद्यमान हैं। इसके साथ भक्त दिन के रात्रि में बदलते समय दिव्यता का घर में स्वागत करता है, दीप से प्रार्थना करता है कि वह पाप और अन्धकार का हरण करे तथा आरोग्य, समृद्धि, शुभता और सद्भाव प्रदान करे। इसे प्रायः इसके सहचर दीप-मन्त्र 'शुभं करोति कल्याणम्' के साथ पढ़ा जाता है।

Frequently Asked Questions

दीपज्योतिः परब्रह्म का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है — 'दीप की ज्योति परब्रह्म है, दीप की ज्योति विष्णु (जनार्दन) है। यह दीप मेरे पापों का हरण करे; दीपज्योति को नमस्कार।' दूसरा श्लोक प्रार्थना करता है कि यह दीप शुभ, आरोग्य, धन तथा समस्त शत्रुता का नाश प्रदान करे।
यह मन्त्र कब पढ़ा जाता है?
यह संध्या-काल में घर के देवालय के समक्ष सायं दीप जलाते समय पढ़ा जाता है। दिन और रात्रि के संधिकाल में दीप जलाना हिन्दू घरों में विशेष पवित्र और शुभ माना जाता है।
दीप को भगवान रूप में क्यों पूजा जाता है?
प्रकाश ज्ञान, पवित्रता तथा अन्धकार और अज्ञान के नाश का प्रतीक है। यह श्लोक ज्योति को साक्षात् परब्रह्म और विष्णु बताता है, अतः दीप जलाना एक पूजा-कर्म है जो घर में दिव्य उपस्थिति और आशीर्वाद को आमन्त्रित करता है।

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