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दुर्गा आरती — जय अम्बे गौरी Meaning — Line by Line

दुर्गा आरती — जय अम्बे गौरी

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of दुर्गा आरती — जय अम्बे गौरी with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

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  1. Verse 1. Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri
  2. Verse 2. Mang Sindoor Virajat, Teeko Mrigmad Ko
  3. Verse 3. Kanak Saman Kalevar, Raktambar Raje
  4. Verse 4. Kehari Vahan Rajat, Khadg Khappar Dhari
  5. Verse 5. Kanan Kundal Shobhit, Nasagre Moti
  6. Verse 6. Shumbh Nishumbh Vidare, Mahishasur Ghati
  7. Verse 7. Chand Mund Sanhare, Shonit Bij Hare
  8. Verse 8. Brahmani Rudrani, Tum Kamla Rani
  9. Verse 9. Chaunsath Yogini Gavat, Nritya Karat Bhairon
  10. Verse 10. Tum Hi Jag Ki Mata, Tum Hi Ho Bharta
  11. Verse 11. Bhuja Char Ati Shobhit, Var Mudra Dhari
  12. Verse 12. Kanchan Thal Virajat, Agar Kapur Bati
  13. Verse 13. Shri Ambeji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gave
Verse 1#

Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ जय अम्बे गौरी॥

Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri Tumko Nishdin Dhyavat, Hari Brahma Shivri Jai Ambe Gauri

Meaningमाँ अम्बे गौरी की जय! प्यारी माँ, श्यामा गौरी की जय! हरि, ब्रह्मा और शिव दिन-रात तुम्हारा ध्यान करते हैं। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 2#

Mang Sindoor Virajat, Teeko Mrigmad Ko

मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दो नैना, चन्द्रवदन नीको॥ जय अम्बे गौरी॥

Mang Sindoor Virajat, Teeko Mrigmad Ko Ujjwal Se Do Naina, Chandravadan Neeko Jai Ambe Gauri

Meaningतुम्हारी माँग में सिन्दूर शोभित है और माथे पर कस्तूरी का तिलक सुशोभित है। तुम्हारे दोनों नेत्र उज्ज्वल चमकते हैं और चन्द्रमा-सा मुख अति सुन्दर है। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 3#

Kanak Saman Kalevar, Raktambar Raje

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे। रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजे॥ जय अम्बे गौरी॥

Kanak Saman Kalevar, Raktambar Raje Raktpushp Gal Mala, Kanthan Par Saje Jai Ambe Gauri

Meaningतुम्हारा शरीर शुद्ध स्वर्ण-सा कान्तिमान है और तुम रक्त-वस्त्र धारण किए हो। लाल पुष्पों की माला तुम्हारे कण्ठ को सुन्दरता से सुशोभित करती है। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 4#

Kehari Vahan Rajat, Khadg Khappar Dhari

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ जय अम्बे गौरी॥

Kehari Vahan Rajat, Khadg Khappar Dhari Sur Nar Munijan Sevat, Tinke Dukh Hari Jai Ambe Gauri

Meaningतुम सिंह पर वैभव से विराजमान हो, हाथ में खड्ग और खप्पर धारण किए। देव, मनुष्य और मुनिजन तुम्हारी सेवा करते हैं — तुम उनके दुःखों को हरने वाली हो। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 5#

Kanan Kundal Shobhit, Nasagre Moti

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥ जय अम्बे गौरी॥

Kanan Kundal Shobhit, Nasagre Moti Kotik Chandra Divakar, Sam Rajat Jyoti Jai Ambe Gauri

Meaningतुम्हारे कानों में कुण्डल सुन्दरता से शोभित हैं और नासिका के अग्रभाग पर मोती सुशोभित है। तुम्हारी आभा करोड़ों चन्द्र और सूर्य के समान चमकती है। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 6#

Shumbh Nishumbh Vidare, Mahishasur Ghati

शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती। धूम्रविलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ जय अम्बे गौरी॥

Shumbh Nishumbh Vidare, Mahishasur Ghati Dhumravilochan Naina, Nishdin Madmati Jai Ambe Gauri

Meaningतुमने शुम्भ और निशुम्भ का संहार किया और महिषासुर का वध किया। अपने धूम्र-नेत्रों की दृष्टि से तुम सदा दिव्य शक्ति में मदमाती रहती हो। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 7#

Chand Mund Sanhare, Shonit Bij Hare

चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ जय अम्बे गौरी॥

Chand Mund Sanhare, Shonit Bij Hare Madhu Kaitabh Dou Mare, Sur Bhayahin Kare Jai Ambe Gauri

Meaningतुमने चण्ड और मुण्ड का संहार किया और रक्तबीज दैत्य का नाश किया। तुमने मधु और कैटभ दोनों का वध कर देवों को भयरहित किया। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 8#

Brahmani Rudrani, Tum Kamla Rani

ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ जय अम्बे गौरी॥

Brahmani Rudrani, Tum Kamla Rani Agam Nigam Bakhani, Tum Shiv Patrani Jai Ambe Gauri

Meaningतुम ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला (लक्ष्मी) हो, हे रानी! आगम और निगम तुम्हारी स्तुति गाते हैं — तुम शिव की परम पटरानी हो। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 9#

Chaunsath Yogini Gavat, Nritya Karat Bhairon

चौँसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥ जय अम्बे गौरी॥

Chaunsath Yogini Gavat, Nritya Karat Bhairon Bajat Taal Mridanga, Aru Bajat Damru Jai Ambe Gauri

Meaningचौंसठ योगिनियाँ तुम्हारा यश गाती हैं और भैरव आनन्द में नृत्य करते हैं। मृदंग पर ताल बजता है और शिव का डमरू बजता है। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 10#

Tum Hi Jag Ki Mata, Tum Hi Ho Bharta

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता। भक्तन की दुख हर्ता, सुख सम्पत्ति कर्ता॥ जय अम्बे गौरी॥

Tum Hi Jag Ki Mata, Tum Hi Ho Bharta Bhaktan Ki Dukh Harta, Sukh Sampatti Karta Jai Ambe Gauri

Meaningतुम ही जगत की माता हो, तुम ही इसकी पालनकर्ता हो। तुम भक्तों के दुःख हरती हो और सुख-सम्पत्ति प्रदान करती हो। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 11#

Bhuja Char Ati Shobhit, Var Mudra Dhari

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ जय अम्बे गौरी॥

Bhuja Char Ati Shobhit, Var Mudra Dhari Manvanchhit Phal Pavat, Sevat Nar Nari Jai Ambe Gauri

Meaningतुम्हारी चार भुजाएँ महान तेज से शोभित हैं, वरमुद्रा धारण किए। जो नर-नारी तुम्हारी सेवा करते हैं वे मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 12#

Kanchan Thal Virajat, Agar Kapur Bati

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥ जय अम्बे गौरी॥

Kanchan Thal Virajat, Agar Kapur Bati Malketu Mein Rajat, Koti Ratan Jyoti Jai Ambe Gauri

Meaningस्वर्ण-थाल में अगर और कपूर की बातियाँ जल रही हैं। उस महान ज्योति में करोड़ों रत्नों की आभा चमकती है। माँ अम्बे गौरी की जय!

Verse 13#

Shri Ambeji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gave

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥ जय अम्बे गौरी॥

Shri Ambeji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gave Kahat Shivanand Swami, Sukh Sampatti Pave Jai Ambe Gauri

Meaningजो कोई श्री अम्बे की यह आरती गाता है — स्वामी शिवानन्द कहते हैं — वह सुख और सम्पत्ति प्राप्त करता है। माँ अम्बे गौरी की जय!

Word-by-Word Breakdown

अम्बे
Ambe
माता (दुर्गा का एक नाम)
गौरी
Gauri
गौरवर्णा, पार्वती/दुर्गा
श्यामा
Shyama
श्यामवर्णा (काली रूप)
सिन्दूर
Sindoor
माँग में सिन्दूर
मृगमद
Mrigmad
कस्तूरी (मृग-कस्तूरी का तिलक)
चन्द्रवदन
Chandravadan
चन्द्रमा-सा मुख
कनक
Kanak
स्वर्ण
रक्ताम्बर
Raktambar
रक्त-वस्त्र
केहरि वाहन
Kehari Vahan
सिंह वाहन (दुर्गा का वाहन)
खड्ग
Khadg
खड्ग (तलवार)
खप्पर
Khappar
खप्पर (कपाल-पात्र)
शुम्भ निशुम्भ
Shumbh Nishumbh
दुर्गा द्वारा वध किए गए दो दैत्य-भाई
महिषासुर
Mahishasur
दुर्गा द्वारा वध किया गया महिषासुर
धूम्रविलोचन
Dhumravilochan
दुर्गा द्वारा वध किया गया धूम्र-नेत्र दैत्य
चण्ड मुण्ड
Chand Mund
चामुण्डा द्वारा वध किए गए दो दैत्य-सेनापति
शोणित बीज
Shonit Bij
रक्तबीज — जिसके रक्त से प्रतिरूप उत्पन्न होते थे
मधु कैटभ
Madhu Kaitabh
विष्णु/देवी द्वारा वध किए गए दो आदि-दैत्य
ब्रह्माणी
Brahmani
ब्रह्मा की शक्ति
रुद्राणी
Rudrani
रुद्र (शिव) की शक्ति
चौँसठ योगिनी
Chaunsath Yogini
चौंसठ योगिनियाँ (दिव्य परिचारिकाएँ)
भैरों
Bhairon
भैरव, शिव का उग्र रूप
मृदंगा
Mridanga
दो मुख वाला मृदंग
डमरू
Damru
शिव का डमरू

Origin & History

Source: Hindu devotional folk tradition; references Devi Mahatmyam (Durga Saptashati)

Author: Attributed to Swami Shivananda (folk tradition)

Period: Medieval period

दुर्गा आरती 'जय अम्बे गौरी' माँ दुर्गा को समर्पित सबसे लोकप्रिय आरती है और नवरात्रि के उत्सव से अभिन्न है। यह अपनी विषयवस्तु देवी महात्म्य (मार्कण्डेय पुराण) से लेती है, उन महान युद्धों का स्मरण करते हुए जिनमें दुर्गा ने महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ, रक्तबीज जैसे प्रबल राक्षसों का संहार किया। आरती दुर्गा को उनके पूर्ण वैभव में प्रस्तुत करती है — स्वर्णकाय, रक्ताम्बरधारिणी, सिंहवाहिनी, खड्गधारिणी, फिर भी विश्व की करुणामयी माता जो भक्तों के दुख हरती हैं। अंतिम पद में स्वामी शिवानन्द को इसका श्रेय इसे संत-प्रामाणिकता का भाव देता है।

Frequently Asked Questions

नवरात्रि में दुर्गा आरती कब गाई जाती है?
दुर्गा आरती 'जय अम्बे गौरी' नवरात्रि की नौ रातों में हर संध्या को गाई जाती है। यह उत्सव की केंद्रीय आरती है और संध्या पूजा व जागरण (रात्रि-जागरण) के बाद की जाती है। यह दुर्गा पूजा के समय और दुर्गा मंदिरों में वर्ष भर भी गाई जाती है।
दुर्गा आरती 'जय अम्बे गौरी' किसने लिखी?
अंतिम पद इस आरती का श्रेय स्वामी शिवानन्द को देता है, यद्यपि ठीक-ठीक ऐतिहासिक पहचान विवादित है। इसे व्यापक रूप से एक लोक भक्ति-रचना माना जाता है जो उत्तर भारत में सदियों से गाई जाती रही है।
आरती में किन राक्षसों का उल्लेख है?
आरती पाँच राक्षस-युद्धों का उल्लेख करती है: शुम्भ और निशुम्भ (दो राक्षस भाई), महिषासुर (भैंसा राक्षस), धूम्रविलोचन (धुएँ-सी आँखों वाला राक्षस), चण्ड और मुण्ड (दो सेनापति), रक्तबीज (रक्त-बीज राक्षस), और मधु-कैटभ (आदि राक्षस)। ये सब देवी महात्म्य से हैं।
आरती में सिंह का क्या महत्व है?
सिंह (केहरि/सिंह) दुर्गा का वाहन है, जो शक्ति, साहस और सार्वभौमता का प्रतीक है। सिंह पर सवार दुर्गा बुरी शक्तियों पर दिव्य शक्ति की विजय का प्रतिनिधित्व करती हैं। 'केहरि वाहन राजत' पद इसी भव्य रूप का गुणगान करता है।
क्या पुरुष दुर्गा आरती गा सकते हैं?
बिलकुल। आरती कहती है 'सेवत नर नारी' — दुर्गा की सेवा करने वाले नर और नारी दोनों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। दुर्गा की पूजा लिंग के भेद बिना सबके लिए है।

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