गोपाल गोपाल देवकीनन्दन गोपाल — Word-by-Word Meaning
गोपाल गोपाल देवकीनन्दन गोपाल
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
गोपाल
Gopala
गौओं के रक्षक; ग्वाल स्वामी — कृष्ण का प्रिय नाम
गो
Go
गौएँ; इन्द्रियाँ एवं पृथ्वी भी
पाल
Pala
रक्षक, पालक, संरक्षक
देवकी
Devaki
देवकी, जिन्होंने कृष्ण को जन्म दिया वह दिव्य माता
नन्दन
Nandana
प्रिय पुत्र; (देवकी का) आनन्द
देवकीनन्दन
Devaki-nandana
देवकी के प्रिय पुत्र — श्रीकृष्ण
गोपाल गोपाल
Gopala Gopala
'गोपाल' नाम का प्रेमपूर्वक पुनरावर्तन — कृष्ण को बार-बार ग्वाल स्वामी कहकर पुकारना
कृष्ण
Krishna
सर्व-आकर्षक भगवान जिन्हें गोपाल के ये नाम आवाहित करते हैं (कीर्तन का अभिप्रेत लक्ष्य)
नन्द
Nanda
हर्ष, आनन्द; गोकुल में कृष्ण के पालक पिता नन्द महाराज का स्मरण भी
गोविन्द
Govinda
कृष्ण का एक सम्बन्धित नाम — गौओं, इन्द्रियों और पृथ्वी को आनन्द देने वाले (प्रायः गोपाल के साथ गाया जाने वाला)
Complete Translation
हे गोपाल, गोपाल — देवकी के लाडले पुत्र, हे गोपाल! (श्रीकृष्ण, ग्वालों के स्वामी और देवकी माता के पुत्र के पवित्र नामों का प्रेमपूर्वक कीर्तन।)
Origin & History
Source: Traditional Krishna dhun / nama-kirtan
Author: Unknown (traditional / devotional folk)
Period: Medieval to modern Bhakti tradition
हरे कृष्ण महामन्त्र की भाँति यह धुन नाम-संकीर्तन की जीवन्त परम्परा से सम्बन्धित है — पवित्र नामों का सामूहिक गायन। 'गोपाल' और 'देवकीनन्दन' को दोहराकर भक्त कृष्ण की वृन्दावन के ग्वाल रक्षक के रूप में अन्तरंग भूमिका और इस संसार में देवकी-पुत्र के रूप में उनके अवतरण दोनों का स्मरण करते हैं। यह मन्दिरों और घरों में समान रूप से सबसे सरल और सर्वाधिक प्रिय कृष्ण कीर्तनों में से एक है।
Frequently Asked Questions
'गोपाल देवकीनन्दन' का क्या अर्थ है?▼
गोपाल का अर्थ है 'गौओं के रक्षक / ग्वाल स्वामी', जो कृष्ण का प्रिय नाम है। देवकीनन्दन का अर्थ है 'देवकी के प्रिय पुत्र'। दोनों मिलकर यह धुन कृष्ण को इन दो प्रिय नामों से प्रेमपूर्वक पुकारती है।
कृष्ण को गोपाल क्यों कहा जाता है?▼
कृष्ण गोकुल और वृन्दावन के ग्वालों के बीच पले, गौएँ चराते और जो भी उनकी शरण आता उसकी रक्षा करते थे। 'गोपाल' उन्हें प्रेमी संरक्षक के रूप में महिमामण्डित करता है — गो-पाल, गौओं, इन्द्रियों और समस्त सृष्टि के रक्षक।
यह धुन कैसे गाई जाती है?▼
इसे एक सरल, मधुर स्वर में पुनरावर्ती धुन के रूप में गाया जाता है, प्रायः प्रश्न-उत्तर शैली के कीर्तन में। पुनरावर्तन की कोई निश्चित संख्या नहीं है; भक्त इसे जब तक चाहें गाते हैं, और नामों को कृष्ण-प्रेम में मन को तल्लीन करने देते हैं।
इसे विशेष रूप से कब गाया जाता है?▼
इसे किसी भी समय नित्य स्मरण के रूप में, भजन एवं सत्संग सभाओं में, और विशेषतः जन्माष्टमी पर — कृष्ण के जन्मदिन — देवकी-पुत्र के रूप में उनकी महिमा गाते हुए गाया जाता है।
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